चमोली तमक आपदा के 12 दिन बाद बड़ा अपडेट: सर्च ऑपरेशन के दौरान मिला बीआरओ (BRO) जवान पंकज सिंह का शव

चमोली तमक आपदा के 12 दिन बाद बड़ा अपडेट: सर्च ऑपरेशन के दौरान मिला बीआरओ (BRO) जवान पंकज सिंह का शव

उत्तराखंड के चमोली जिले से तमक आपदा को लेकर एक बहुत ही दुखद और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा के पूरे 12 दिनों बाद भी राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। इसी बीच, लगातार चलाए जा रहे सघन सर्च ऑपरेशन (Search Operation) के दौरान सीमा सड़क संगठन (BRO) के लापता जवान पंकज सिंह का शव बरामद कर लिया गया है। इस दर्दनाक खबर के सामने आने के बाद से लापता जवान के परिवार में कोहराम मच गया है, वहीं बीआरओ यूनिट और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हुए आखिरकार मलबा हटाने के दौरान इस सफलता को हासिल किया है।

क्या थी चमोली तमक आपदा और कैसे लापता हुए थे जवान पंकज सिंह?

पिछले कुछ हफ्तों से उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में मौसम की मार और अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन (Landslide) और आपदा जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। चमोली जिले के तमक क्षेत्र में अचानक आए भारी मलबे और आपदा के कारण संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गए थे और कई लोग तथा वाहन इसकी चपेट में आ गए थे। घटना के समय बीआरओ (Border Roads Organisation) के जवान पंकज सिंह अपनी ड्यूटी निभा रहे थे और सड़क बहाウ कार्य में जुटे हुए थे, तभी अचानक पहाड़ी से गिरे भारी मलबे की चपेट में आकर वह लापता हो गए थे। घटना के तुरंत बाद से ही सेना, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें उनकी तलाश में दिन-रात जुटी हुई थीं।

12 दिनों तक चला चुनौतीपूर्ण सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन

आपदा प्रभावित तमक क्षेत्र का भूगोल बेहद दुर्गम और पहाड़ी है, जिसके कारण रेस्क्यू टीमों को भारी मशीनों और अत्याधुनिक उपकरणों के साथ राहत कार्य चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लगातार हो रहे पत्थरों के गिरने और मलबे की विशाल मात्रा के बीच खोजबीन करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। घटना के 12वें दिन डॉग स्क्वॉड और आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स की मदद से जब एक विशिष्ट क्षेत्र में मलबा हटाया गया, तो जवान पंकज सिंह का पार्थिव शरीर बरामद हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों ने औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिजनों को इस घटना की सूचना दे दी है और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।

देश सेवा में सर्वोच्च बलिदान और प्रशासनिक संवेदनाएं

पंकज सिंह जैसे वीर जवान अपनी जान जोखिम में डालकर देश के दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में सड़कों को दुरुस्त करने और सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ने का कार्य करते हैं। इस आपदा के दौरान उनका इस तरह से असमय चले जाना पूरे देश और रक्षा परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बीआरओ के वरिष्ठ अधिकारियों ने मृत जवान को अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि राष्ट्र उनके इस सर्वोच्च बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा को हमेशा याद रखेगा। प्रशासन ने एक बार फिर से अपील की है कि आपदा संभावित क्षेत्रों में यात्रा या कार्य करते समय अत्यधिक सतर्कता बरतें, क्योंकि पहाड़ों पर मौसम का मिजाज कब बदल जाए, इसका अनुमान लगाना कठिन होता है।