उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने की कवायद तेज

उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने की कवायद तेज

उत्तराखंड के न्यायिक और प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुलाकात की है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) को नैनीताल की तंग पहाड़ियों से मैदानी शहर हल्द्वानी में स्थानांतरित करने के लिए आरक्षित वन भूमि (Forest Land) के हस्तांतरण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द हरी झंडी दिलाना था। मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि हल्द्वानी में प्रस्तावित अत्याधुनिक हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए चिन्हित वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए, जिससे राज्य के लाखों वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम जनता को सहूलियत मिल सके।

#1. नैनीताल से हल्द्वानी क्यों शिफ्ट हो रहा है उत्तराखंड हाईकोर्ट? जानिए मुख्य वजहें

उत्तराखंड हाईकोर्ट वर्तमान में नैनीताल के 'चाइना पीक' की तलहटी में ऐतिहासिक भवन में संचालित हो रहा है। हालांकि, बदलते समय और बढ़ती आबादी के साथ नैनीताल में हाईकोर्ट के संचालन को लेकर कई गंभीर भौगोलिक और व्यवस्थागत चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। पर्यटन सीजन के दौरान नैनीताल शहर में भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा, संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन (Landslides) का खतरा और पार्किंग की भारी कमी के कारण दूर-दराज के जिलों से आने वाले वादकारियों, बुजुर्गों और वकीलों को अदालती कार्यवाहियों में शामिल होने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इन्हीं व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए धामी सरकार ने हाईकोर्ट को मैदानी और सुगम कनेक्टिविटी वाले शहर हल्द्वानी में स्थानांतरित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

#1. हल्द्वानी में प्रस्तावित 30 हेक्टेयर भूमि और केंद्रीय वन मंत्री का आश्वासन

हाईकोर्ट के नए और भव्य परिसर के निर्माण के लिए हल्द्वानी क्षेत्र में लगभग 30 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि को चिन्हित किया गया है। चूंकि यह भूमि वन विभाग के अधीन आती है, इसलिए केंद्र सरकार और पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति अनिवार्य है। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि हल्द्वानी में नए परिसर के निर्माण से न केवल आवाजाही आसान होगी, बल्कि वहां भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का डिजिटल और सर्वसुविधायुक्त ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पर केंद्र सरकार की ओर से सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

#1. अधिवक्ताओं, वादियों और कुमाऊं क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

उत्तराखंड हाईकोर्ट का हल्द्वानी स्थानांतरण केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिहाज से भी गेम-चेंजर साबित होगा। हल्द्वानी राज्य का मुख्य रेलवे और रोड कनेक्टिविटी हब है, जिससे गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों के निवासियों के लिए हाईकोर्ट पहुंचना बेहद आसान और किफायती हो जाएगा। इस फैसले से हल्द्वानी और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट, ट्रांसपोर्ट, होटल इंडस्ट्री और व्यावसायिक गतिविधियों को जबरदस्त रफ्तार मिलेगी। वहीं नैनीताल शहर पर पर्यटन और वाहनों का अत्यधिक बोझ कम होगा, जिससे वहां के प्राकृतिक पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Ecology) को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।

#1. भविष्य का आधुनिक ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स: कब तक पूरा होगा निर्माण?

धामी कैबिनेट द्वारा भूमि आवंटन को पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है, और अब केंद्र सरकार से अंतिम वन मंजूरी (Forest Clearance) मिलते ही लोक निर्माण विभाग (PWD) और आर्किटेक्ट्स की टीम नए परिसर की विस्तृत डिजाइन और मास्टर प्लान को अंतिम रूप देगी। प्रस्तावित नए हाईकोर्ट परिसर में मल्टी-स्टोरी कोर्ट रूम्स, जजों व अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर्स, डिजिटल लाइब्रेरी, विशाल पार्किंग एरिया, आवासीय परिसर और दूर-दराज के फरियादियों के लिए सर्वसुविधायुक्त विश्राम गृह बनाए जाएंगे। राज्य सरकार की कोशिश है कि सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूरी कर जल्द से जल्द शिलान्यास की प्रक्रिया शुरू की जाए।