'जेन-जी के वोटों के स्वार्थ में बाकी मुद्दों को भूला विपक्ष': FCRA संशोधन बिल पर मायावती का बड़ा हमला, सत्ता-पक्ष को भी घेरा
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने संसद के मौजूदा सत्र के दौरान लाए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA संशोधन बिल और देश के राजनीतिक हालातों को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। मायावती ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि विपक्ष सिर्फ जेन-जी (Gen Z) के वोटों के स्वार्थ में देश के अन्य महत्वपूर्ण और बुनियादी जनहित के मुद्दों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार और विपक्षी दलों दोनों पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि दोनों ने मिलकर इस गंभीर विधेयक का अत्यधिक राजनीतिकरण कर दिया है।
संसद न चलने देने और विपक्षी रणनीतियों पर उठाए बड़े सवाल
मायावती ने अपने बयानों के जरिए कहा कि यह बेहतर होता यदि विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित करने के बजाय इस विधेयक को सदन में पेश किए जाने के दौरान इसकी कमियों को खुलकर उजागर करता, ताकि पूरा देश सच्चाई से वाकिफ हो पाता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की जिद और हंगामे की वजह से संसद ठीक से नहीं चल पाई, जिसका सीधा फायदा उठाकर सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को मिनटों में पास करा लिया। मायावती के अनुसार, यह स्थिति विपक्ष की या तो अंदरूनी मिलीभगत को दर्शाती है या फिर युवाओं के वोटों के मोह में अन्य जरूरी राष्ट्रीय मुद्दों से उनका पूरी तरह ध्यान भटक चुका है।
राम मंदिर चढ़ावे और भ्रष्टाचार के मामलों को पीछे छोड़ने का आरोप
बसपा सुप्रीमो ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि राजनीतिक प्राथमिकताएं सिर्फ चुनावी नफा-नुकसान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष को अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे और उसमें सामने आ रही गड़बड़ियों व भ्रष्टाचार के अहम मुद्दों को भी प्रमुखता से संसद में उठाना चाहिए था। लेकिन अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते विपक्ष ने इन गंभीर मामलों को बहुत पीछे धकेल दिया है, जबकि देशहित में इस पर पारदर्शी चर्चा होना बेहद जरूरी था।
जनता से राजनीतिक स्वार्थ की इस रस्साकशी से सतर्क रहने की अपील
मायावती ने देश की आम जनता से अपील की है कि वे संसद सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक स्वार्थ की इस जंग से पूरी तरह सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में केवल 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' के सिद्धांतों पर चलने वाली बहुजन समाज पार्टी ही जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाती है। हाल ही में लोकसभा में एफसीआरए संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में सरगर्मी काफी तेज हो गई है, और मायावती के इस बयान ने तमाम राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है।