दिवाली पर इस दिशा में लगाएं मां लक्ष्मी के चरण चिह्न

दिवाली पर इस दिशा में लगाएं मां लक्ष्मी के चरण चिह्न

सनातन धर्म में सुख, समृद्धि और वैभव की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी के आगमन का महापर्व दिवाली पूरे देश में अत्यंत भक्तिभाव और उल्लास के साथ मनाया जाता है। दिवाली के पावन अवसर पर घर के मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल तक की साफ-सफाई और सजावट का विशेष धार्मिक व वास्तु महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए लोग अपने घरों में रंगोली, वंदनवार और मां लक्ष्मी के चरण चिह्न (Maa Lakshmi Charan Paduka) लगाते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय विधान के अनुसार, मां लक्ष्मी की चरण पादुका या चरण चिह्नों को सही दिशा और सही स्थान पर लगाना अत्यंत आवश्यक माना गया है। यदि चरण चिह्नों को गलत दिशा या गलत तरीके से लगा दिया जाए, तो घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है और लक्ष्मी आगमन में अड़चन आ सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी के चरण चिह्नों को किस दिशा में और किस नियम से लगाना चाहिए ताकि आपके घर में धन, वैभव और शांति का वास हमेशा बना रहे।

#1. मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने की सबसे शुभ दिशा: वास्तु अनुसार जानें सही नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिवाली पूजन के दिन मां लक्ष्मी के चरण चिह्नों को लगाने के लिए उत्तर (North) और उत्तर-पूर्व (East-North / ईशान कोण) दिशा को सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है। सनातन परंपरा में उत्तर दिशा को धन के देवता भगवान कुबेर और देवी लक्ष्मी की दिशा माना जाता है। जब आप अपने घर के मुख्य द्वार (Main Entrance) या पूजा घर के फर्श पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न चिपकाते या चित्र अंकित करते हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चरणों की दिशा हमेशा घर के अंदर की ओर (Inward Movement) आनी चाहिए। इसका अर्थ यह है कि चरण देखकर ऐसा प्रतीत होना चाहिए कि मां लक्ष्मी बाहर से आपके घर के भीतर प्रवेश कर रही हैं। चरण चिह्नों का रुख कभी भी घर के बाहर की ओर नहीं होना चाहिए, अन्यथा इसे धन के फिजूलखर्च और घर से समृद्धि के बाहर जाने का प्रतीक माना जाता है।

#1. मुख्य द्वार और पूजा घर में चरण चिह्न लगाते समय इन गलतियों से बचें

दिवाली के दिन घर के मुख्य द्वार और दहलीज (Threshold) पर चरण चिह्न लगाते समय कुछ विशेष शास्त्रीय नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सबसे पहले, जिस स्थान पर आप मां लक्ष्मी के चरण लगा रहे हैं, वह जगह पूरी तरह से साफ, पवित्र और पानी व गंगाजल से धुली होनी चाहिए। कभी भी जूते-चप्पल रखने वाले स्टैंड (Shoe Rack), कचरे के डिब्बे या गंदे फर्श के आसपास चरण चिह्न न लगाएं। इसके अतिरिक्त, बाथरूम के दरवाजे के ठीक सामने या ऐसी जगह पर जहां लोगों का पैर सीधे चरण चिह्न पर पड़े, वहां चरण लगाना वर्जित है। यदि आप स्टीकर वाले चरण चिह्नों का उपयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे खंडित या फटे हुए न हों। यदि आप चावल के आटे, सिंदूर या रोली से चरण चिह्न बना रहे हैं, तो यह और भी अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है।

#1. मां लक्ष्मी चरण पादुका का धार्मिक महत्व और कुबेर देव का आशीर्वाद

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिस घर में स्वच्छता, नियम और श्रद्धा भाव से उनका स्वागत किया जाता है, वहां वे स्थायी रूप से वास करती हैं। मां लक्ष्मी के चरण चिह्न केवल सजावट का साधन नहीं हैं, बल्कि यह देवी के प्रत्यक्ष आशीर्वाद और उनकी दिव्य ऊर्जा को घर के वातावरण में आकर्षित करने का एक पवित्र प्रतीक हैं। जब आप सही वास्तु दिशा में चरण चिह्न स्थापित करते हैं, तो घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और वास्तु दोष दूर होते हैं। इसके प्रभाव से व्यापार में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं, नए आय के स्रोत बनते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच खुशहाली और सामंजस्य बढ़ता है।

#1. दिवाली पूजन के दिन ऐसे करें चरण चिह्नों का पूजन और मंत्र जाप

दिवाली पूजन के शुभ मुहूर्त में जब आप मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा करें, तो मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर लगाए गए चरण चिह्नों की भी रोली, अक्षत, हल्दी और लाल पुष्प अर्पित करके पूजा करें। चरण पादुका के समीप एक गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः" अथवा "ॐ श्रीं श्रियै नमः" मंत्र का जाप करें। इसके बाद चरण चिह्नों पर थोड़ा सा जल और धूप दिखाकर मां लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि वे आपके घर में सदा के लिए अपनी कृपा और धन-धान्य बनाए रखें। इस सरल और सटीक शास्त्रीय विधि से चरण स्थापित करने से घर में कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता।