जगह सिर्फ 2 और दावेदार हो गए 3, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन और ईशान किशन के बीच मची महा-टूटन
भारतीय क्रिकेट टीम के चयन और आगामी मुकाबलों की प्लेइंग इलेवन को लेकर इस समय ड्रेसिंग रूम से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक एक बेहद रोमांचक और पेचीदा माथापच्ची शुरू हो गई है, जिसने क्रिकेट पंडितों की नींद उड़ा रखी है। समीकरण बेहद दिलचस्प और उलझे हुए हैं क्योंकि टीम में ओपनिंग या विकेटकीपिंग और आक्रामक बल्लेबाजी के लिए उपलब्ध जगहें केवल दो ही खाली हैं, लेकिन उनके सामने ताल ठोककर खड़े दावेदार तीन-तीन दिग्गज खिलाड़ी बन चुके हैं। इस कड़ी रेस में एक तरफ जहां अपनी आक्रामक और रिकॉर्डतोड़ पारियों से रातों-रात सनसनी फैलाने वाले युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी पूरी ताकत से अपनी जगह पक्की करने में जुटे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ अनुभवी और शानदार फॉर्म में चल रहे विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन भी मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इन दोनों के बीच चल रही इस कड़ी टक्कर में नया और अप्रत्याशित पेंच तब फंस गया जब विस्फोटक बल्लेबाज ईशान किशन की हालिया चोट और फिटनेस संबंधी समस्याओं ने चयनकर्ताओं के सामने एक बड़ा असमंजस पैदा कर दिया। जब सीमित स्थानों के लिए इतने धाकड़ और शानदार फॉर्म वाले खिलाड़ी आमने-सामने आ जाएं, तो कप्तान और कोच के लिए सही संयोजन चुनना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं रह जाता है। इस त्रिकोणीय संघर्ष ने भारतीय क्रिकेट के भीतर प्रतिस्पर्धा को एक बिल्कुल नए स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां हर एक खिलाड़ी अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए मैदान पर अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है और फैंस की सांसें भी इस बात को लेकर थमी हुई हैं कि आखिर गाज किस पर गिरेगी और बाजी कौन मारेगा।
वैभव सूर्यवंशी की तूफानी फॉर्म और कम उम्र में पेश की गई वह मजबूत दावेदारी जिसने दिग्गजों को चौंकाया
भारतीय घरेलू और युवा क्रिकेट सर्किट में पिछले कुछ समय से जिस एक नाम ने सबसे ज्यादा तहलका मचाया है, वह और कोई नहीं बल्कि अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए मशहूर वैभव सूर्यवंशी हैं। अपनी कम उम्र के बावजूद गेंदबाजों के दिलों में खौफ पैदा करने वाले इस युवा खिलाड़ी ने जिस अंदाज में बड़े गेंदबाजों की धुनाई की है और अपनी तकनीक से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया है, उससे यह साफ हो गया है कि वे भविष्य के बहुत बड़े स्टार हैं। जब टीम इंडिया की अंतिम एकादश या स्क्वॉड में चयन की बात आती है, तो वैभव की यह निडर मानसिकता और पावर-हिटिंग क्षमता उन्हें अन्य दावेदारों से काफी आगे लाकर खड़ा कर देती है, क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में तेज शुरुआत देना किसी भी टीम की पहली प्राथमिकता होती है। लेकिन क्या इतनी कम उम्र और कम अंतरराष्ट्रीय अनुभव के साथ उन्हें सीधे तौर पर मुख्य प्लेइंग इलेवन में उतारना एक बड़ा जोखिम होगा या फिर उनका यही अदम्य साहस टीम के लिए गेमचेंजर साबित होगा, इसी को लेकर प्रबंधन के भीतर लगातार गहन मंथन जारी है। वैभव जिस प्रकार हर मैच में अपने बल्ले से रन बरसा रहे हैं, उसने संजू सैमसन और ईशान किशन जैसे स्थापित खिलाड़ियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि यह युवा खिलाड़ी किसी भी वक्त उनकी जगह पर सेंध लगा सकता है।
संजू सैमसन की परिपक्वता और लगातार शानदार प्रदर्शन, क्या इस बार भी अनुभव के बल पर मिलेगी तरजीह?
दूसरी तरफ, केरल से आने वाले और अपनी कलात्मक तथा स्टाइलिश बल्लेबाजी के लिए दुनियाभर में पहचाने जाने वाले संजू सैमसन इस समय अपने करियर के सबसे बेहतरीन और परिपक्व दौर से गुजर रहे हैं। जब भी टीम को मध्यक्रम में स्थिरता या विकेट के पीछे एक भरोसेमंद विकल्प की जरूरत पड़ी है, संजू ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है और कई मौकों पर हारी हुई बाजी को अपनी टीम के पक्ष में मोड़ा है। अनुभव के मामले में संजू सैमसन, वैभव सूर्यवंशी से काफी आगे हैं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव को झेलने की उनकी कला उन्हें टीम प्रबंधन की पहली पसंद के रूप में देखने के लिए मजबूर करती है। हालांकि, कई बार ऐसा भी देखा गया है कि शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें प्लेइंग इलेवन में लगातार मौके नहीं मिल पाते हैं, जिससे उनके फैंस के बीच भी निराशा देखने को मिलती है। इस बार जब जगह केवल दो ही बची हैं और दावेदारों की फेरहरिस्त लंबी है, तो संजू अपनी तकनीक, अनुभव और हालिया रनों के आधार पर यह साबित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि टीम को स्थिरता देने के लिए उनका मैदान पर होना कितना अनिवार्य है।
ईशान किशन की चोट ने फंसाया सबसे बड़ा पेंच, क्या फिटनेस टेस्ट पास करके वापसी कर पाएंगे यह विस्फोटक बाएं हाथ के बल्लेबाज?
इस पूरी त्रिकोणीय जंग को और अधिक पेचीदा और रोमांचक बनाने का काम किया है विस्फोटक विकेटकीपर-بلेबाज (बल्लेबाज) ईशान किशन की अचानक लगी चोट और अनिश्चितता ने। अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी और पारी की शुरुआत में ही विपक्षी गेंदबाजों के परखच्चे उड़ाने की कला के लिए विख्यात ईशान किशन लंबे समय से टीम के अहम सदस्य रहे हैं, लेकिन फिटनेस समस्याओं और चोट के चलते उनका चयन असमंजस के घेरे में आ गया है। जब कोई खिलाड़ी चोट के कारण टीम से बाहर होता है और उसकी गैरमौजूदगी में युवा या अन्य खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर देते हैं, तो फिट होकर वापस लौटने पर अपनी खोई हुई जगह दोबारा हासिल करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता है। चयनकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द यह है कि यदि ईशान किशन पूरी तरह फिट होकर उपलब्ध नहीं होते हैं, तो समीकरण अपने आप साफ हो जाएंगे, लेकिन अगर वे समय पर फिट घोषित कर दिए जाते हैं, तो फिर वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन में से किसी एक को बाहर बैठाने का कड़ा फैसला लेना होगा। इस अनिश्चितता ने इस पूरे चयन प्रक्रिया को एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की तरह बना दिया है, जहां हर दिन आने वाली नई मेडिकल रिपोर्ट्स और प्रैक्टिस सेशन की खबरें सोशल मीडिया पर सुर्खियों का केंद्र बनी रहती हैं।
कप्तान और चयनकर्ताओं के सामने खड़ी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा, कौन बनाएगा अंतिम एकादश में अपनी पक्की जगह
आगामी महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं और मुकाबलों को ध्यान में रखते हुए टीम के कप्तान और मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति के लिए यह फैसला लेना तलवार की धार पर चलने जैसा साबित होने वाला है। एक तरफ जहां युवा ऊर्जा और आक्रामक भविष्य की सुगबुगाहट है, तो दूसरी तरफ अनुभव और हालिया फॉर्म की अटूट दीवार खड़ी है, और इन सबके बीच चोट के समीकरण ने पूरे गणित को हिलाकर रख दिया है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम एकादश का चयन करते समय केवल व्यक्तिगत फॉर्म को नहीं, बल्कि टीम के बैलेंस, पिच के मिजाज और विरोधी टीम की रणनीति को भी मुख्य आधार बनाया जाएगा। चाहे मैदान पर वैभव सूर्यवंशी उतरें, संजू सैमसन अपनी कला बिखेरें या फिर ईशान किशन अपनी फिटनेस साबित करके वापसी करें, इतना तय है कि जो भी दो खिलाड़ी अंतिम ग्यारह में जगह बनाएंगे, उन पर देश की उम्मीदों का सबसे बड़ा बोझ होगा। फैंस की निगाहें अब पूरी तरह से आधिकारिक घोषणा और प्रैक्टिस मैचों के दौरान इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि इस महा-मुकाबले में किसकी जीत होती है और किसे बाहर बैठना पड़ता है।