Rajgir Malmas Mela 2026: राजगीर मेले में 33 करोड़ देवताओं का डेरा, इस एक महीने क्यों गायब हो जाते हैं सारे कौए? जानें शाही स्नान की तारीखें

Rajgir Malmas Mela 2026: राजगीर मेले में 33 करोड़ देवताओं का डेरा, इस एक महीने क्यों गायब हो जाते हैं सारे कौए? जानें शाही स्नान की तारीखें

बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरती राजगीर में इस समय आस्था का सबसे बड़ा जनसैलाब उमड़ रहा है। विश्व प्रसिद्ध राजगीर मलमास मेला पूरी भव्यता के साथ शुरू हो चुका है, जो अगले एक महीने यानी 15 जून तक चलेगा। इस पावन अवधि में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु राजगीर के पवित्र गर्म पानी के 22 कुंडों और 52 धाराओं में आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। सनातन परंपरा में मान्यता है कि इस एक महीने की अवधि में हिंदू धर्म के सभी 33 कोटि (करोड़) देवी-देवता स्वर्ग लोक छोड़कर राजगीर की तपोभूमि पर निवास करते हैं। यही वजह है कि यहां के पवित्र कुंडों में मात्र एक डुबकी लगाने से मनुष्य के जनम-जनम के पाप और कष्ट हमेशा के लिए धुल जाते हैं।

कागभुशुण्डि की कथा और कौओं के गायब होने का वो अनसुलझा रहस्य

राजगीर मलमास मेले का सबसे हैरान और रोमांचित कर देने वाला पहलू यहां का एक अनोखा रहस्य है। स्थानीय लोगों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे एक महीने के दौरान राजगीर की सीमा में एक भी कौआ दिखाई नहीं देता। यह रहस्य रामायण काल के परम रामभक्त कागभुशुण्डि से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव माता पार्वती को प्रभु श्री राम की अमर कथा सुना रहे थे, तब कागभुशुण्डि ने कौए का रूप धारण कर उस परम ज्ञान को सुन लिया था। बाद में वो राजगीर आकर बस गए। कहा जाता है कि एक बार राजगीर के राजा ने एक भव्य वाजपेयी यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने भूलवश कागभुशुण्डि को आमंत्रित नहीं किया। इस अपमान से रुष्ट होकर और देवताओं के आगमन की आध्यात्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए, मलमास के दौरान तमाम कौए इस क्षेत्र को छोड़कर चले जाते हैं।

लग रहा है शाही स्नान का महायोग, नोट कर लें ये 6 प्रमुख तिथियां

इस वर्ष राजगीर मेले में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं को तीन शाही स्नान सहित कुल 6 विशेष महायोग मिल रहे हैं। इन प्रमुख दिनों में करीब 2 से ढाई लाख श्रद्धालु एक साथ कुंडों में महास्नान करते हैं। प्रशासन और ज्योतिषियों के अनुसार शाही स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें इस प्रकार हैं:

  • 21 मई (पहला शाही स्नान): ज्येष्ठ पंचमी के पावन अवसर पर मेले का पहला आधिकारिक शाही स्नान होगा।

  • 27 मई (दूसरा शाही स्नान): एकादशी के शुभ मुहूर्त पर श्रद्धालु दूसरी बड़ी डुबकी लगाएंगे।

  • 31 मई (तीसरा शाही स्नान): ज्येष्ठ पूर्णिमा के महायोग पर तीसरा मुख्य शाही स्नान संपन्न होगा।

  • अन्य विशेष तिथियां: इसके बाद 5 जून, 11 जून और मेले के अंतिम दिन यानी 15 जून को भी महास्नान का विशेष फल मिलेगा।

पूरे देश में मांगलिक कार्य बंद, फिर राजगीर में क्यों बरसती है कृपा?

वैदिक काल गणना के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के चक्र को संतुलित करने के लिए 13वां महीना प्रकट हुआ, तो उसमें कोई पूर्णिमा या अमावस्या तिथि नहीं थी। इस वजह से इसे 'मलिन' यानी मलमास कहा जाने लगा। कोई भी देवता इस मलिन महीने का स्वामी बनने को तैयार नहीं था। तब जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने आगे बढ़कर इस महीने को अपनाया और इसे अपना सबसे प्रिय नाम 'पुरुषोत्तम मास' दिया। भगवान विष्णु के साथ ही स्वर्ग के सभी 33 करोड़ देवी-देवता एक महीने के लिए राजगीर की धरती पर आकर रहने लगे। यही कारण है कि इस एक महीने में पूरे देश में मुंडन, विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन राजगीर में किया गया स्नान, दान, जप और तप अनंत गुना फल प्रदान करता है।

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