उत्तराखंड वोटर लिस्ट में भारी कटौती 4.53 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे, 9 लाख की मैपिंग अब भी अधूरी

उत्तराखंड वोटर लिस्ट में भारी कटौती 4.53 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे, 9 लाख की मैपिंग अब भी अधूरी

उत्तराखंड में आगामी 29 मई से शुरू होने जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान से ठीक पहले एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा डेटा को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए चलाए गए शुद्धिकरण अभियान के तहत वोटर लिस्ट में भारी कटौती देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की मतदाता सूची से एक झटके में 4,53,459 वोटर्स के नाम बाहर कर दिए गए हैं। इस बड़े बदलाव के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक दलों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में नाम क्यों हटाए गए और इसके पीछे निर्वाचन आयोग की क्या रणनीति है।

आंकड़ों का खेल: जनवरी 2025 के मुकाबले भारी गिरावट

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जनवरी 2025 तक उत्तराखंड में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 84,29,459 थी। वहीं, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान यह आंकड़ा 84,31,101 दर्ज किया गया था। लेकिन हालिया प्रशासनिक कार्रवाई और सत्यापन के बाद अब राज्य में कुल वोटर्स की संख्या घटकर करीब 79,76,000 रह गई है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम मतदाता सूची को पूरी तरह विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

इन 3 मुख्य वजहों से कटे साढ़े चार लाख नाम

वोटर लिस्ट से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आए हैं:

  • अनुपस्थित मतदाता (Absentee Voters): ऐसे मतदाता जो अपने पंजीकृत पते पर लंबे समय से नहीं रह रहे हैं।

  • स्थायी विस्थापन (Migration): पहाड़ से रोजगार या अन्य कारणों से मैदानी इलाकों या दूसरे राज्यों में पूरी तरह शिफ्ट हो चुके लोग।

  • मृतक मतदाता (Deceased Voters): ऐसे लोग जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में सूची में बने हुए थे।

एडवांस डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और 9 लाख वोटर्स का पेंच

इस बार चुनाव आयोग ने फर्जी और दोहरे वोटों को पकड़ने के लिए अत्याधुनिक 'एडवांस डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर' (Advanced Duplication Software) का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक की मदद से पूरे साल बेहद गहन जांच-पड़ताल की गई। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक राज्य के करीब 70 लाख मतदाताओं की सफलतापूर्वक डिजिटल मैपिंग पूरी की जा चुकी है। हालांकि, करीब 9 लाख मतदाताओं की मैपिंग अभी भी अधूरी है, जिसे दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर जारी है।

2003 के बाद पहली बार इतना बड़ा अभियान, जारी होगा नोटिस

उत्तराखंड के इतिहास में साल 2003 के बाद यानी लगभग 23 वर्षों के बाद इतने व्यापक और बड़े स्तर पर 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि जिन 9 लाख मतदाताओं की मैपिंग अधूरी है, उन्हें इस अभियान के दौरान एक विशेष फॉर्म जारी किया जाएगा। इस फॉर्म के माध्यम से उनसे वर्ष 2003 के मूल पंजीकरण के संबंध में विवरण मांगा जाएगा। यदि मतदाताओं द्वारा दी गई जानकारी असंतोषजनक पाई जाती है या तय समय सीमा के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता है, तो मतदाता सूची से नाम हटाने से पहले उन्हें एक औपचारिक अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा।

छूटे हुए लोग न हों परेशान, फॉर्म-6 से जुड़ेंगे नए नाम

निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि इस शुद्धिकरण अभियान का उद्देश्य किसी वैध नागरिक को मताधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि डेटा को क्लीन करना है। इस पूरी प्रक्रिया के समानांतर नए मतदाताओं को जोड़ने का काम भी निरंतर जारी रहेगा। ऐसे युवा जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं या जिनका नाम किसी कारणवश लिस्ट में नहीं है, वे 'फॉर्म-6' भरकर बेहद आसानी से अपना नाम नई मतदाता सूची में शामिल करवा सकते हैं।

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