मसूरी में MDDA के काम पर खड़े हुए कई गंभीर सवाल
उत्तराखंड की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी मसूरी में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के विकास कार्यों और निर्माण शैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहाड़ों की रानी मसूरी में जहां सुरक्षा के लिहाज से सड़कों के किनारों पर मजबूत क्रैश बैरियर पहले से ही स्थापित किए गए हैं, वहां अब प्राधिकरण द्वारा दोबारा लोहे की महंगी रेलिंग लगाई जा रही है। इस अजीबोगरीब निर्माण कार्य को देखकर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और पर्यटकों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोग इसे सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग और जनता के पैसों की सरेआम बर्बादी करार दे रहे हैं।
#1. मजबूत क्रैश बैरियर के ऊपर फिर से लोहे की रेलिंग: मसूरी में MDDA के अनोखे विकास कार्य पर बवाल
मसूरी-देहरादून मुख्य मार्ग और शहर के प्रमुख आंतरिक सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर MDDA की ओर से रेलिंग लगाने का काम तेजी से चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिन स्थानों पर लोक निर्माण विभाग (PWD) या अन्य एजेंसियों द्वारा पूर्व में ही कंक्रीट और स्टील के मजबूत सेफ्टी क्रैश बैरियर स्थापित किए जा चुके थे, उन्हीं क्रैश बैरियरों के ठीक ऊपर या उनसे सटाकर अब दोबारा लोहे की रेलिंग ठोकी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्रैश बैरियर पहले से ही सक्षम और सही सलामत अवस्था में मौजूद हैं, तो फिर दोबारा नई रेलिंग लगाने का कोई तार्किक औचित्य समझ नहीं आता।
#1. ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने और सरकारी बजट खपाने का आरोप: निवासियों का गुस्सा फूटा
मसूरी के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों का आरोप है कि प्राधिकरण के अधिकारी और ठेकेदार मिलकर केवल सरकारी बजट को खपाने की होड़ में लगे हैं। सड़कों के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा के नाम पर जारी किए गए वित्तीय फंड का इस्तेमाल बिना किसी ठोस योजना के किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां वास्तव में सड़कें खतरनाक हैं और सुरक्षा उपायों की तत्काल जरूरत है, वहां कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके विपरीत, जहां पहले से पुख्ता इंतजाम मौजूद हैं, वहां बार-बार नए टेंडर निकालकर फिजूलखर्ची की जा रही है। इस दोहरे निर्माण से न केवल सड़क की चौड़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि पैदल चलने वाले पर्यटकों के लिए भी असुविधा पैदा हो रही है।
#1. प्राकृतिक सुंदरता और पर्वतीय पर्यावरण पर असर: क्या वाकई जरूरी है यह निर्माण?
मसूरी अपनी नैसर्गिक सुंदरता और विहंगम प्राकृतिक दृश्यों के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। लगातार अनियोजित और अनावश्यक कंक्रीट व लोहे के निर्माण कार्यों से पहाड़ों के प्राकृतिक स्वरूप को भी नुकसान पहुंच रहा है। पर्यावरणविदों और स्थानीय दुकानदारों का मानना है कि अनावश्यक रूप से लगाई जा रही यह रेलिंग हादसों को रोकने में कोई नया योगदान नहीं देने वाली है। अगर कोई वाहन अनियंत्रित होता है तो मजबूत क्रैश बैरियर ही उसे रोकने का काम करता है, जबकि हल्की रेलिंग तो केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह जाती है। ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर सिर्फ टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की जल्दबाजी पर कई प्रशासनिक सवाल खड़े हो रहे हैं।
#1. उच्च स्तरीय जांच और बजट की समीक्षा की उठने लगी मांग
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद मसूरी के नागरिक संगठनों ने मुख्यमंत्री कार्यालय, शहरी विकास मंत्रालय और उच्च अधिकारियों से इस निर्माण कार्य की तत्काल निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। निवासियों की स्पष्ट मांग है कि मसूरी में MDDA द्वारा चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट के वित्तीय विवरण, स्वीकृति की शर्तों और तकनीकी उपयोगिता की गहनता से समीक्षा की जाए। यदि जांच में यह साबित होता है कि पहले से सुरक्षित स्थानों पर जबरन रेलिंग लगाकर बजट की बर्बादी की गई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में जनता के टैक्स के पैसों की इस प्रकार की बर्बादी को रोका जा सके।