उत्तराखंड में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए बदला नियम, PG के बाद यहीं करना होगा काम

उत्तराखंड में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए बदला नियम, PG के बाद यहीं करना होगा काम

उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की गंभीर किल्लत को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों से स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई करने वाले सभी एमबीबीएस डॉक्टरों को अब डिग्री पूरी होने के बाद अनिवार्य रूप से न्यूनतम दो वर्ष तक उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में ही सेवाएं देनी होंगी।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए इसका विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, जिससे पर्वतीय अंचलों में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को विशेषज्ञ डॉक्टरों का सीधा संबल मिल सके।

50 फीसदी खाली पदों के बीच 260 सीटों पर बॉन्ड व्यवस्था लागू

मौजूदा समय में राज्य के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के लगभग 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। इस भारी रिक्तता को पाटने के लिए सरकार ने पीजी की सभी 260 सीटों को बॉन्ड व्यवस्था के दायरे में लाने की पूरी तैयारी कर ली है। नए प्रावधानों के तहत पीजी कोर्स में दाखिला लेने वाले प्रत्येक डॉक्टर से दो साल का सेवा बॉन्ड भरवाया जाएगा। इसके बदले सरकार इन डॉक्टरों को भारी वित्तीय राहत देते हुए महज 60 हजार रुपये सालाना की बेहद रियायती फीस पर पीजी की पढ़ाई पूरी कराएगी। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ किया कि प्रदेश में विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से ही प्रवेश नियमों में यह क्रांतिकारी बदलाव किया जा रहा है।

सिमली महिला अस्पताल को बेस अस्पताल बनाने की मांग पर भड़का आंदोलन

इधर चमोली जिले के कर्णप्रयाग स्थित सिमली में महिला अस्पताल को बेस अस्पताल के रूप में उच्चीकृत (अपग्रेड) करने का शासनादेश जारी न होने से स्थानीय जनता और संघर्ष समिति में गहरा आक्रोश फूट पड़ा है। गुरुवार को संघर्ष समिति के सदस्यों ने जोरदार बैठक कर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और जल्द शासनादेश जारी करने की पुरजोर मांग उठाई। समिति के पदाधिकारियों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो सिमली से देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास तक विशाल पथ संचलन निकाला जाएगा।

रविवार को जुटेगी विशाल महापंचायत, दूरस्थ गांवों से उमड़ेंगे लोग

समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नेगी ने जानकारी दी कि लंबे समय से चल रही इस मांग को लेकर पहले भी मशाल जुलूस और विशाल प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी के चलते अब आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया जा रहा है। इसी क्रम में आगामी रविवार को एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इस महापंचायत में कर्णप्रयाग, सिमली, गैरसैण, नारायणबगड़, थराली, नौटी, नंदासैंण, आदिबदरी सहित चमोली जिले के दर्जनों दूरस्थ गांवों से हजारों लोग और विभिन्न सामाजिक-व्यापारिक संगठन हिस्सा लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।