क्या मंगेतर सिया गोयल भी सोनम रघुवंशी की तरह बच निकलेगी, केतन मर्डर केस में आया चौंकाने वाला मोड़
केतन अग्रवाल के कत्ल का मामला अब सिर्फ एक अपराध जांच नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की जांच क्षमता और कानूनी प्रक्रिया की बारीकियों की बड़ी परीक्षा बन गया है। इस केस में मुख्य आरोपी उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसका कथित साथी चेतन चौधरी हैं, जिन पर मिलकर साजिश रचने का आरोप है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस पूरे मामले को अदालत में मजबूत सबूतों के साथ साबित कैसे किया जाए, क्योंकि अधिकतर सबूत परिस्थितिजन्य हैं।
जांच में आ रही ये दिक्कत
जांच अधिकारियों के अनुसार घटना के समय ऐसा कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था जिसने सीधे तौर पर देखा हो कि केतन को किले की चट्टान से धक्का दिया गया।
किले के आसपास लगे कैमरों में भी ऐसा कोई दृश्य रिकॉर्ड नहीं हुआ जो हत्या को स्पष्ट रूप से दिखाता हो। फुटेज में केवल चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए देखा गया है, लेकिन यह अपने आप में अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
पुलिस ने घटना को समझने के लिए सीन रीक्रिएशन भी किया। इसमें डमी का इस्तेमाल हुआ। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि डमी की सीमाओं के कारण यह साबित करना मुश्किल है कि गिरना दुर्घटना थी या जानबूझकर किया गया कृत्य।
कहीं सोनम रघुवंशी की तरह बच जाए ना सिया
जांच टीम इस बात को लेकर बेहद सतर्क है कि कहीं यह मामला भी तकनीकी गलती की वजह से कमजोर न पड़ जाए, जैसा हाल ही में मेघालय के चर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ में देखा गया था।
उस मामले में गिरफ्तारी के दौरान धाराओं के गलत उल्लेख और प्रक्रिया संबंधी त्रुटियों की वजह से आरोपी को जमानत मिल गई थी। अदालत ने माना था कि गिरफ्तारी के कारण सही तरीके से नहीं बताए गए थे, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इसी वजह से इस केस में पुलिस अब हर दस्तावेज और चार्जशीट को बेहद सावधानी से तैयार कर रही है, ताकि बचाव पक्ष किसी भी तकनीकी खामी का फायदा न उठा सके।