पिता की डांट से नाराज होकर हरिद्वार से अकेली ट्रेन पकड़ चंदौली पहुंची मासूम बच्ची

पिता की डांट से नाराज होकर हरिद्वार से अकेली ट्रेन पकड़ चंदौली पहुंची मासूम बच्ची

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसी राहत भरी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता को बच्चों के प्रति समझदारी और संवेदनशीलता बरतने का बड़ा संदेश दिया है। उत्तराखंड के हरिद्वार में पिता द्वारा किसी बात पर लगाई गई मामूली डांट से आहत होकर एक मासूम बालिका चुपचाप घर से निकल गई और अकेले ट्रेन में बैठकर सैकड़ों किलोमीटर दूर चंदौली जिले के डीडीयू जंक्शन (पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर) पहुंच गई। अनजान शहर में अकेले और सहमी हुई घूम रही बच्ची पर जब जीआरपी और उत्तर प्रदेश शासन की विशेष 'मिशन शक्ति' (Mission Shakti) टीम की नजर पड़ी, तो उन्होंने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की। पुलिस टीम ने बच्ची को सुरक्षित अपनी हिरासत में लिया, उसे ढांढस बंधाया और उसके परिजनों से संपर्क कर एक बड़े हादसे को टाल दिया।

#1 हरिद्वार से चंदौली तक का खौफनाक सफर और मिशन शक्ति टीम की सतर्कता

घटनाक्रम के अनुसार, हरिद्वार की रहने वाली यह नाबालिग बालिका घर में पिता की डांट के बाद बेहद भावुक और नाराज हो गई थी। बिना सोच-विचार किए वह घर से निकली और हरिद्वार रेलवे स्टेशन से पूर्वा एक्सप्रेस में सवार हो गई। सैकड़ों किलोमीटर का जोखिम भरा सफर तय करके जब ट्रेन चंदौली के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रुकी, तो बच्ची घबराई हुई हालत में प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर भटकने लगी। इसी दौरान रेलवे स्टेशन पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए तैनात मिशन शक्ति और जीआरपी (GRP) की संयुक्त टीम ने उस अकेली घूम रही बच्ची को देखा। संदिग्ध स्थिति और बच्ची के चेहरे पर डर देखकर महिला पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसके पास जाकर प्यार से बात की। सुरक्षा टीम ने उसे सुरक्षित स्थान पर बैठाया, पानी पिलाया और जब उसका भरोसा जीता, तो बच्ची ने रोते हुए अपने साथ हुई पूरी आपबीती और हरिद्वार से अकेले आने की बात बताई।

#1 चाइल्ड हेल्पलाइन को सुपुर्दगी और रोते हुए परिजनों से कराया संपर्क

मासूम बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद मिशन शक्ति की टीम ने तुरंत उच्च अधिकारियों और बाल कल्याण समिति (CWC) व चाइल्ड हेल्पलाइन को इस मामले की जानकारी दी। जीआरपी और मिशन शक्ति कर्मियों ने बच्ची द्वारा बताए गए फोन नंबरों के आधार पर हरिद्वार में रह रहे उसके परिजनों से सीधा संपर्क साधा। उधर, हरिद्वार में बेटी के अचानक घर से गायब हो जाने के बाद से बदहवास परिजन उसकी हर जगह तलाश कर रहे थे और रो-रोकर बुरा हाल था। जैसे ही उन्हें चंदौली पुलिस का फोन आया और यह सूचना मिली कि उनकी बेटी बिल्कुल सुरक्षित है और जीआरपी की देखरेख में है, तो परिजनों की सांस में सांस आई। परिजनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस और मिशन शक्ति टीम की इस तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय कार्य के लिए उनका बार-बार आभार जताया।

#1 उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति का बढ़ता प्रभाव और बच्चों की सुरक्षा की मिसाल

चंदौली में घटित यह घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में चलाया जा रहा 'मिशन शक्ति' अभियान किस प्रकार जमीन पर उतरकर महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रहा है। बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर तैनात मिशन शक्ति की टीमें हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखती हैं। यदि इस मामले में जीआरपी और मिशन शक्ति की टीम समय रहते सक्रियता न दिखाती, तो अनजान जंक्शन पर उतरी यह मासूम बालिका किसी आपराधिक गिरोह या असामाजिक तत्वों का शिकार बन सकती थी। बाल कल्याण समिति की कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद बालिका को उसके परिजनों के सुपुर्द करने की कागजी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

#1 माता-पिता के लिए सबक: बच्चों के साथ संवाद और भावनात्मक समझ है जरूरी

यह पूरा मामला आज के दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच घटते संवाद पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोरावस्था और बचपन के दौरान बच्चे बेहद संवेदनशील और भावुक होते हैं। ऐसे में बात-बात पर उन्हें डांटने या फटकारने के बजाय उनके साथ दोस्तों जैसा व्यवहार करना चाहिए। यदि घर में किसी बात को लेकर असहमति है, तो उसे प्यार से समझाना चाहिए ताकि बच्चा तनाव में आकर ऐसा कोई खतरनाक कदम न उठा ले। चंदौली पुलिस की सजगता से जहां एक मासूम बच्ची अपने परिवार से दोबारा मिल सकी, वहीं यह घटना समाज के हर परिवार को बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने और उनके साथ मजबूत संवाद स्थापित करने की सीख देती है।