बांदा के गुलाब चंद्र ने बदल दी यूपी की तस्वीर, 54 महीनों में लगा डाले 5000 पौधे

बांदा के गुलाब चंद्र ने बदल दी यूपी की तस्वीर, 54 महीनों में लगा डाले 5000 पौधे

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड जैसे सूखे और बंजर कहे जाने वाले इलाके से पर्यावरण संरक्षण की एक ऐसी अनूठी, प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश के पर्यावरणविदों और आम नागरिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बांदा जिले के एक साधारण से ग्रामीण और प्रकृति प्रेमी गुलाब चंद्र ने अपनी जिजीविषा और पर्यावरण के प्रति अगाध प्रेम के दम पर वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े सरकारी महकमे और संगठन मिलकर भी कई सालों में नहीं कर पाते हैं। गुलाब चंद्र ने पिछले 54 महीनों यानी करीब साढ़े चार साल के अंतराल में अकेले अपने दम पर बांदा की धरती पर 5,000 से अधिक पेड़-पौधे लगाकर उन्हें सींचा है और आज वे पौधे लहलहाते हुए विशाल वृक्षों का रूप लेने लगे हैं। उनकी इस असाधारण और निस्वार्थ मेहनत की गूंज अब प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच चुकी है, जिसके चलते बांदा जिले के जिलाधिकारी (DM) अमित आसेरी ने खुद आगे आकर गुलाब चंद्र के इस महान कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और उन्हें जिले का सच्चा पर्यावरण प्रहरी घोषित किया है। उत्तर प्रदेश की बदलती हुई हरित तस्वीर के बीच बुंदेलखंड की उबड़-खाबड़ और पथरीली जमीन पर हरे-भरे जंगलों की इबारत लिखने वाले गुलाब चंद्र का यह सफर इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि किसी इंसान के भीतर कुछ कर गुजरने का पक्का इरादा हो, तो संसाधनों की कमी कभी भी उसके रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती है।

बुंदेलखंड की तपती धूप और बंजर जमीन पर कैसे शुरू हुआ गुलाब चंद्र का यह अद्भुत वृक्षारोपण का महाअभियान

बुंदेलखंड क्षेत्र की भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियां किसी से छिपी नहीं हैं, जहां गर्मियों के दिनों में भीषण गर्मी और पानी का भारी संकट आम बात है, और ऐसे इलाके में एक भी पौधा जीवित रखना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं होता है। लेकिन बांदा के रहने वाले गुलाब चंद्र ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की तमाम कठिनाइयों और आर्थिक तंगी के बावजूद पर्यावरण को बचाने के इस बीहड़ रास्ते को अपनी जिंदगी का मुख्य मकसद बना लिया था। उन्होंने आज से करीब 54 महीने पहले बिना किसी सरकारी मदद, बड़े फंड या एनजीओ के समर्थन के खुद ही पौधे खरीदने, गड्ढे खोदने और उनमें रोजाना पानी डालने का कठिन काम शुरू किया था। शुरुआत में लोगों को उनकी यह दीवानगी पागलपन जैसी लगती थी, क्योंकि किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि इस बंजर और सूखी जमीन पर कोई शख्स अकेले इतने बड़े पैमाने पर हरियाली ला सकता है। लेकिन गुलाब चंद्र ने कभी किसी की आलोचनाओं पर ध्यान नहीं दिया और अपनी मेहनत को ही अपना हथियार बनाकर सुबह सूरज निकलने से पहले ही पौधों की देखरेख में जुट जाते थे। धीरे-धीरे उनके द्वारा लगाए गए वे छोटे-छोटे पौधे हवा में सांस लेने लगे और आज उनकी बदौलत कई बंजर इलाके एक छोटे-छोटे जंगलों में तब्दील हो चुके हैं, जहां पंछियों की चहचहाहट और ठंडी हवाओं ने उस पूरे क्षेत्र का मिक्‍याज ही पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।

डीएम अमित आसेरी ने की गुलाब चंद्र की पीठ थपथपाते हुए की जमकर तारीफ, प्रशासनिक स्तर पर मिलने लगा पूरा सहयोग

जब एक आम इंसान अपनी मेहनत और लगन से समाज के हित में कोई ऐसा ऐतिहासिक काम करता है, तो प्रशासन भी उसकी अनदेखी नहीं कर सकता है और बांदा के जिलाधिकारी अमित आसेरी ने इसी सकारात्मक सोच का परिचय देते हुए गुलाब चंद्र को सम्मानित किया है। डीएम अमित आसेरी ने जब खुद धरातल पर जाकर गुलाब चंद्र द्वारा लगाए गए उन हजारों पौधों और उनके संरक्षण के तरीकों का मुआयना किया, तो वे उनकी इस निष्ठा को देखकर पूरी तरह अचंभित रह गए। जिलाधिकारी ने न केवल खुले मंच से गुलाब चंद्र के इस कार्य की सराहना की, बल्कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का भी पूरा भरोसा दिया ताकि वे अपने इस अभियान को और अधिक बड़े स्तर पर आगे बढ़ा सकें। डीएम ने बांदा जिले के अन्य युवाओं और नागरिकों से भी यह अपील की कि वे गुलाब चंद्र से प्रेरणा लें और अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ लगाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और बेहतर पर्यावरण मिल सके। प्रशासनिक स्तर पर जब इस प्रकार का संबल और प्रोत्साहन मिलता है, तो न केवल उस व्यक्ति का हौसला कई गुना बढ़ जाता है, बल्कि समाज के दूसरे लोगों के भीतर भी एक नई सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जागृत होती है, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में गुलाब चंद्र जैसे नायक बन रहे हैं देश की असली ताकत

आज के समय में जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जंगलों की अंधाधुंध कटाई जैसी भयंकर समस्याओं से जूझ रही है, तब बांदा के गुलाब चंद्र जैसे साधारण लोग ही इस धरती के असली रक्षक और नायक साबित हो रहे हैं। यह घटना हमें यह सिखाती है कि पर्यावरण को बचाने के लिए केवल बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठकें या नीतियां ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर उठाया गया एक छोटा सा कदम भी पूरी दुनिया की तस्वीर बदलने का माद्दा रखता है। गुलाब चंद्र की यह कहानी अब सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में वायरल हो रही है, और देश के कोने-कोने से लोग उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे वृहद वृक्षारोपण अभियानों के बीच एक आम नागरिक द्वारा व्यक्तिगत प्रयास से 5000 पौधे लगाकर उन्हें बड़ा करना यह बताता है कि जनसहयोग से ही किसी भी बड़े बदलाव को संभव बनाया जा सकता है। आने वाले समय में गुलाब चंद्र का यह कारवां निश्चित रूप से और अधिक बड़ा रूप लेगा, और बांदा की धरती पर उनकी यह हरित क्रांति आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक जीवित मिसाल बनकर हमेशा चमकती रहेगी।