मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर किया नमन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर किया नमन

देश भर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के दूसरे प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के पावन अवसर पर पूरा देश उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। इसी कड़ी में देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक बहुत ही प्रेरणादायक और गरिमामयी खबर सामने आ रही है, जहां राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के इस महान अवसर पर दोनों महापुरुषों को पूरी श्रद्धा के साथ याद किया और उनके जीवन दर्शन को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस विशेष दिन के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने देश की आजादी के आंदोलनों में महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग तथा लाल बहादुर शास्त्री के 'जय जवान, जय किसान' के ओजस्वी नारे को याद करते हुए युवाओं और प्रदेशवासियों को उनके बताए गए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। आधुनिक डिजिटल और जन-कल्याणकारी नीतियों के इस दौर में इन दोनों महान विभूतियों के विचार आज भी देश के प्रशासनिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। आज के इस विस्तृत और विशेष आलेख में हम आपको मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस श्रद्धांजलि संदेश, उनके द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण विचारों और दोनों महापुरुषों के देश के प्रति अमूल्य योगदान के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं, जो हर भारतीय को गर्व से भर देती है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश की प्रासंगिकता

अक्टूबर की इस पावन सुबह जब पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती मना रहा है, तो उनके द्वारा दिखाए गए सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और स्वच्छता के मार्ग की प्रासंगिकता आज के दौर में और अधिक बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संदेश में विशेष तौर पर इस बात का जिक्र किया कि महात्मा गांधी ने केवल भारत को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने की लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। आज के समय में जब पूरी दुनिया विभिन्न प्रकार के संघर्षों, वैचारिक मतभेदों और पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है, तब गांधीजी के शांति और अहिंसा के सिद्धांत वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित होते हैं। उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्वच्छता अभियानों को जो जन-आंदोलन का रूप दिया गया है, वह सीधे तौर पर महात्मा गांधी के 'स्वच्छ भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ठोस कदम है, जिसे मुख्यमंत्री धामी ने लगातार प्राथमिकता दी है।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, ईमानदारी और 'जय जवान, जय किसान' का उद्घोष

महात्मा गांधी के साथ-साथ आज ही के दिन देश के महान सपूत और सादगी की मिसाल माने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती है, जिनके कृतित्व और व्यक्तित्व से हर भारतीय भली-भांति परिचित है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन की सादगी, देश के प्रति उनकी निष्ठा और संकट के समय लिए गए उनके कड़े एवं साहसिक निर्णय आज के राजनेताओं और युवा पीढ़ी के लिए एक खुला पाठ हैं। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान जब देश गंभीर खाद्यान्न संकट और बाहरी आक्रमण से जूझ रहा था, तब शास्त्री जी ने अपने ओजस्वी नेतृत्व से 'जय जवान, जय किसान' का ऐसा नारा दिया जिसने पूरे देश की जनता और सेना में नया जोश भर दिया था। उन्होंने देशवासियों से हफ्ते में एक दिन उपवास रखने की अपील करके यह साबित कर दिया था कि एक सच्चा देशभक्त किस प्रकार राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शास्त्री जी के मूल्य और उनके द्वारा दिखाया गया ईमानदारी का रास्ता हमें हमेशा यह सिखाता है कि पद या कुर्सी से बड़ा राष्ट्र का सम्मान और जनसेवा होती है।

देवभूमि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में देश के महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि

उत्तराखंड की पावन और पवित्र भूमि हमेशा से वीर सपूतों, संतों और स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि रही है, और यहां के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हर राष्ट्रीय पर्व तथा महापुरुषों की जयंती पर उनके आदर्शों को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास करते रहे हैं। इस अवसर पर राजधानी देहरादून में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ने न केवल प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया, बल्कि राज्य के विकास कार्यों, गरीब कल्याण योजनाओं और युवाओं के रोजगार से जुड़ी पहलों को भी दोनों महापुरुषों के आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। सरकार का यह प्रयास है कि राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से नई पीढ़ी को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के संघर्षमय जीवन के बारे में विस्तार से बताया जाए, ताकि वे अपने अंदर नैतिक साहस और राष्ट्रभक्ति की भावना को विकसित कर सकें। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से यह भी अपील की कि वे आज के दिन कम से कम एक संकल्प जरूर लें जो समाज और राष्ट्र के विकास में प्रत्यक्ष रूप से मददगार साबित हो सके।

आधुनिक भारत के निर्माण में गांधी और शास्त्री के विचारों की प्रासंगिकता

आज जब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद एक आत्मनिर्भर और ग्लोबल पावर के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो इस सफर में हमारे इन महान पूर्वजों के विचार हमारी वैचारिक रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल जैसे आधुनिक अभियान कहीं न कहीं महात्मा गांधी के 'स्वदेशी' और 'ग्राम स्वराज' के विचारों का ही एक उन्नत और आधुनिक स्वरूप हैं। इसी प्रकार, देश की सीमाओं की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में किसानों को मिल रही प्राथमिकता लाल बहादुर शास्त्री के सपनों के भारत की तस्वीर को दर्शाती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इन दोनों महापुरुषों को दी गई श्रद्धांजलि केवल एक पारंपरिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि उत्तराखंड सरकार और देश का नेतृत्व अपनी सांस्कृतिक जड़ों और महान इतिहास को साथ लेकर भविष्य के भारत का निर्माण कर रहा है। गांधी जयंती और शास्त्री जयंती का यह पर्व हमें एक बार फिर से यह आत्मविश्लेषण करने का अवसर देता है कि हम अपने देश और समाज के लिए कितनी ईमानदारी से योगदान दे रहे हैं।