उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक पर बड़ा हादसा: लापता 8 ट्रेकर्स में से 2 के शव बरामद

उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक पर बड़ा हादसा: लापता 8 ट्रेकर्स में से 2 के शव बरामद

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान होने वाले हादसों और खराब मौसम के बीच एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध और बेहद दुर्गमकेदारतालClick to open side panel for more information ट्रेक पर पिछले कुछ दिनों से लापता चल रहे आठ सदस्यीय ट्रेकिंग दल में से दो ट्रेकर्स के शव बरामद कर लिए गए हैं। बंगाल और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखने वाले इन पर्यटकों का यह दल अत्यधिक ठंड, बर्फबारी और रास्ते से भटकने के कारण गहरी खाई और बर्फीली वादियों के बीच फंस गया था। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), उत्तरकाशी जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और माउंटेन रेस्क्यू टीम द्वारा चलाए जा रहे व्यापक और खतरनाक सर्च ऑपरेशन के दौरान दो शवों को ढूंढ निकाला गया है, जबकि बाकी छह लापता सदस्यों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान अभी भी जारी है।

केदारताल ट्रेक पर मौसम का कहर: बंगाल और यूपी के ट्रेकर्स के लापता होने की पूरी घटना

उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित केदारताल ट्रेक अपनी खूबसूरती के साथ-साथ अपनी अत्यधिक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों के लिए जाना जाता है। उत्तरकाशी से शुरू होने वाले इस ट्रेक पर पश्चिम बंगाल (कोलकाता और हावड़ा) तथा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों से पहुंचे साहसी पर्यटकों का एक दल ट्रेकिंग के लिए निकला था। अचानक मौसम खराब होने, भारी बर्फबारी शुरू होने और तापमान शून्य से नीचे चले जाने के कारण यह पूरा दल अपने तय मार्ग से भटक गया और संपर्क से बाहर हो गया था। जब निर्धारित समय के भीतर ट्रेकर्स अपने बेस कैंप नहीं लौटे, तो टूर ऑपरेटर और परिजनों की सूचना पर जिला प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू टीमों को पर्वतीय ढलानों और ग्लेशियरों की ओर रवाना किया।

SDRF और माउंटेन रेस्क्यू टीम का ऑपरशन: दो शव बरामद, छह की तलाश जारी

लापता ट्रेकर्स की सुरागकशी के लिए प्रशासन ने अत्याधुनिक उपकरणों, ड्रोन कैमरों और स्थानीय गाइडों की मदद ली है।केदारतालClick to open side panel for more information के दुर्गम और पथरीले रास्तों पर खोजबीन कर रही SDRF और पुलिस की संयुक्त टीम ने गहरी खाई से दो ट्रेकर्स के शवों को बरामद कर लिया है। खराब मौसम, लगातार गिरती बर्फ और अत्यधिक ठंड के बीच बचाव कर्मियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी जान की परवाह किए बिना बाकी छह लापता लोगों की खोज में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही मौसम थोड़ा साफ होगा, घायलों या फंसे हुए अन्य लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए हेलिकॉप्टर की मदद भी ली जा सकती है।

हिमालयी ट्रेकिंग के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक गाइडलाइंस की अनदेखी

इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर उत्तराखंड में अनियोजित और बिना अनुमति के उच्च हिमालयी ट्रेकिंग पर जाने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्वतीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के इस मौसम में केदारताल या अन्य अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक पर जाने से पहले मौसम के मिजाज का आकलन करना और स्थानीय प्रशासन या वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। कई बार साहसिक पर्यटन के उत्साह में पर्यटक बिना पर्याप्त उपकरणों, गाइड और थर्मल कपड़ों के खतरनाक रास्तों पर निकल जाते हैं, जो जानलेवा साबित होता है। जिला प्रशासन ने सभी टूर ऑपरेटरों और ट्रेकर्स को सख्त हिदायत दी है कि वे खराब मौसम की चेतावनी मिलने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर लौट जाएं।

मृतकों के परिजनों में कोहराम, प्रशासन ने दी हरसंभव मदद की आश्वस्ति

केदारताल ट्रेक हादसे में दो ट्रेकर्स की मौत की खबर मिलते ही पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश स्थित उनके पैतृक गांवों व परिवारों में कोहराम मच गया है। उत्तरकाशी जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन केंद्र लगातार मृतकों के परिजनों के संपर्क में है और शवों को उनके गृह नगर भेजने की कानूनी व प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि रेस्क्यू ऑपरेशन को तब तक नहीं रोका जाएगा जब तक सभी लापता सदस्यों का सुराग नहीं मिल जाता। इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हिमालय की गोद में रोमांच तलाशने से पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और मौसम की जानकारी होना कितना आवश्यक है।