श्मशान घाट पर रोंगटे खड़े करने वाला ड्रामा, चिता पर लेटी महिला के 'जिंदा' होने की अफवाह से मचा हड़कंप
किसी अपने को खोने का दुख बेहद गहरा होता है लेकिन सोचिए उस परिवार पर क्या बीतेगी जब अंतिम संस्कार के वक्त कोई दावा कर दे कि मुर्दा अभी सांस ले रहा है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक परिवार को ठीक इसी तरह के मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। यह पूरी घटना दिखाती है कि कैसे ग्रामीण इलाकों में फैलने वाली अफवाहें और अंधविश्वास विज्ञान पर हावी होने की कोशिश करते हैं।
बीमारी से मौत और श्मशान तक का सफर
यह पूरा वाकया बभनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कोंगा गांव का है। यहां के पूर्व ग्राम प्रधान कृष्णानंद की 40 वर्षीय पत्नी दुर्गावती पिछले एक हफ्ते से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं। उन्हें पीलिया पित्ताशय में सूजन खून पतला होने और शरीर में प्लेटलेट्स गिरने की शिकायत थी।
शुरुआत में उनका इलाज स्थानीय स्तर पर और दुद्धी में कराया गया। जब उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं दिखा तो परिवार उन्हें बेहतर चिकित्सा के लिए मध्य प्रदेश के सागर ले जा रहा था। दुर्भाग्य से इसी सफर के दौरान रास्ते में ही दुर्गावती ने दम तोड़ दिया। शोकाकुल परिवार शव को लेकर गांव वापस आ गया और भारी मन से अंतिम विदाई की तैयारियां शुरू कर दी गईं।
चिता पर हलचल की अफवाह से जागी झूठी उम्मीद
श्मशान घाट पर माहौल तब अचानक नाटकीय हो गया जब मृतका को चिता पर लिटाया जा रहा था। वहां खड़े कुछ ग्रामीणों ने अचानक दावा कर दिया कि दुर्गावती की नब्ज चल रही है और उनके शरीर में हरकत हो रही है। इस चौंकाने वाले दावे ने अपनों को खो चुके परिवार के मन में एक झूठी आस जगा दी। किसी चमत्कार की उम्मीद में परिजनों ने तुरंत दाह संस्कार रोक दिया और वे शव को वापस अपने घर ले आए।
मेडिकल साइंस ने तोड़ा अंधविश्वास का भ्रम
घर लौटने के बाद तसल्ली के लिए परिवार ने दो प्राइवेट और एक सरकारी चिकित्सक को बुलाया। तीनों डॉक्टरों ने बारीकी से जांच करने के बाद स्पष्ट कर दिया कि महिला की मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद परिवार पूरी तरह आश्वस्त नहीं हुआ और एंबुलेंस को बुलाया गया ताकि मृतका को किसी बड़े अस्पताल ले जाया जा सके। मौके पर पहुंचे एंबुलेंस के स्वास्थ्यकर्मियों ने भी जांच के बाद दुर्गावती को मृत घोषित कर दिया और शव को अस्पताल ले जाने से मना कर दिया। मेडिकल साइंस की इस अंतिम पुष्टि के बाद परिवार का भ्रम टूट गया। इसके बाद उन्होंने दोबारा श्मशान घाट जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।