उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनते ही शुरू होगी 'घर-कुड़ी पेंशन योजना

उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनते ही शुरू होगी 'घर-कुड़ी पेंशन योजना

उत्तराखंड की राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है, और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी दलों ने जनता को रिझाने के लिए अपने तरकश से नए-नए तीर छोड़ने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में पहाड़ी राज्य के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक बेहद लोकलुभावन और बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि आने वाले समय में उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनती है, तो राज्य में हर घर और हर परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करने के वास्ते 'घर-कुड़ी पेंशन योजना' का शानदार आगाज किया जाएगा। उनके इस ताजा बयान के बाद से सूबे के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और विपक्षी दल भी इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देने लगे हैं।

#1. हरीश रावत का जनता से सीधा वादा: 2027 के चुनावों से पहले 'घर-कुड़ी पेंशन योजना' का शंखनाद

राजधानी देहरादून से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही संगठनात्मक बैठकों और रणनीतिक मंथन के बीच पूर्व सीएम हरीश रावत ने जनता के बीच जाकर एक कड़ा संदेश दिया है। एक जनसभा और कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जोश के साथ घोषणा की कि उत्तराखंड की मातृशक्ति, बुजुर्गों और जरूरतमंद परिवारों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए उनकी पार्टी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चुनावी जुमला नहीं, बल्कि 'हरीश रावत का पक्का वादा' है कि जैसे ही राज्य में कांग्रेस की सरकार सत्ता में वापसी करेगी, सबसे पहले 'घर-कुड़ी पेंशन योजना' को धरातल पर उतारा जाएगा। इस घोषणा के जरिए पार्टी ने ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के हर घर तक अपनी पहुंच बनाने की ठोस रणनीति तैयार कर ली है।

#1. दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की बैठक और चुनावी तैयारियों को रफ्तार

गौरतलब है कि एक तरफ जहां राज्य के नेता जनता के बीच जाकर लुभावने वादे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, उत्तराखंड मामलों की प्रभारी कुमारी सैलजा और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से इस बात पर मंथन किया गया कि किस प्रकार राज्य की वर्तमान सरकार की नाकामियों को जन-जन तक पहुंचाया जाए और एक एकजुट विपक्ष के रूप में जनता के सामने मजबूत विकल्प रखा जाए।

#1. बीजेपी की 'डबल-इंजन' सरकार पर कांग्रेस का करारा हमला, जनता से बदलाव की अपील

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मौजूदा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य की जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को केवल धोखा ही मिला है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार चरमरा रही है, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और सत्ता का अहंकार इस हद तक बढ़ चुका है कि जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी यह बात दोहराई कि उत्तराखंड की आम जनता अब व्यवस्था में पूर्ण जवाबदेही चाहती है और बदलाव का मन बना चुकी है। पार्टी का दावा है कि उनके नेता सड़क से लेकर विधानसभा तक जनता के बुनियादी अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत के साथ लड़ रहे हैं।

#1. पहाड़ी अंचलों में पेंशन योजनाओं का सियासी असर और भविष्य की राह

उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज के जिलों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का राजनीतिक प्रभाव हमेशा से बहुत बड़ा रहा है। पर्वतीय इलाकों में आजीविका के सीमित साधन होने के कारण पेंशन और आर्थिक सहायता जैसी योजनाएं सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करती हैं। ऐसे में हरीश रावत द्वारा लाई गई 'घर-कुड़ी पेंशन योजना' की परिकल्पना को चुनावी वैतरणी पार करने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। हालांकि, यह तो वक्त ही बताएगा कि जनता इस वादे पर कितना भरोसा करती है, लेकिन इतना तय है कि इस ऐलान ने आगामी चुनावी रण को बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण बना दिया है।