Sawan Somwar Vrat Katha: सिर्फ जल और बेलपत्र नहीं, सावन सोमवार व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये पौराणिक कथा; पूरी होती है हर मनोकामना

Sawan Somwar Vrat Katha: सिर्फ जल और बेलपत्र नहीं, सावन सोमवार व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये पौराणिक कथा; पूरी होती है हर मनोकामना

हिन्दू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र और पावन मास माना जाता है। इस पूरे महीने में सोमवार के दिन रखे जाने वाले व्रतों का विशेष और दैवीय महत्व होता है। शिव भक्त सावन सोमवार के दिन सुबह सवेरे उठकर स्नान करते हैं और विधि-विधान से शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल जल और बेलपत्र चढ़ा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ सावन सोमवार की पौराणिक व्रत कथा का श्रवण या पाठ करना भी उतना ही अनिवार्य माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कथा के बिना व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है। आइए जानते हैं सावन सोमवार की वह विशेष पौराणिक कथा, जिसके पढ़ने मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

सावन सोमवार की पौराणिक व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में किसी नगर में एक साहूकार रहता था जो अपार धन-दौलत का स्वामी था, लेकिन वह संतानहीन होने के कारण बेहद दुखी रहता था। संतान प्राप्ति के लिए वह हर सोमवार को पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव का व्रत रखता था और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करता था। उसकी इस सच्ची और निष्ठावान भक्ति को देखकर एक दिन माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से कहा कि हे प्रभु, यह साहूकार आपका अनन्य भक्त है और आपकी नियमित पूजा करता है, फिर आप इसकी झोली क्यों नहीं भरते? क्या कारण है कि इसे अब तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ?

माता पार्वती के आग्रह पर भोलेनाथ ने मुस्कुराते हुए कहा कि हे देवी, इस साहूकार के भाग्य में संतान का सुख नहीं लिखा है, लेकिन चूँकि यह मेरा अनन्य भक्त है और लगातार व्रत रख रहा है, इसलिए मैं इसे इसकी इच्छा का वरदान अवश्य दूंगा। भगवान शिव की कृपा से कुछ ही समय बाद साहूकार के घर एक अत्यंत सुंदर और गुणवान पुत्र का जन्म हुआ। बच्चे के जन्म से पूरे नगर में खुशियां छा गईं, लेकिन ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि यह बालक अल्पायु है और जब यह बारह वर्ष का होगा, तब इसकी किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाएगी।

बारह वर्ष की आयु और भगवान शिव की अद्भुत कृपा

समय का पहिया घूमता गया और वह बालक धीरे-धीरे बड़ा होने लगा। जब वह ग्यारह साल का हुआ, तो उसके माता-पिता ने उसके मामा के साथ उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया। जाते समय माता-पिता ने उसे बहुत सारा धन और सामान दिया और कहा कि रास्ते में जहाँ भी यज्ञ या दान-पुण्य करना हो, करते जाना। यात्रा के दौरान रास्ते में एक शहर में एक राजा की पुत्री का विवाह हो रहा था, लेकिन जिस राजकुमार के साथ विवाह तय हुआ था वह एक आँख से काना था। राजकुमार के पिता ने जब साहूकार के पुत्र की सुंदरता और गुण देखे, तो उनके मन में एक लालच आया और उन्होंने सोचा कि क्यों न इस सुंदर लड़के को दूल्हा बनाकर फेरे डलवा लिए जाएं।

साहूकार के पुत्र को घोड़ी पर बिठाकर विवाह की रस्में पूरी कराई गईं, लेकिन वह सत्य से पर्दा हटाने के लिए अपनी धती पर लिखकर चला गया कि तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है, लेकिन असली राजकुमार कोई और है और मैं काशी पढ़ने जा रहा हूँ। जब राजकुमारी ने वह संदेश पढ़ा, तो उसे सच्चाई का पता चला और उसने राजकुमार के साथ जाने से इनकार कर दिया। उधर, काशी पहुँचकर जब उस लड़के की उम्र बारह वर्ष पूरी हुई, तो उसने एक दिन यज्ञ का आयोजन किया। काल चक्र के अनुसार उसी दिन यमराज उसके प्राण लेने आए, लेकिन उस बालक के माता-पिता द्वारा रखे गए सावन सोमवार के व्रत और भगवान शिव की असीम कृपा के कारण यमराज को खाली हाथ लौटना पड़ा। भोलेनाथ ने न केवल उसकी आयु लंबी कर दी, बल्कि उसे सकुशल उसके माता-पिता के पास वापस भेज दिया।

व्रत पूरा करने के लिए ध्यान रखें ये जरूरी बातें

पौराणिक कथा के अनुसार, जो भी भक्त सावन सोमवार के दिन सच्चे मन से इस कथा का पाठ करता है या सुनता है, उसके जीवन से सभी प्रकार के अकाल मृत्यु के भय, दरिद्रता और संकट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। व्रत के समापन पर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करने के बाद प्रसाद वितरण अवश्य करना चाहिए। सावन के इस पावन महीने में शिव कृपा पाने के लिए सोमवार के दिन जलाभिषेक के साथ इस कथा को अपने परिवार के साथ जरूर पढ़ना चाहिए।