तीन बार के विधायक के खिलाफ सपा का मास्टरस्ट्रोक! ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी

तीन बार के विधायक के खिलाफ सपा का मास्टरस्ट्रोक! ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी

अमेठी जिले का गौरीगंज क्षेत्र इस समय प्रदेश की राजनीति में गहन चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले तीन चुनावों से यहां की जनता जिस चेहरे को अपना प्रतिनिधि चुन रही थी अब वह पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा बन चुका है।

ऐसे में इलाके के आम मतदाताओं के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके सामने क्या विकल्प होंगे। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अपने खोए हुए प्रभाव को फिर से हासिल करने के लिए जमीन तैयार कर रही है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सपा इस बार जनता के बीच एक प्रभावशाली सवर्ण चेहरे को उतारकर मुकाबले को पूरी तरह दिलचस्प बनाने की योजना पर काम कर रही है।

अखिलेश और संतोष पांडेय के बीच रणनीतिक बातचीत

इस नए सियासी रुख को उस समय और मजबूती मिली जब बुधवार के दिन पूर्व विधायक संतोष पांडेय ने राजधानी लखनऊ पहुंचकर सपा अध्यक्ष से विशेष भेंट की। पार्टी दफ्तर में करीब तीस मिनट तक दोनों नेताओं ने इलाके के जमीनी हालात और लोगों के मूड पर विस्तार से बात की। बातचीत के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर सामने आई मुलाकात की तस्वीर ने स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं के बीच नई चर्चाएं छेड़ दी हैं। हर कोई अब यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्षेत्र में अगला चुनावी मुकाबला किस दिशा में जाएगा।

सगरा आश्रम से शुरू हुआ जनसंपर्क अभियान

संतोष पांडेय की इस इलाके में मौजूदगी अचानक नहीं हुई है। करीब दो हफ्ते पहले 24 अगस्त को बाबूगंज के प्रसिद्ध सगरा धाम में आयोजित विशाल भंडारे के दौरान वे आम लोगों के बीच दिखाई दिए थे। उस समय उन्होंने इसे एक सामान्य धार्मिक दर्शन बताया था लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने की सोची-समझी शुरुआत मान रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट भी किया कि यदि शीर्ष नेतृत्व उन्हें जनता की सेवा के लिए मैदान में उतारेगा तो वे चुनावी समर में उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।

सुलतानपुर से लेकर अवध तक संतोष पांडेय का जनाधार

संतोष पांडेय सपा के उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं जिनका अपने समाज और ग्रामीण जनता पर गहरा असर माना जाता है। साल 2012 में उन्होंने लंभुआ सीट पर 74 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे और बसपा के दिग्गज प्रत्याशी विनोद सिंह को 17 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से पराजित कर जीत दर्ज की थी। इसके बाद भी पार्टी ने 2017 तथा 2022 में लगातार उन पर ही भरोसा जताया। पड़ोसी जिलों में उनकी सक्रिय छवि के कारण लोग उन्हें एक मजबूत विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

चौंकाने वाले हो सकते हैं चुनावी परिणाम

वर्तमान विधायक की व्यक्तिगत पकड़ को ध्यान में रखते हुए विपक्षी खेमा एक मजबूत सामाजिक गठबंधन खड़ा करने की फिराक में है। रणनीति यह है कि यदि पारंपरिक पिछड़े दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के साथ प्रबुद्ध वर्ग का बड़ा हिस्सा जुड़ जाए तो चुनावी परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है परंतु क्षेत्र में बढ़ती हलचल यह साफ दर्शाती है कि आने वाले दिनों में गौरीगंज की चुनावी जंग बेहद कड़े और रोचक मोड़ पर पहुंचेगी।