आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट पर टला संकट: जौहर यूनिवर्सिटी में फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर

आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट पर टला संकट: जौहर यूनिवर्सिटी में फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान द्वारा स्थापित रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी पर छाए ध्वस्तीकरण के बादल कुछ समय के लिए छंट गए हैं। 13 अगस्त को मुरादाबाद के मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह की अदालत में इस बहुचर्चित मामले की अहम सुनवाई हुई।

इस दौरान रामपुर विकास प्राधिकरण के उस फैसले पर रोक जारी रखने का निर्णय लिया गया जिसमें यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को गिराने का फरमान सुनाया गया था। इस फैसले से यूनिवर्सिटी प्रबंधन और वहां पढ़ने वाले हजारों छात्रों को फौरी तौर पर बड़ी राहत मिली है।

अधूरी रिपोर्ट के कारण अटकी आगे की प्रक्रिया

इस पूरे कानूनी विवाद में एसडीएम रामपुर की रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जौहर यूनिवर्सिटी का पक्ष रख रहे वकील जुनैद एजाज के मुताबिक मंडलायुक्त ने जो विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी वह अभी तक प्राप्त नहीं हो सकी है। वहीं दूसरी ओर विकास प्राधिकरण के वकील ने अदालत को बताया कि कुछ बिंदुओं पर बहस के दौरान पेश की गई रिपोर्ट अधूरी पाई गई। इसी खामी की वजह से उस रिपोर्ट को वापस कर दिया गया है। प्रशासन की इस देरी के चलते मामले में अगली सुनवाई की कोई नई तारीख अभी तय नहीं की गई है।

बिना नक्शा पास कराए निर्माण का है गंभीर आरोप

यह पूरा विवाद इमारतों के निर्माण की वैधानिकता से जुड़ा है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम 1973 की धारा 27(1) का हवाला देते हुए इन इमारतों को अवैध ठहराया है। प्रशासन का स्पष्ट दावा है कि इन 38 विशाल भवनों का निर्माण बिना किसी स्वीकृत भवन योजना या नक्शे के किया गया था। इसी आधार पर रामपुर डीएम ने इन सभी इमारतों को जमींदोज करने का सख्त आदेश पारित किया था।