बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने में बचे हैं बस कुछ ही दिन: शीतकाल के लिए तय हुई अंतिम तिथि

बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने में बचे हैं बस कुछ ही दिन: शीतकाल के लिए तय हुई अंतिम तिथि

देवभूमि उत्तराखंड के उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित चार धामों में से सबसे प्रमुख और अलौकिक धाम 'भगवान बद्रीनाथ' (Badrinath Dham) के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की प्रक्रिया और उल्टी गिनती अब आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है। विजयदशमी के पावन अवसर पर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा पंचांग गणना के आधार पर कपाट बंद होने की शुभ तिथि की घोषणा की गई थी, जिसके अनुसार अब भगवान बद्री विशाल के धाम के कपाट बंद होने में बेहद कम समय बचा हुआ है। शीतकाल के आगमन और हिमालयी क्षेत्र में तेजी से गिरते तापमान व बर्फबारी की संभावनाओं को देखते हुए मंदिर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों द्वारा कपाट बंद करने की सभी धार्मिक और पारंपरिक तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। कपाट बंद होने से पूर्व आयोजित होने वाले पंच पूजा (Panch Pooja) विधान की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं, जिसके तहत भगवान बद्री विशाल की पूजा-अर्चना के विशेष अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।

अंतिम दिनों में दर्शन के लिए उमड़ा आस्था का महासैलाब, जय बद्री विशाल के जयकारों से गूंजी अलकनंदा घाटी

जैसे-जैसे धाम के कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे देश-विदेश और विभिन्न राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं का उत्साह और अधिक बढ़ता जा रहा है। बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले भगवान हरि (विष्णु) का आशीर्वाद और दिव्य दर्शन प्राप्त करने के लिए अलकनंदा नदी के पावन तट पर श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ रहा है। सुबह तड़के तप्त कुंड में स्नान करने के बाद हजारों की संख्या में भक्त पंक्तिबद्ध होकर मंदिर के मुख्य द्वार की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। पूरे बद्रीनाथ नगर और आसपास की पर्वत श्रृंखलाओं में 'जय बद्री विशाल' के दिव्य जयकारे गूंज रहे हैं। चमोली जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम दर्शन कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था व बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है ताकि अंतिम दिनों में आने वाले किसी भी तीर्थयात्री को कोई असुविधा न हो।

शीतकाल में जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में विराजमान होंगे भगवान बद्री विशाल, धाम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कपाट बंद होने के पावन अवसर पर भगवान बद्री विशाल की मुख्य पूजा-अर्चना के बाद भगवान के विग्रह को घृत कंबल (घी में डुबोया हुआ ऊनी वस्त्र) से ढका जाएगा। इसके पश्चात भगवान बद्रीनाथ की पवित्र देवडोली (उत्सव मूर्ति) को उनकी शीतकालीन गद्दी स्थल, जोशीमठ स्थित 'श्री नृसिंह मंदिर' के लिए सेना के बैंड-बाजे की मधुर धुनों और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रवाना किया जाएगा। आगामी छह महीनों के शीतकालीन प्रवास के दौरान भगवान बद्री विशाल की नित्य पूजा-अर्चना जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में ही संपन्न होगी, जहां भक्त अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे। कपाट बंद होने के बाद बद्रीनाथ धाम का पूरा इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है, जिसके चलते वहां आम नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी जाती है। इस दौरान धाम की सुरक्षा का जिम्मा पुलिस बल और आईटीबीपी (ITBP) के जवानों के हवाले रहेगा जो माइनस तापमान में भी पवित्र धाम की रखवाली करेंगे।