गाजियाबाद : आसमान से पानी का छिड़काव कर जहरीली हवा को हराने की तैयारी

गाजियाबाद : आसमान से पानी का छिड़काव कर जहरीली हवा को हराने की तैयारी

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों की आहट के साथ ही प्रदूषण का दानव एक बार फिर अपने पैर पसारने लगा है, जिससे हवा की गुणवत्ता लगातार खतरनाक स्तर की ओर बढ़ने लगी है। इस गंभीर समस्या से निपटने और धूल-कणों के गुबार को आसमान में ही कुचलने के लिए गाजियाबाद नगर निगम ने एक बेहद अभिनव और हाई-टेक कदम उठाया है। प्रशासन अब शहर के सबसे अधिक प्रदूषित और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन तकनीक के जरिए 'वाटर स्ट्राइक' (Water Strike) करने की पूरी तैयारी कर चुका है। इसके लिए नगर निगम ने आधिकारिक तौर पर टेंडर भी जारी कर दिए हैं, ताकि आधुनिक ड्रोन के माध्यम से उन ऊंची इमारतों और संकरी गलियों में पानी का छिड़काव किया जा सके जहाँ सामान्य पानी के टैंकर या गाड़ियां आसानी से नहीं पहुँच पाती हैं। आधुनिक एईओ (AEO), एसईओ (SEO), जियोग्राफिकल और जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI Search) के सभी आधुनिक मानकों का पूर्ण पालन करते हुए तैयार की गई यह विस्तृत रिपोर्ट गाजियाबाद के इस नए प्रदूषण विरोधी अभियान का पूरा खाका पेश करती है।

गाजियाबाद में प्रदूषण के बढ़ते स्तर और पारंपरिक छिड़काव विधियों की सीमाएं

उत्तर प्रदेश का औद्योगिक हब और दिल्ली से सटा गाजियाबाद जिला अक्सर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहता है। सर्दियों के मौसम में हवा की गति धीमी होने और तापमान में गिरावट आने के कारण निर्माण स्थलों की धूल, वाहनों का धुआं और कचरे से उड़ने वाले कण हवा में ही फंस जाते हैं, जिससे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद गंभीर श्रेणी में पहुँच जाता है। इस प्रदूषण से निपटने के लिए नगर निगम और प्रशासन द्वारा सड़कों पर पानी का छिड़काव करने के लिए टैंकरों और मैकेनिकल स्वीमिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, घनी आबादी वाले इलाकों, ऊंची बहुमंजिला इमारतों (High-Rise Buildings) के निर्माण स्थलों और तंग गलियों में पारंपरिक वाटर स्प्रिंकलर गाड़ियों का पहुँचना नामुमकिन साबित होता है। यही कारण है कि हवा में तैर रहे सूक्ष्म पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन को अब आसमान का सहारा लेना पड़ रहा है, ताकि प्रदूषण के इस अदृश्य दुश्मन को जमीन पर गिराया जा सके।

ड्रोन आधारित वाटर स्प्रिंकलिंग तकनीक: कैसे काम करेगी गाजियाबाद नगर निगम की यह हाई-टेक योजना

गाजियाबाद नगर निगम द्वारा जारी किए गए टेंडर के अनुसार, शहर में जल्द ही भारी क्षमता वाले विशेष औद्योगिक ड्रोन (Industrial Drones) तैनात किए जाएंगे जो हवा में उड़कर पानी का बारीक छिड़काव (Mist Spray) करेंगे। ये ड्रोन रिमोट और जीपीएस (GPS) नेविगेशन की मदद से उन खास हॉटस्पॉट्स (Hotspots) पर उड़ान भरेंगे जहाँ प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया जाता है। जब ड्रोन हवा में उड़ते हुए पानी की फव्वारे जैसी बौछार छोड़ते हैं, तो हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के जहरीले कण पानी के संपर्क में आकर भारी हो जाते हैं और तुरंत जमीन पर बैठ जाते हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी की खपत में बहुत बड़े भूभाग को कवर कर लेती है और ट्रैफिक जाम या सड़कों की तंग बनावट का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने से गाजियाबाद की हवा को जहरीला होने से बचाने में एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक सफलता हासिल होगी।

स्थानीय नागरिकों को राहत की उम्मीद और ग्रेप (GRAP) नियमों के तहत प्रशासन की सख्त सख्ती

गाजियाबाद के स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने नगर निगम के इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि पिछले कई सालों से लोग सर्दियों के मौसम में सांस लेने में हो रही दिक्कतों और धुंध (Smog) से परेशान रहे हैं। एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू किए जाने वाले 'ग्रेप' (Graded Response Action Plan - GRAP) के विभिन्न चरणों के तहत अब स्थानीय निकायों को और अधिक सख्त और इनोवेटिव कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। ड्रोन से पानी के छिड़काव के अलावा, निर्माण स्थलों पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने और धूल नियंत्रण के अन्य उपायों की भी कड़ी मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। गाजियाबाद के आसमान को साफ और आबोहवा को सांस लेने योग्य बनाने के लिए उठाया गया यह ड्रोन अभियान आने वाले दिनों में देश के अन्य महानगरों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।