BCCI RTI Case: क्या बीसीसीआई 'टीम इंडिया' नहीं बल्कि एक प्राइवेट संस्था है? CIC ने पलटा अपना ही 8 साल पुराना फैसला, RTI के दायरे से बाहर हुआ बोर्ड

BCCI RTI Case: क्या बीसीसीआई 'टीम इंडिया' नहीं बल्कि एक प्राइवेट संस्था है? CIC ने पलटा अपना ही 8 साल पुराना फैसला, RTI के दायरे से बाहर हुआ बोर्ड

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई (BCCI) को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक ऐसा ऐतिहासिक और चौंकाने वाला फैसला सुनाया है, जिसने देश के खेल और कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार को एक बड़ा यू-टर्न लेते हुए सीआईसी ने साफ कर दिया है कि दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई, सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत कोई "सार्वजनिक प्राधिकरण" (Public Authority) नहीं है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अब कोई भी आम नागरिक आरटीआई दाखिल करके बीसीसीआई से उसके आंतरिक कामकाज, फैसलों या खिलाड़ियों के चयन को लेकर जवाब नहीं मांग सकता है। आयोग ने अपने ताजा आदेश में यह स्पष्ट किया है कि बीसीसीआई न तो सरकार के स्वामित्व में आता है, न ही सरकार इसे नियंत्रित करती है और न ही इसे सरकारी खजाने से कोई फंडिंग या वित्तीय मदद मिलती है।

सुश्री गीता रानी की याचिका पर आया आयोग का यह बड़ा फैसला

यह पूरा मामला तब गरमाया जब सुश्री गीता रानी नाम की एक अपीलकर्ता ने आरटीआई के जरिए खेल मंत्रालय से कुछ तीखे सवाल पूछे थे। उन्होंने उन नियमों, प्रावधानों और दिशानिर्देशों का विवरण मांगा था जिसके तहत बीसीसीआई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करता है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए खिलाड़ियों का चयन करता है। उन्होंने यह भी पूछा था कि भारत सरकार ने बीसीसीआई को यह अधिकार किस कानून के तहत दिया है। इस पर युवा मामले और खेल मंत्रालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) ने बहुत पहले यानी दिसंबर 2017 में ही साफ कर दिया था कि यह जानकारी मंत्रालय के पास नहीं है। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि वे इस आरटीआई को बीसीसीआई को ट्रांसफर नहीं कर सकते क्योंकि बोर्ड आरटीआई एक्ट, 2005 के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' की श्रेणी में आता ही नहीं है। अब सीआईसी ने भी मंत्रालय के इसी रुख पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

तो क्या तमिलनाडु सोसाइटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड एक प्राइवेट बॉडी है बीसीसीआई?

सीआईसी ने अपने आदेश में बीसीसीआई के कानूनी दर्जे को पूरी तरह स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा कि बीसीसीआई वास्तव में 'तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम' के तहत पंजीकृत एक निजी और स्वायत्त संगठन (Private Autonomous Organization) है। इसका गठन भारत के संविधान, संसद के किसी अधिनियम, राज्य विधानमंडल या सरकार की किसी विशेष अधिसूचना के माध्यम से नहीं किया गया था। चूंकि इसकी मूल संरचना एक प्राइवेट सोसाइटी की है, इसलिए इसे सरकारी संस्थाओं की तरह जनता के प्रति सूचनाएं साझा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। सूचना आयुक्त ने अपने फैसले में तकनीकी रूप से स्पष्ट किया कि बीसीसीआई सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 2(H) के अंतर्गत परिभाषित "सार्वजनिक प्राधिकरण" की शर्तों को पूरा नहीं करता है।

साल 2018 में सीआईसी ने खुद ही बीसीसीआई को बताया था 'सरकारी'

दिलचस्प बात यह है कि इस नए फैसले के साथ सीआईसी ने अपने ही एक पुराने और बेहद चर्चित फैसले को पूरी तरह पलट दिया है। साल 2018 में केंद्रीय सूचना आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि बीसीसीआई को हर हाल में आरटीआई के दायरे में लाया जाना चाहिए। उस समय आयोग ने तर्क दिया था कि बीसीसीआई द्वारा चुनी गई टीम जब मैदान पर उतरती है, तो वह भारत का प्रतिनिधित्व करती है और खिलाड़ी देश का नाम व तिरंगा लगी जर्सी पहनते हैं। तब यह सवाल भी उठा था कि क्या यह 'टीम इंडिया' है या 'टीम बीसीसीआई'। उस वक्त सीआईसी का मानना था कि बोर्ड को सरकार से अप्रत्यक्ष रूप से कई तरह के समर्थन मिलते हैं और वह देश की बड़ी संपत्तियों का प्रबंधन करता है, इसलिए उसकी जवाबदेही जनता के प्रति होनी चाहिए।

मद्रास हाई कोर्ट के दखल के बाद बदला पूरा समीकरण

सीआईसी के 2018 के इस आदेश के खिलाफ बीसीसीआई ने कड़ा रुख अपनाया था। खुद को एक स्वतंत्र और निजी संस्था बताते हुए बीसीसीआई ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे अदालत में चुनौती दी। पिछले साल इस मामले में एक नया मोड़ आया जब मद्रास उच्च न्यायालय ने इस पूरे विवाद को वापस सीआईसी के पास भेज दिया। हाई कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया था कि वह देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के पुराने फैसलों और कानूनी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर दोबारा गंभीरता से विचार करे। अदालत के इसी निर्देश के बाद गहन समीक्षा की गई और अब सीआईसी ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के आलोक में बीसीसीआई के पक्ष में यह अंतिम फैसला सुनाते हुए उसे आरटीआई के बंधनों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।

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