सीएम योगी ने प्रांतीय रक्षक दल (PRD) जवानों को दी दोहरी सौगात, ड्यूटी भत्ता बढ़कर हुआ ₹600 प्रतिदिन और मिला ₹5 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज; 35 हजार जवानों में दौड़ी खुशी की लहर
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, प्रमुख मेलों और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सेवाएं देने वाले प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के जवानों के लिए राज्य सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रांतीय रक्षक दल के जवानों और उनके परिवारों के सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाते हुए दोहरी ऐतिहासिक सौगात दी है।
मुख्यमंत्री ने पीआरडी जवानों के दैनिक ड्यूटी भत्ते (मानदेय) को बढ़ाकर ₹600 प्रतिदिन करने की बहुप्रतीक्षित घोषणा को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही जवानों को कर्तव्य पालन के दौरान अथवा सामान्य जीवन में गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए ₹5 लाख तक के कैशलेस इलाज की मुफ्त सुविधा से आच्छादित करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया गया है। सरकार के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में तैनात 35,000 से अधिक सक्रिय पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों में जबरदस्त उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई है।
ड्यूटी भत्ते में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: अब मिलेंगे ₹600 प्रतिदिन
पीआरडी जवानों द्वारा लंबे समय से अपने दैनिक मानदेय में वृद्धि की मांग की जा रही थी। पूर्व में जवानों को प्रतिदिन ₹395 का ड्यूटी भत्ता मिलता था, जिसे महंगाई के वर्तमान दौर में अपर्याप्त माना जा रहा था। जवानों की इस जायज मांग पर संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने मानदेय में भारी इजाफा करते हुए इसे ₹600 प्रतिदिन निर्धारित कर दिया है।
इस बढ़ोतरी के बाद यदि कोई पीआरडी जवान महीने में 30 दिन की ड्यूटी पूरी करता है, तो उसका मासिक मानदेय लगभग ₹18,000 तक पहुंच जाएगा। यह निर्णय न केवल जवानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाएगा, बल्कि उन्हें पूरी निष्ठा, एकाग्रता और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए आर्थिक मजबूती भी प्रदान करेगा। मानदेय की यह राशि सीधे जवानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी (DBT) प्रणाली के माध्यम से भेजी जाएगी ताकि बिचौलियों या किसी भी स्तर पर देरी की संभावना पूरी तरह समाप्त हो सके।
₹5 लाख तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा: स्वास्थ्य सुरक्षा का बना अभेद्य कवच
दैनिक भत्ते में वृद्धि के साथ-साथ पीआरडी जवानों को जो दूसरी सबसे बड़ी राहत मिली है, वह है स्वास्थ्य सुरक्षा का सुरक्षा कवच। कानून-व्यवस्था की ड्यूटी, चौराहों पर तेज धूप व बारिश में ट्रैफिक नियंत्रण और संवेदनशील आयोजनों में दिन-रात मुस्तैद रहने वाले जवानों को अक्सर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था। गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में निजी अस्पतालों के महंगे खर्च के चलते जवानों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति चरमरा जाती थी।
शासन के ताजा फैसले के अनुसार, अब सभी सक्रिय पीआरडी जवानों को 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना' अथवा 'आयुष्मान भारत योजना' के मानकों के अनुरूप ₹5 लाख तक का सालाना कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक जवान और उसके परिवार को डिजिटल हेल्थ कार्ड (Golden Card) जारी किए जाएंगे, जिसके माध्यम से वे प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और नामांकित बड़े निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में बिना कोई पैसा दिए मुफ्त में उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे।
अस्पताल में भर्ती और दुर्घटना के समय मिलेगा पूरा कवर
कैशलेस चिकित्सा योजना के दायरे में सामान्य बीमारियों से लेकर हृदय रोग, कैंसर, गुर्दा रोग, न्यूरोलॉजी और आकस्मिक सड़क दुर्घटनाओं के जटिल ऑपरेशन तक के खर्च शामिल होंगे। यदि ड्यूटी के दौरान अथवा अवकाश के समय कोई जवान किसी दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसे त्वरित उपचार के लिए किसी अग्रिम धनराशि की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी अंचलों से आने वाले जवानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनके पास अब तक कोई औपचारिक स्वास्थ्य बीमा कवर मौजूद नहीं था।
कानून-व्यवस्था और महाकुंभ ड्यूटी का मिला बड़ा इनाम
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान राज्य में शांति, सुरक्षा और सुशासन स्थापित करने में पीआरडी जवानों के योगदान की खुले दिल से सराहना की। चाहे वह अयोध्या का दीपोत्सव हो, काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा के प्रमुख पर्व हों, सावन के दौरान लाखों शिवभक्तों की कांवड़ यात्रा की सुरक्षा हो या फिर प्रयागराज में आयोजित होने वाला भव्य महाकुंभ—पीआरडी जवानों ने हमेशा अनुकरणीय अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है।
इसके अलावा, प्रदेश के प्रमुख महानगरों जैसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, प्रयागराज, मेरठ और गोरखपुर में चौराहों पर ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और थानों में पुलिस के सहयोगी बल के रूप में पीआरडी के जवान लगातार दिन-रात मुस्तैद रहते हैं। सरकार का मानना है कि जो बल समाज और राज्य की सुरक्षा में अपनी जवानी समर्पित कर रहा है, उसकी सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाना शासन का सर्वोच्च नैतिक दायित्व है।
ड्यूटी के दिनों में विस्तार और रोटेशन व्यवस्था में सुधार
मानदेय और चिकित्सा सुविधा के अतिरिक्त युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने पीआरडी जवानों के कार्य दिवसों (Duty Days) को बढ़ाने और उनमें पारदर्शिता लाने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं। अब तक कई जनपदों में जवानों को साल में केवल 6 से 8 महीने ही ड्यूटी मिल पाती थी, जिससे बाकी महीनों में उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता था।
विभाग अब ऐसी केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली (PRD Portal) विकसित कर रहा है जिसके जरिए सभी पंजीकृत और फिट जवानों को वर्ष में न्यूनतम 300 से 365 दिन की निरंतर ड्यूटी उपलब्ध कराई जा सके। पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, आबकारी विभाग, खनन विभाग, धार्मिक न्यास और पर्यटन स्थलों पर पीआरडी जवानों की तैनाती का कोटा बढ़ाया जा रहा है, ताकि जवानों को साल भर नियमित रोजगार और निश्चित आय प्राप्त होती रहे।
वर्दी भत्ता और आधुनिक उपकरणों से लैस होंगे जवान
पीआरडी जवानों के बुनियादी ढांचे और कार्यकुशलता को आधुनिक बनाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रियाधीन हैं। जवानों को अपनी वर्दी, जूते और सुरक्षा किट के लिए नियमित अंतराल पर पर्याप्त वर्दी भत्ता (Uniform Allowance) देने का प्रावधान किया जा रहा है। इसके साथ ही, ट्रैफिक और रात्रि गश्त में तैनात रहने वाले जवानों को फ्लोरोसेंट रिफ्लेक्टिव जैकेट, आधुनिक टॉर्च, वॉकी-टॉकी और उच्च गुणवत्ता वाले विसिल्स व बैटन उपलब्ध कराए जाएंगे।
जवानों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए मंडल स्तर पर स्थित पीआरडी प्रशिक्षण केंद्रों में आधुनिक रिफ्रेशर कोर्स और आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा, ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता (First Responder) के रूप में कार्य कर सकें।
मृत्यु और दिव्यांगता पर अनुग्रह राशि की प्रक्रिया होगी सरल
ड्यूटी के दौरान किसी जवान की असामयिक मृत्यु अथवा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में उसके आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह सहायता राशि (Ex-Gratia) के भुगतान के नियमों को भी अत्यधिक सरल और समयबद्ध किया जा रहा है। अब जिला स्तर पर जिलाधिकारी और जिला युवा कल्याण अधिकारी की समिति द्वारा फाइलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा, जिससे पीड़ित परिजनों को बिना किसी चक्कर काटे कुछ ही दिनों के भीतर सरकारी सहायता और परिवार के एक पात्र सदस्य को पीआरडी में मानदेय आधारित नियुक्ति मिल सकेगी।
विभाग ने शुरू की औपचारिक शासनादेश जारी करने की तैयारी
मुख्यमंत्री के इन ऐतिहासिक निर्देशों के बाद युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल महानिदेशालय और वित्त विभाग ने शासनादेश (Government Order) का आधिकारिक प्रारूप तैयार करने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। वित्त विभाग द्वारा आवश्यक बजटीय आवंटन की प्रक्रिया पूरी होते ही इसी वित्तीय वर्ष से बढ़ा हुआ ₹600 का दैनिक मानदेय जवानों के बैंक खातों में स्थानांतरित होना शुरू हो जाएगा। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जवानों और उनके परिजनों का डाटा संकलित कर कैशलेस आयुष्मान/गोल्डन कार्ड जारी करने के लिए विशेष जिला स्तरीय शिविर लगाए जाएंगे।
जवानों और उनके परिजनों में भारी उत्साह, मुख्यमंत्री का जताया आभार
सरकार के इस दोहरे फैसले की जानकारी मिलते ही पूरे प्रदेश में पीआरडी एसोसिएशन और जवानों ने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। जवानों का कहना है कि मानदेय ₹600 प्रतिदिन होने और 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने से उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो गया है। वर्षों से लंबित इन मांगों को पूरा करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह साबित कर दिया है कि उनकी सरकार अंतिम पायदान पर खड़े सुरक्षाकर्मी के कल्याण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।