मोदी कैबिनेट में फेरबदल की सुगबुगाहट, जानें किन मंत्रियों के विभाग बदलेंगे और कौन हो सकता है शामिल
देश की राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहुत जल्द अपनी सरकार की टीम में बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं। पार्टी संगठन में फेरबदल पूरा होने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर मंत्रियों की जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा तय माना जा रहा है।
सियासी जानकारों का मानना है कि इस बार के फेरबदल से आने वाले समय में सरकार के काम करने के तौर-तरीकों और उसकी प्राथमिकताओं की एक स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी। कई मौजूदा मंत्रियों का बोझ कम किया जा सकता है तो कुछ नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
बड़े मंत्रियों के भविष्य पर चर्चा और उनके संभावित कार्यभार
इस संभावित बदलाव के बीच कुछ खास चेहरों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। पीयूष गोयल को हाल ही में भाजपा का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है लेकिन इसके बावजूद उनके मंत्री पद पर बने रहने की पूरी संभावना है।
अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक वार्ताओं और वैश्विक समझौतों में वाणिज्य मंत्री के तौर पर उनकी सक्रिय भूमिका को देखतेफिलहाल सरकार उन्हें इस पद से हटाने का जोखिम नहीं उठाना चाहती है। दूसरी तरफ नीट परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान की किसी दूसरे महकमे में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं। संसद भवन में उन्हें मंत्रियों वाला नया कमरा मिलने से इन चर्चाओं को और बल मिल गया है।
सिख प्रतिनिधित्व का संकट और महिला तथा दक्षिण भारत पर फोकस
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा का कार्यकाल इसी साल 25 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है। अगर उन्हें दोबारा संसद नहीं भेजा जाता है तो उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ सकता है और ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार की कैबिनेट में कोई भी सिख चेहरा नहीं बचेगा।
इसके अलावा इस बार मंत्रिमंडल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की भी पूरी तैयारी है जिसमें राजस्थान से डॉक्टर अलका गुर्जर का नाम सबसे आगे चल रहा है। पिछले दिनों संगठन में दक्षिण भारत को कम प्रतिनिधित्व मिलने की भरपाई अब सरकार में की जा सकती है जहां से पहले से ही करीब दस मंत्री अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सहयोगी दलों की भारी-भरकम मांगें और सियासी समीकरण
एनडीए के घटक दल भी इस बदलाव में अपनी हिस्सेदारी पक्की करने के लिए जोर लगा रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के प्रमुख चिराग पासवान अपने मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से इतर कोई बड़ा विभाग हासिल करना चाहते हैं।
महाराष्ट्र में तेरह लोकसभा सांसद होने के चलते एकनाथ शिवसेना धड़े के नेता एक और कैबिनेट पद की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की हालिया बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी है और क्षेत्रीय दलों के आपसी मुद्दों को जल्द सुलझाने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री खुद द्रमुक को साथ लाने की कोशिशों में जुटे हैं जिससे तमिलनाडु को भी केंद्र में उचित जगह मिल सके।
उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के चेहरों पर टिकी निगाहें
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा अपनी सियासी जमीन को और मजबूत करने में जुटी है। राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य या ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र की राजनीति में लाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा की कमान मिलने के बाद से केशव प्रसाद का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है जिससे पार्टी राज्य का सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर जैसे बड़े नेता भी चुनावी और राजनीतिक जरूरतों के लिहाज से इस फेरबदल का अहम हिस्सा बन सकते हैं।