सीएम धामी की अनूठी पहल से साकार हो रहा विदेश में नौकरी का सपना

सीएम धामी की अनूठी पहल से साकार हो रहा विदेश में नौकरी का सपना

देवभूमि उत्तराखंड के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अब केवल देश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और ठोस नीतियों के चलते युवा अब विदेशों में भी अपनी काबिलियत का परचम लहरा रहे हैं। राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना' के अंतर्गत एक बहुत बड़ी सफलता सामने आई है, जिसके तहत अब तक उत्तराखंड के 106 से अधिक युवा विदेशों में विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर सफलतापूर्वक नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं। सरकार के इस सुनियोजित और प्रभावी प्रयासों से पहाड़ी राज्य के युवाओं के लिए ग्लोबल मार्केट के द्वार खुल गए हैं, जिससे न केवल उनका आर्थिक भविष्य उज्जवल हो रहा है बल्कि वे अपने परिवार और प्रदेश का नाम भी रोशन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना बनी युवाओं के लिए वरदान

उत्तराखंड के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और विदेशों में रोजगार की तलाश कर रहे हुनरमंद लोगों को सही मंच प्रदान करने के लिए मई 2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वकांक्षी योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत एक विशेष 'विदेश रोजगार प्रकोष्ठ' का गठन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार की आधुनिक जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तकनीकी और व्यावहारिक रूप से दक्ष बनाना है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हमारे राज्य का युवा सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि विकसित देशों की औद्योगिक और सेवा प्राथमिकताओं के अनुसार खरा उतरे और उन्हें आकर्षक वेतनमान वाली नौकरियां प्राप्त हो सकें।

जापान, जर्मनी और सऊदी अरब में हुनर का जलवा बिखेर रहे हैं देवभूमि के युवा

विदेश रोजगार प्रकोष्ठ से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के पहले चरण में अब तक कुल 106 युवाओं ने विदेश में रोजगार हासिल करने में बड़ी सफलता पाई है। इनमें से 75 युवा जापान में, 1 युवा जर्मनी में और 30 युवा सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी युवा स्वास्थ्य (Health), हॉस्पिटेलिटी (Hospitality) और अन्य तकनीकी एवं सेवा क्षेत्रों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। विदेशी नियोक्ताओं द्वारा उत्तराखंड के इन युवाओं के कार्यकुशलता और अनुशासन की खासी सराहना की जा रही है, जो भविष्य में अन्य युवाओं के लिए भी विदेश के बाजारों में रास्ते खोलने का काम कर रहा है।

विदेशी भाषाओं में पारंगत बनाने के लिए प्रदेशभर में संचालित हो रहे हैं विशेष प्रशिक्षण केंद्र

विदेशों में नौकरी पाने की सबसे बड़ी बाधा वहां की भाषा और संवाद शैली होती है, जिसे दूर करने के लिए धामी सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। युवाओं को जर्मन, जापानी और अन्य विदेशी भाषाओं में पूरी तरह प्रशिक्षित करने के लिए प्रदेश भर में कुल 158 से अधिक विशेष प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अकेले राजधानी देहरादून में जर्मन और जापानी भाषा के लिए कई सेंटर चल रहे हैं, इसके अलावा अल्मोड़ा और बागेश्वर जैसे पर्वतीय जिलों में भी युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही इन भाषाओं की उच्च स्तरीय कोचिंग दी जा रही है। योजना की भारी सफलता को देखते हुए सरकार अब उत्तरकाशी और टिहरी जैसे दूरदराज के जनपदों में भी ऐसे भाषा प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी कर रही है ताकि गांवों के युवा भी इसका पूरा लाभ उठा सकें।

ग्लोबल जॉब्स के नए आयाम तलाश रही है सरकार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहा दायरा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट विजन है कि उत्तराखंड के युवाओं को दुनिया के अन्य ताकतवर देशों में भी रोजगार के नए अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए हाल ही में राज्य सरकार ने विभिन्न देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें भी की हैं, जिसमें जमैका, इथियोपिया और जाम्बिया जैसे देशों में कृषि, नर्सिंग, लॉजिस्टिक्स और फार्मा सेक्टर की संभावनाओं पर मंथन किया गया है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे भारतीय मिशनों के साथ निरंतर संपर्क में रहें ताकि दुनिया के किसी भी कोने में निकलने वाली नौकरियों की जानकारी समय रहते उत्तराखंड के युवाओं तक पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री धामी के इन प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में मजबूत इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए, तो प्रदेश का युवा वैश्विक फलक पर अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बना सकता है।