3 अगस्त से यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र: संभल हिंसा की चौंकाने वाली रिपोर्ट होगी पेश; अनुपूरक बजट से लेकर अध्यादेशों तक जानें सब कुछ!

3 अगस्त से यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र: संभल हिंसा की चौंकाने वाली रिपोर्ट होगी पेश; अनुपूरक बजट से लेकर अध्यादेशों तक जानें सब कुछ!

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में हरी झंडी मिलने के बाद 3 अगस्त 2026 से उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र (UP Assembly Monsoon Session 2026) शुरू होने जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक, यह सत्र भले ही छोटा (3 से 6 अगस्त तक) हो, लेकिन विधायी और राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण और हंगामेदार रहने के आसार हैं।

सत्र के पहले दिन आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से 5 बार विधायक रहे स्वर्गीय आलम बदी के निधन पर शोक प्रस्ताव रखा जाएगा। इस सत्र में वित्तीय एजेंडे के साथ-साथ राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और संवेदनशील रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएगी। आइए जानते हैं इस मानसून सत्र की बड़ी और खास बातें।

1. संभल हिंसा की 450 पन्नों की न्यायिक जांच रिपोर्ट होगी पेश

इस सत्र का सबसे बड़ा और तीखा राजनीतिक मुद्दा 'संभल हिंसा 2024' की न्यायिक जांच रिपोर्ट बनने जा रही है। नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के अदालती सर्वे के दौरान भड़की भीषण हिंसा की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय आयोग गठित किया गया था। आयोग की इस 450 पन्नों की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने की कैबिनेट मंजूरी दे चुकी है।

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट के मुख्य अंश:

  • डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) में बदलाव: रिपोर्ट में संभल की बदलती जनसांख्यिकी पर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। कहा गया है कि आजादी के समय नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी करीब 45% थी, जो अब घटकर लगभग 15% रह गई है।

  • हिंसा का कारण: रिपोर्ट में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के कथित भड़काऊ भाषण को माहौल बिगड़ने का मुख्य कारण माना गया है।

  • विदेशी कनेक्शन: दंगों में पाकिस्तानी नेटवर्क, गैंगस्टर शारिक साठा की भूमिका और 'मेड इन यूएसए' अंकित विदेशी हथियारों व पिस्तौल के इस्तेमाल का भी जिक्र किया गया है।

2. वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट (Supplementary Budget)

योगी सरकार इस सत्र के दौरान चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी अनुपूरक अनुदानों की मांगें (Supplementary Budget) सदन के पटल पर रखेगी।

  • इस बजट के जरिए सरकार राज्य में चल रही मेगा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects), जैसे नए एक्सप्रेसवे और औद्योगिक गलियारों के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान करेगी।

  • इसके अलावा आगामी त्योहारों और विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं (जैसे महिला कल्याण विभाग में भर्तियां) के सुचारू संचालन के लिए वित्तीय आवंटन किया जाएगा।

3. अध्यादेशों की जगह लेंगे नए विधेयक (Bills & Ordinances)

विगत सत्रावसान के बाद शासन द्वारा जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जो महत्वपूर्ण अध्यादेश (Ordinances) प्रख्यापित किए गए थे, उन्हें अब कानून का रूप देने के लिए प्रतिस्थानी विधेयक (Replacement Bills) के रूप में पटल पर रखा जाएगा। विपक्ष इन विधेयकों की भाषा और प्रावधानों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।

इन मुद्दों पर मचेगा घमासान, विपक्ष ने कसी कमर

सत्र के दौरान केवल संभल हिंसा ही नहीं, बल्कि विपक्ष कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार को वॉकआउट और हंगामे के जरिए घेरने की तैयारी में है:

  • पेपर लीक और छात्र आंदोलन: हालिया प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले और दिल्ली में छात्रों के आंदोलन व उन पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा गूंजेगा।

  • राम मंदिर से जुड़े विवाद: विपक्ष राम मंदिर से जुड़े चंदे और जमीनों को लेकर कथित विवादों पर तीखे सवाल उठाने की तैयारी में है।

  • कांवड़ यात्रा गाइडलाइंस: श्रावण मास के दौरान कांवड़ यात्रा को लेकर जारी प्रशासनिक गाइडलाइंस और दुकानदारों के नाम लिखने वाले पुराने विवादों को दोबारा हवा मिल सकती है।

  • जौहर यूनिवर्सिटी मामला: समाजवादी पार्टी रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्तियों पर की गई कार्रवाई के खिलाफ सदन में पुरजोर आवाज उठाएगी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-174 के अनुसार, दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतराल नहीं हो सकता, इसी संवैधानिक बाध्यता के तहत सरकार यह संक्षिप्त लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सत्र संचालित करने जा रही है।