CM Yogi Strict Action: 'रास्ता नहीं दिला सकते तो लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार सबको सस्पेंड करो', जनता दर्शन में पीड़ित महिला की गुहार पर भड़के सीएम योगी; अफसरों को दिए सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता की समस्याओं, विशेषकर भूमि विवाद और कमजोर तबकों पर दबंगई के मामलों में हीलाहवाली बरतने वाले राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक बार फिर बेहद आक्रामक और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। गोरखपुर प्रवास के दौरान गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित 'जनता दर्शन' में एक पीड़ित महिला की व्यथा सुनकर मुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया।
महिला ने जब रोते हुए मुख्यमंत्री को बताया कि स्थानीय दबंगों ने उसका रास्ता बंद कर दिया है और शिकायत करने पर धमकी दे रहे हैं, तो मुख्यमंत्री ने पास में खड़े वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि यदि स्थानीय लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार किसी पीड़ित को उसका न्यायसंगत रास्ता दिलाने में असमर्थ हैं, तो उन सभी को फौरन सस्पेंड कर दिया जाए। सीएम के इस कड़े आदेश के बाद जिले के राजस्व महकमे और लापरवाह अफसरों में हड़कंप मच गया है।
गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन: महिला की आपबीती सुन तल्ख हुए सीएम योगी
गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री करीब 200 फरियादियों के बीच स्वयं पहुंचे। उन्होंने एक-एक कर सभी लोगों की कुर्सियों के पास जाकर उनके प्रार्थना पत्र अपने हाथों में लिए और उनकी समस्याएं सुनीं। इसी दौरान एक महिला अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री के सामने पहुंची।
महिला ने नम आंखों से अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसके घर और खेत के मुख्य निकास मार्ग पर गांव के दबंगों ने जबरन कब्जा कर लिया है। जब उसने स्थानीय तहसील प्रशासन, लेखपाल और थाने में शिकायत की, तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे दबंग उसे यह कहकर धमका रहे हैं कि 'तुम्हें जहां जाना है, जिसके पास शिकायत करनी है कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता'।
'दबंगों की दादागीरी और अफसरों की लाचारी बर्दाश्त नहीं'
महिला की पीड़ा और दबंगों के इस अहंकार भरे रवैये को सुनते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद नाराज हो गए। उन्होंने मौके पर मौजूद जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और राजस्व अधिकारियों को तलब किया और स्पष्ट लहजे में कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज है, किसी भी दबंग या भू-माफिया को गरीबों का हक छीनने की छूट नहीं दी जा सकती।
मुख्यमंत्री ने तल्खी भरे स्वर में कहा कि जनता की शिकायतों को लेकर अगर मातहत स्तर के अधिकारी अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं, तो यह सीधे तौर पर उनकी अक्षमता और मिलीभगत को दर्शाता है। सीएम ने दो टूक निर्देश दिया कि महिला को तत्काल उसका रास्ता मुहैया कराया जाए और यदि कब्जा करने वाले दबंग कानून हाथ में लेने का प्रयास करें, तो उन पर ऐसी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए जो नजीर बने।
'लाचार हैं तो तत्काल निलंबित करो': राजस्व अफसरों को सीएम का कड़ा अल्टीमेटम
मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों में होने वाली अनावश्यक देरी पर बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि तहसील स्तर पर तैनात लेखपाल, राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) और तहसीलदार यदि आम जनता को न्याय दिलाने और सार्वजनिक रास्तों से अवैध कब्जे हटवाने में खुद को 'लाचार' और 'असमर्थ' महसूस करते हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक या प्रशासनिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस मामले में तत्काल जांच बैठाई जाए। यदि लेखपाल से लेकर तहसीलदार स्तर तक किसी भी कर्मचारी की लापरवाही, हीलाहवाली या दबंगों के साथ मिलीभगत पाई जाती है, तो उन्हें बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।
कागजी खानापूरी नहीं चलेगी, मौके पर जाकर हल करें जमीनी विवाद
जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि सरकारी दफ्तरों में केवल कागजी रिपोर्ट तैयार कर शिकायतों का निस्तारण (Disposal) दिखाने की प्रवृत्ति अब कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को एयर कंडीशनर कमरों से निकलकर खुद विवादित स्थल पर भौतिक रूप से जाना होगा और दोनों पक्षों के अभिलेखों की पड़ताल कर मौके पर ही दूध का दूध और पानी का पानी करना होगा।
सीएम ने कहा कि थाना दिवस और तहसील समाधान दिवस का वास्तविक उद्देश्य यही है कि जमीनी विवादों का स्थानीय स्तर पर त्वरित और स्थाई समाधान हो, ताकि फरियादियों को कलेक्ट्रेट या मुख्यमंत्री के जनता दर्शन तक न दौड़ना पड़े। यदि समाधान दिवसों के बावजूद इस प्रकार की बुनियादी शिकायतें आ रही हैं, तो यह सीधे तौर पर नोडल अफसरों की विफलता है।
जनता दर्शन में 200 फरियादियों की सुनीं समस्याएं, पीड़ितों को बंधाया ढांढस
मंगलवार की सुबह आयोजित इस जनता दर्शन कार्यक्रम में गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, मऊ और आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के कई जिलों से लगभग 200 लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इनमें जमीन विवाद, आपसी रंजिश, पुलिस उत्पीड़न, आवास, पेंशन और गंभीर बीमारियों के उपचार से जुड़ी प्रार्थनाएं शामिल थीं।
मुख्यमंत्री ने सभी फरियादियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी को भी निराश या परेशान होने की जरूरत नहीं है। शासन हर जरूरतमंद, गरीब और पीड़ित नागरिक के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है और प्रत्येक न्यायसंगत समस्या का गुणवत्तापूर्ण समाधान शत-प्रतिशत सुनिश्चित कराया जाएगा।
आयुष्मान कार्ड और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मिलेगी गंभीर मरीजों को संजीवनी
जनता दर्शन में एक बड़ा वर्ग ऐसे गरीब परिवारों का भी था जो अपने परिजनों के कैंसर, किडनी, हार्ट और न्यूरो जैसी गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाने आए थे। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी मरीजों के मेडिकल एस्टीमेट और कागजात लिए।
उन्होंने मौके पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिया कि सभी पात्र और जरूरतमंद व्यक्तियों के 'आयुष्मान भारत कार्ड' प्राथमिकता के आधार पर बनवाए जाएं। सीएम ने स्पष्ट किया कि इलाज के अभाव में किसी भी नागरिक की जान नहीं जानी चाहिए। जिन मामलों में इलाज का खर्च आयुष्मान योजना की पांच लाख की सीमा से अधिक होगा, वहां अस्पताल से विधिवत इस्टीमेट मंगवाकर 'मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष' (CM Relief Fund) से सीधे संबंधित अस्पतालों को तत्काल आर्थिक सहायता जारी की जाएगी।
बच्चों को दी चॉकलेट, दुलार कर पढ़ाई के लिए किया प्रेरित
जनता दर्शन की अपनी चिर-परिचित संवेदनशील शैली को बरकरार रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी माताओं के साथ आए नन्हे-मुन्ने बच्चों को भी खूब स्नेह और दुलार दिया। उन्होंने बच्चों का नाम और उनकी कक्षा पूछी, उन्हें आशीर्वाद देते हुए चॉकलेट और टॉफियां बांटीं। सीएम ने परिजनों से कहा कि वे बच्चों की शिक्षा में कोई कमी न छोड़ें और उन्हें नियमित रूप से स्कूल भेजें।
लापरवाह अधिकारियों पर जीरो टॉलरेंस: पूरे प्रशासनिक अमले में मची खलबली
मुख्यमंत्री के इस बेहद कड़े और आक्रामक रुख ने पूरे प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जनसुनवाई में किसी भी स्तर की शिथिलता सीधे निलंबन और बर्खास्तगी का कारण बन सकती है। मुख्यमंत्री के निर्देश के तत्काल बाद गोरखपुर जिला प्रशासन ने संबंधित पीड़ित महिला के गांव में राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम रवाना कर दी, जिसने मौके पर पहुंचकर पैमाइश की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सीएम योगी का यह फैसला यह सिद्ध करता है कि कमजोरों के अधिकारों की रक्षा और भू-माफियाओं के खिलाफ योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर पूरी कठोरता से लागू की जा रही है।