साप्ताहिक पंचांग: इसी सप्ताह है साल की सबसे बड़ी निर्जला एकादशी, वट पूर्णिमा और चंपक द्वादशी
काशी (पंचांग डेस्क): हिंदू सनातन धर्म में ज्येष्ठ महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। व्रत, त्योहार और पुण्य दान के लिहाज से जून 2026 का यह सप्ताह बेहद पवित्र और खास होने जा रहा है। इस हफ्ते गंगा स्नान (गंगा दशहरा), साल की सबसे कठिन मानी जाने वाली निर्जला एकादशी, चंपक द्वादशी, शनि प्रदोष व्रत और वट सावित्री व्रत (पूर्णिमा पक्ष) जैसे कई बड़े त्योहार एक के बाद एक आने वाले हैं।
इस भीषण गर्मी के महीने में प्यासे लोगों को मीठा शर्बत पिलाने (छबील लगाने) और जल दान करने की परंपरा भी इसी सप्ताह निभाई जाएगी। आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य और पंचांग गणना के अनुसार इस सप्ताह की सभी महत्वपूर्ण तिथियों और उनके धार्मिक महत्व के बारे में।
इस सप्ताह के मुख्य व्रत और त्योहारों की सटीक लिस्ट
23 जून 2026 (मंगलवार): महेश नवमी
द्वितीय (शुद्ध) ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि आज शाम 04 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। आज महेश नवमी का पावन पर्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यह दिन माहेश्वरी समाज के उत्पत्ति दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
24 जून 2026 (बुधवार): श्री गंगा स्नान व गंगा दशहरा
द्वितीय (शुद्ध) ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि शाम 06 बजकर 13 मिनट तक है, इसके बाद एकादशी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन पवित्र नदियों में गंगा स्नान का महापुण्य मिलता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा दशहरा भी कहते हैं। इस दिन शीतल जल, मटका, और मौसमी फलों का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
25 जून 2026 (गुरुवार): निर्जला एकादशी व्रत (भीमसेनी एकादशी)
द्वितीय (शुद्ध) ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि रात्रि 08 बजकर 10 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद द्वादशी तिथि लगेगी। हिंदू धर्म में इसे साल की सबसे बड़ी और फलदायी एकादशी माना गया है। मान्यता है कि यदि आप साल भर की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो केवल निर्जला एकादशी का बिना अन्न-जल ग्रहण किए व्रत रखने से सभी एकादशियों का पुण्य फल एक साथ मिल जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
26 जून 2026 (शुक्रवार): चंपक द्वादशी व एकादशी व्रत पारण
द्वितीय (शुद्ध) ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि रात्रि 10 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। पिछले दिन निर्जला एकादशी रखने वाले श्रद्धालु आज सुबह शुभ मुहूर्त में अपने व्रत का पारण करेंगे। आज के दिन ही चंपक द्वादशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और भगवान श्री कृष्ण को चंपा के सुगन्धित फूल अर्पित किए जाते हैं। इस दिन विशेष रूप से त्रिविक्रम भगवान की पूजा का विधान है।
27 जून 2026 (शनिवार): शनि प्रदोष व्रत और वट सावित्री व्रतारंभ
द्वितीय (शुद्ध) ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि रात्रि 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने से बेहद शुभ 'शनि प्रदोष व्रत' का संयोग बन रहा है। इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ शनि देव की पूजा करने से शनि जनित कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसी दिन से तीन दिवसीय वट सावित्री व्रत का आरंभ भी हो रहा है। ध्यान दें कि आज रात्रि 10 बजकर 11 मिनट से गंडमूल नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
28 जून 2026 (रविवार): ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी व्रत
द्वितीय (शुद्ध) ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी तिथि रात्रि 03 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। आज के दिन पूर्णिमा का उपवास रखने वाले लोग अपनी तैयारी करते हैं। पंचांग के अनुसार देर रात 03 बजकर 07 मिनट से भद्रा का साया भी शुरू हो जाएगा।
29 जून 2026 (सोमवार): वट सावित्री व्रत (पूर्णिमा), कबीर जयंती
द्वितीय (शुद्ध) ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि अगले दिन सूर्योदय से पूर्व यानी सुबह 05 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इस दिन शुद्ध ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जाएगी। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस दिन वट सावित्री व्रत (पूर्णिमा पक्ष) रखकर बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करेंगी। इसके साथ ही आज सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन किया जाएगा। आज महान समाज सुधारक संत कबीर दास जी की 628वीं जयंती भी है।