सपा की अंदरूनी कलह फिर आई सामने! मौजूदा सांसद का नाम गायब, BJP नेता बने मुख्य अतिथि
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी का अंदरूनी कलह एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर आ गया है। 'खुद्दामे गुलामाने ताजदारे मदीना कमेटी' के बैनर तले आयोजित होने वाले अजीमुश्शान जलसा-ए-आम के आमंत्रण पत्र ने स्थानीय राजनीति में नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
इस कमेटी की कमान पूर्व सपा सांसद डॉ. एसटी हसन के हाथों में है। जलसे के आधिकारिक आमंत्रण पत्र से मुरादाबाद की मौजूदा सपा सांसद रुचि वीरा का नाम पूरी तरह गायब है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त को मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल किया गया है।
भाजपा नेताओं को मंच, मौजूदा सांसद की अनदेखी पर भड़के समर्थक
कार्यक्रम में भाजपा एमएलसी के अलावा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता और अमीरुल हसन जाफरी को भी मुख्य अतिथि बनाया गया है। जिले की वर्तमान सांसद होने के बावजूद रुचि वीरा को तवज्जो न मिलने पर उनके समर्थकों में भारी आक्रोश है। सांसद समर्थक वदूद खां ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्थानीय सांसद होने के नाते उनका नाम आमंत्रण पत्र पर प्रमुखता से होना चाहिए था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक ही दल के दो कद्दावर नेताओं के बीच खिंची यह लकीर सपा संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही है।
पारिवारिक कार्यक्रमों से लेकर मंच तक पुरानी कड़वाहट
यह पहला मौका नहीं है जब दोनों नेताओं के बीच की दूरी सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय बनी हो। इससे पहले डॉ. एसटी हसन की बेटी के निकाह समारोह में भी सांसद रुचि वीरा को न्योता नहीं दिया गया था, जबकि उस शादी समारोह में भाजपा नेताओं की मौजूदगी खूब चर्चा में रही थी। अब सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रम में भी वही पैटर्न दोहराए जाने से पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान और खुलकर सामने आ गई है।
आयोजकों की सफाई: 'यह सपा का कार्यक्रम नहीं, गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल'
बढ़ते विवाद पर कमेटी के महासचिव सलीम वारसी ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि इस आयोजन का किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। यह वर्षों से आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द्र का मंच रहा है, जहां सभी धर्मों और विचारधाराओं के लोग शिरकत करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने भाजपा एमएलसी को आमंत्रित करके शहर की साझी संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने का काम किया है।
टिकट विवाद से शुरू हुई सियासी अदावत
दोनों नेताओं के बीच की यह तल्खी लोकसभा चुनाव के दौर से जुड़ी है। समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने पहले डॉ. एसटी हसन को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन ऐन वक्त पर नाटकीय घटनाक्रम के तहत उनका टिकट काटकर रुचि वीरा को मैदान में उतार दिया गया था। टिकट कटने के बाद डॉ. एसटी हसन ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर की थी, और उसी दौर से शुरू हुआ यह सियासी मनमुटाव आज भी विभिन्न मंचों पर साफ दिखाई दे रहा है।