करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार का ग्रहों से गहरा संबंध

करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार का ग्रहों से गहरा संबंध

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला करवा चौथ का पावन व्रत सनातन परंपरा में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखकर माता करवा, भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की पूजा-अर्चना करती हैं। करवा चौथ की पूजा में 'सोलह श्रृंगार' का विशेष महत्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सोलह श्रृंगार केवल खूबसूरती बढ़ाने या धार्मिक परंपरा निभाने का जरिया मात्र नहीं है, बल्कि इसका सीधा और गहरा संबंध नवग्रहों की चाल और ज्योतिष शास्त्र से जुड़ा हुआ है? सिर के सिंदूर से लेकर पैरों की बिछिया तक, सुहाग की हर एक सामग्री किसी न किसी विशेष ग्रह को नियंत्रित और मजबूत करती है। ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार, जब एक सुहागिन स्त्री नियमपूर्वक सोलह श्रृंगार करके करवा चौथ की पूजा में बैठती है, तो उसके जीवन से ग्रहों के अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते हैं और दांपत्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।

मस्तक का सिंदूर और बिंदी: सूर्य और मंगल ग्रह का प्रतीक, जो लाता है रिश्ते में तेज और अटूट विश्वास

सुहाग का सबसे पहला और मुख्य प्रतीक माना जाने वाला सिंदूर और माथे पर सजने वाली बिंदी का संबंध नवग्रहों के राजा 'सूर्य' और ऊर्जा के कारक 'मंगल' ग्रह से होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से माथे का मध्य भाग जहाँ महिलाएं सिंदूर लगाती हैं, उसे आज्ञा चक्र माना गया है। लाल सिंदूर मंगल ग्रह की ऊर्जा का संचार करता है, जिससे महिला के जीवन में साहस, निडरता और पति के प्रति अगाध प्रेम बना रहता है। वहीं, माथे पर लगाई जाने वाली लाल बिंदी सूर्य ग्रह को मजबूत करती है, जिससे चेहरे पर तेज आता है और समाज में मान-सम्मान की वृद्धि होती है। करवा चौथ के दिन मांग भरकर सिंदूर लगाने से पति के जीवन की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और मंगल ग्रह के शुभ प्रभाव से वैवाहिक जीवन में आने वाली हर अनहोनी और अड़चन टल जाती है।

हाथों की चूड़ियां और मेहंदी: बुध और चंद्रमा का अलौकिक संगम, जो बढ़ाता है दांपत्य जीवन में मिठास और मानसिक शांति

करवा चौथ पर हाथों में रची हरी-लाल मेहंदी और खनकती चूड़ियां न केवल सुहाग की रौनक बढ़ाती हैं, बल्कि ग्रहों के राजा बुध और मन के कारक चंद्रमा को शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हाथों में पहनी जाने वाली हरी चूड़ियां और मेहंदी का हरा रंग सीधे तौर पर बुध ग्रह से जुड़ा होता है, जो बुद्धि, वाणी और आपसी संवाद का प्रतीक है। जब सुहागिन के जीवन में बुध मजबूत होता है, तो पति-पत्नी के बीच बातचीत में मिठास आती है और गलतफहमियां दूर होती हैं। इसके साथ ही, कांच की चूड़ियों की खनक और उनका लाल व सफेद रंग चंद्रमा और शुक्र ग्रह को बल प्रदान करता है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है, मन शांत रहता है और दांपत्य रिश्ते में प्रगाढ़ता आती है।

पायल और बिछिया: शुक्र और शनि का संतुलन, जिससे घर में आती है स्थायी सुख-समृद्धि और धन-धान्य

पैरों में पहनी जाने वाली चांदी की पायल और अंगूठे के पास की उंगलियों में सजने वाली बिछिया का संबंध 'शुक्र' और 'शनि' ग्रह से होता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में चांदी को चंद्रमा और शुक्र का प्रतीक माना गया है, जो धन, ऐश्वर्य, भौतिक सुख और विलासिता का कारक ग्रह है। पैरों में चांदी की बिछिया पहनने से गर्भाशय और रक्त संचार संतुलित रहता है, जिससे महिला का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है और शुक्र ग्रह के प्रभाव से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। वहीं, पायल की घुंघरू की आवाज से घर के नकारात्मक प्रभाव नष्ट होते हैं और शनि ग्रह की प्रतिकूल दशा शांत होती है। करवा चौथ के दिन पैरों में बिछिया और पायल पहनकर पूजा करने से घर में देवी लक्ष्मी का स्थाई वास होता है और पति के व्यवसाय व नौकरी में दिन दूनी रात चौगुणी उन्नति होती है।

नथ, कानों के झुमके और मंगलसूत्र: गुरु और शुक्र ग्रह की कृपा से सजता है अखंड सौभाग्य का संसार

चेहरे का श्रृंगार पूरा करने वाली सोने की नथ, कानों के कुंडल और गले में पहना जाने वाला पवित्र मंगलसूत्र देवगुरु 'बृहस्पति' (गुरु) और आकर्षण के देवता 'शुक्र' से संबंधित होते हैं। सोना धातु गुरु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है, जो ज्ञान, सौभाग्य, संतान सुख और सुखी गृहस्थी का कारक है। गले में काले मोतियों और सोने से पिरोया गया मंगलसूत्र महिला को बुरी नजरों से बचाता है और गुरु ग्रह की कृपा से उसके सुहाग की रक्षा करता है। इसी तरह नाक में पहनी जाने वाली सोने की नथ और कानों के झुमके शुक्र ग्रह को बल प्रदान करते हैं, जिससे पति-पत्नी के बीच आकर्षण, प्रेम और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का भाव हमेशा बना रहता है। इस प्रकार करवा चौथ का हर एक श्रृंगार नवग्रहों को अनुकूल बनाकर सुहागिन स्त्री के जीवन को सुखमय और दीर्घायु बनाता है।