देहरादून की बेटी डॉ. मोनिका राणा ने रचा इतिहास

देहरादून की बेटी डॉ. मोनिका राणा ने रचा इतिहास

उत्तराखंड के देहरादून की प्रतिभाशाली बेटी और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की तेज-तर्रार अधिकारी डॉ. मोनिका राणा ने देश भर में देवभूमि का मान एक बार फिर से बढ़ा दिया है। वर्ष 2018 बैच की आईएएस अधिकारी डॉ. मोनिका राणा ने तमिलनाडु के तेनकासी जिले में जिलाधिकारी (DM) के रूप में पदभार संभालकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। वह इस महत्वपूर्ण और प्रशासनिक रूप से संवेदनशील जिले की कमान संभालने वाली इतिहास की पहली महिला डीएम बन गई हैं। उनकी इस शानदार सफलता से न केवल उनके पैतृक क्षेत्र बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश भर के युवाओं में गजब का उत्साह और गर्व का माहौल है, जो यह साबित करता है कि अटूट इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के दम पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

जौनसार-बावर के प्रसिद्ध लाखामंडल क्षेत्र से है गहरा ताल्लुक

मूल रूप से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध जौनसार-बावर और ऐतिहासिक लाखामंडल क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली डॉ. मोनिका राणा का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। उनके परिवार की जड़ें उत्तराखंड की संस्कृति और पहाड़ियों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। उनका पैतृक गांव नाडा लाखामंडल है, जहां से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर दक्षिण भारत के प्रशासनिक मानचित्र पर अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। पहाड़ी संस्कृति की सादगी और संस्कारों में पली-बढ़ी मोनिका ने अपनी शुरुआती शिक्षा देहरादून के प्रतिष्ठित स्कूलों से ही पूरी की है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई दून के स्कॉलर्स होम से पूरी की और उसके बाद कक्षा छठी से बारहवीं तक की स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ स्कूल से हासिल की, जो उनकी मजबूत शैक्षणिक नींव का मुख्य आधार बनी।

माता-पिता को खोने का गहरा आघात और जीवन का कड़ा संघर्ष

डॉ. मोनिका राणा का जीवन संघर्ष, त्याग और जुझारूपन की एक ऐसी अनूठी दास्तान है जो हर किसी को अंदर से झकझोर कर रख देती है। उनके जीवन में एक ऐसा काला दौर भी आया जब वर्ष 2012 में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में उनके माता-पिता का साया उनके सिर से हमेशा के लिए उठ गया। माता-पिता की अचानक हुई इस दुखद मृत्यु से पूरा परिवार बुरी तरह टूट गया था, लेकिन ऐसे विकट और संकटपूर्ण समय में उनकी बहन दिव्या उनके लिए ढाल बनकर खड़ी हुईं। उनकी बहन ने न सिर्फ हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि माता-पिता की कमी को महसूस न होने देते हुए उनके आईएएस बनने के सपने को पूरा करने में अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। पारिवारिक त्रासदियों और जीवन के थपेड़ों से हार मानने के बजाय मोनिका ने इन बाधाओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और लगातार आगे बढ़ती चली गईं।

बैंक मैनेजर और एमबीबीएस डॉक्टर बनने के बाद क्रैक की यूपीएससी परीक्षा

डॉ. मोनिका राणा की शैक्षणिक योग्यता और उनका करियर ग्राफ बेहद प्रेरणादायक और अनोखा है। उन्होंने स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी मेहनत के दम पर सबसे पहले बैंक में मैनेजर के पद पर नौकरी हासिल की। बैंकिंग सेक्टर में कार्य करने के बावजूद उनका वैद्यों और चिकित्सा सेवा के प्रति रुझान कम नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने मेडिकल की तैयारी की और तमिलनाडु डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिसिन और सर्जरी में अपनी एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री पूरी की। एक सफल डॉक्टर बनने के बाद भी उनका प्रशासनिक सेवा में देश की सेवा करने का सपना अधूरा था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा की कठिन तैयारी शुरू की। अपनी लगन और अनुशासन के बल पर उन्होंने साल 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में 577वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया।

तमिलनाडु कैडर में प्रशासनिक पदों पर शानदार कार्यशैली और उपलब्धियां

तमिलनाडु कैडर की 2018 बैच की आईएएस अधिकारी डॉ. मोनिका राणा ने अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत उधगमंडलम (Ooty) में सहायक कलेक्टर के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाया है। उन्होंने स्पेशल एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम की परियोजना निदेशक, नीलगिरी जिले में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और मदुरै में अतिरिक्त कलेक्टर (Additional Collector) के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, तेनकासी की डीएम बनने से ठीक पहले वह तिरुनेलवेली नगर निगम में आयुक्त (Commissioner) के पद पर तैनात थीं। अपने कार्यकाल के दौरान अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जनहित से जुड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारने के उनके कड़े प्रशासनिक फैसलों ने उन्हें हमेशा एक दबंग और ईमानदार अधिकारी के रूप में स्थापित किया है।

देश की बेटियों के लिए प्रेरणा का एक नया प्रकाशपुंज बनीं डॉ. मोनिका राणा

देहरादून की गलियों से लेकर तमिलनाडु के एक प्रमुख जिले की कमान संभालने वाली डॉ. मोनिका राणा की यह कहानी आज के दौर के युवाओं और विशेषकर देश की बेटियों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। यह साबित करता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां, माता-पिता का साया उठ जाना या जीवन के बड़े संघर्ष भी आपके बुलंद हौसलों को नहीं डिगा सकते, यदि आपके भीतर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो। तेनकासी जिले की पहली महिला जिलाधिकारी के रूप में उनकी यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सुदूर दक्षिण भारत में भी उत्तर भारत की बेटियां अपनी कार्यकुशलता से किस तरह लोहा मनवा रही हैं। पूरा देश और विशेष रूप से उत्तराखंड उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर रहा है।