उत्तराखंड में किसका टिकट कटेगा और किसे मिलेगा मौका, BJP ने बना दिए नियम
आगामी विधानसभा चुनावों में जीत की लय बरकरार रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। सत्ता की हैट्रिक का सपना देख रही पार्टी इस बार जमीनी कार्यकर्ताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने जा रही है। उम्मीदवारों के चयन में अब दिल्ली या देहरादून से ज्यादा स्थानीय मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों की आवाज सुनी जाएगी। जो विधायक जनता और संगठन दोनों से कटे हुए हैं उनके टिकट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
विधायकों के रिपोर्ट कार्ड के तीन पैमाने
BJP ने किसी भी नेता को टिकट देने से पहले तीन कड़े मानक तय कर दिए हैं। पहला- नेता की जनता के बीच लोकप्रियता कितनी है। दूसरा- जमीनी कार्यकर्ताओं में नेता के प्रति नाराजगी या असंतोष का स्तर क्या है। तीसरा- संबंधित विधानसभा क्षेत्र के जमीनी समीकरण और वहां मौजूद अन्य मजबूत दावेदार। जिन विधायकों का रिपोर्ट कार्ड इन तीन पैमानों पर कमजोर मिलेगा उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है। वर्तमान में 70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 47 और कांग्रेस के पास 20 सीटें हैं।
बूथ स्तर पर तैयारी और युवाओं की मांग
पार्टी ने साफ कर दिया है कि चुनाव जीतने के लिए बूथ कमेटियों को मजबूत करना होगा। रविवार को चोरगलिया में कुमाऊं मंडल के अध्यक्षों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इसी बात पर जोर दिया। इससे पहले 9 अगस्त को गढ़वाल मंडल की भी ऐसी ही बैठक हो चुकी है। इन बैठकों में सरकारी योजनाओं को हर घर तक पहुंचाने और नए मतदाताओं को जोड़ने का टास्क दिया गया है। पार्टी के भीतर से धारचूला और अल्मोड़ा जैसी सीटों पर नए और युवा चेहरों को मौका देने की मांग भी उठने लगी है। लोहाघाट, सल्ट और जागेश्वर में भी दमदार प्रत्याशियों को उतारने पर जोर दिया जा रहा है।
कुमाऊं में कांग्रेस को रोकने का मास्टर प्लान
तराई और कुमाऊं का इलाका भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। 2022 के चुनावों में कुमाऊं की 29 सीटों में से 18 भाजपा और 11 कांग्रेस ने जीती थीं। ऊधमसिंह नगर की 9 सीटों में से कांग्रेस ने 5 पर कब्जा किया था जबकि भाजपा 4 पर ही सिमट गई थी। पार्टी का मुख्य लक्ष्य इस बार ऊधमसिंह नगर में कांग्रेस के दबदबे को खत्म करना है। खटीमा, किच्छा, नानकमत्ता, बाजपुर और जसपुर सीटों को जीतने के लिए विशेष रणनीति बनाई जा रही है। दूसरी ओर नैनीताल जिले की 6 में से अपनी 5 जीती हुई सीटों को बचाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है।
संगठन और सरकार मिलकर करेंगे काम
भाजपा आलाकमान ने सभी 117 मंडल अध्यक्षों और 8 जिलाध्यक्षों से बूथों की असल स्थिति पर फीडबैक लिया है। बारिश में टूटी सड़कों से लेकर रामलीला मैदान विवाद तक हर मुद्दे पर मंथन हुआ है ताकि विपक्ष को हावी होने से रोका जा सके। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि समस्याओं को सुलझाने के लिए जिलाध्यक्षों को पावर दी गई है। विधायकों और मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहें और जनता के हर सवाल का जवाब दें।