विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, एशियाई खेलों के ट्रायल में खेलने का रास्ता साफ, लेकिन कोर्ट ने डोपिंग पर जताई बड़ी चिंता
भारतीय कुश्ती और स्टार पहलवान विनेश फोगाट के फैंस के लिए राजधानी दिल्ली से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फोगाट को आगामी एशियाई खेलों (Asian Games) के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया, जिसने विनेश को राहत दी थी। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए विनेश फोगाट का रास्ता साफ कर दिया है, जिसके बाद अब वह 30 मई से दिल्ली में शुरू हो रहे महामुकाबले के ट्रायल्स में दांव लगाती नजर आएंगी।
उम्मीदों और अपेक्षाओं का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट ने महासंघ की याचिका को नकारा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के तर्कों को दरकिनार करते हुए खिलाड़ी के पक्ष में एक बेहद संवेदनशील और मजबूत टिप्पणी की। पीठ ने महासंघ के वकील से कहा कि आज इस मोड़ पर जब उच्च न्यायालय पहले ही अपना आदेश पारित कर चुका है, तो खिलाड़ी की उम्मीदें और अपेक्षाएं काफी बढ़ गई हैं। ऐसे समय में उन्हें वापस घर भेज देना और यह कहना कि हम कुछ नहीं कर सकते, बिल्कुल भी उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं, विनेश फोगाट ट्रायल में जा सकती हैं और भाग ले सकती हैं। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद डब्ल्यूएफआई के पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
हाई कोर्ट के रुख पर जताई कड़ी आपत्ति, डोपिंग टेस्ट मिस होने को बताया गंभीर
भले ही सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के ट्रायल में उतरने की अनुमति दे दी है, लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के दृष्टिकोण और विनेश के पिछले रिकॉर्ड पर तीखे सवाल भी खड़े किए। न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने विनेश फोगाट के वकील से कहा कि हमारे पास कुछ जरूरी प्रश्न हैं। कोर्ट ने याद दिलाया कि विनेश ने दिसंबर 2024 में ब्रेक लिया था और अगस्त 2025 में वापसी की बात कही थी, लेकिन बाद में जुलाई 2025 में मां बनने के कारण उन्होंने जनवरी 2026 से खेलने की पात्रता की जानकारी दी। इसके बावजूद, जनवरी में वह डोपिंग टेस्ट के लिए उपस्थित नहीं हुईं। कोर्ट ने कहा कि विधायक बनने का उनका जो स्पष्टीकरण था, उसे अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (ITA) ने स्वीकार नहीं किया था, जो कि एक चिंताजनक बात है।
राष्ट्रीय शर्म बनाम फेडरेशन की कथित साजिश, वकीलों के बीच तीखी बहस
अदालत में बहस के दौरान विनेश फोगाट की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने दलील दी कि यह पूरा मामला खिलाड़ी के मातृत्व (Maternity) के अधिकार और उनके करियर से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर देश की इतनी बड़ी ओलंपियन को ट्रायल में भाग लेने से रोका गया, तो यह एक राष्ट्रीय शर्म की बात होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुश्ती महासंघ (WFI) ने विनेश को जानबूझकर बाहर रखने के इरादे से पुरानी परफॉर्मेंस की नीतियों में दुर्भावनापूर्ण तरीके से बदलाव किए थे। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों के बीच यह साफ किया कि डोपिंग टेस्ट मिस होना और लोकेशन की जानकारी न देना दो गंभीर चूक हैं, जिसे हाई कोर्ट ने मातृत्व के चश्मे से देखा है, लेकिन खेल के वैश्विक नियमों को भारत को ध्यान में रखना होगा। बहरहाल, तमाम कानूनी पेचीदगियों के बीच राहत की बात यह है कि विनेश फोगाट अब मैट पर अपना दम दिखाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।