पाकिस्तान को छोटे टुकड़ों में बांटने की खतरनाक चाल? आर्मी चीफ असीम मुनीर का मास्टरप्लान
पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर से एक बेहद खतरनाक और विस्फोटक दौर से गुजर रहा है, जहां देश की आंतरिक राजनीति, लचर अर्थव्यवस्था और सैन्य तनातनी ने एक नया संकट पैदा कर दिया है। पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या देश की सेना के मौजूदा सर्वेसर्वा और ताकतवर आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर देश को एक नई दिशा देने के नाम पर कोई बहुत बड़ा और खतरनाक खेल खेलने की तैयारी कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में लेने और अपने कार्यकाल को अमर बनाने के लिए सेना प्रमुख एक ऐसे गेम प्लान पर काम कर रहे हैं, जिससे देश की आंतरिक एकता और अखंडता पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े हो सकते हैं।
जनरल असीम मुनीर का कथित गेम प्लान और आधिपत्य
पाकिस्तान के इतिहास में यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी सेना प्रमुख ने देश की चुनी हुई सरकारों को कठपुतली बनाकर खुद को असली शासक साबित करने की कोशिश की हो, लेकिन मौजूदा हालात पिछले कई दशकों के मुकाबले काफी ज्यादा डरावने बताए जा रहे हैं। जानकारों के अनुसार, जनरल असीम मुनीर का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की तमाम संवैधानिक संस्थाओं, न्यायपालिका और प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेना है ताकि सेना के खिलाफ उठने वाली हर एक आवाज को हमेशा के लिए दबाया जा सके। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और उनके समर्थकों पर लगातार कसता जा रहा शिकंजा इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है, जहां सेना किसी भी कीमत पर विपक्ष का नामोनिशान मिटा देना चाहती है।
क्या पाकिस्तान के भीतर पनप रहा है विघटन का खतरा
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे के बीच सबसे बड़ी चिंता यह जताई जा रही है कि क्या सेना की अति-केंद्रीकृत नीतियों और बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा तथा सिंध जैसे प्रांतों में बढ़ते अलगाववादी एवं असंतोष के दौर में पाकिस्तान खुद अपने ही बोझ तले बिखर जाएगा। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जब एक देश की सेना अपनी ही जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलकर केवल अपने प्रभाव और वर्चस्व को बढ़ाने में जुट जाती है, तो देश के भीतर क्षेत्रीय विद्रोही ताकतें मजबूत होने लगती हैं। असीम मुनीर की तानाशाही कार्यशैली और आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के प्रांतों में जिस तरह का आक्रोश पनप रहा है, उससे यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में पाकिस्तान कई छोटे-छोटे हिस्सों या स्वायत्त क्षेत्रों में विभाजित हो सकता है, जिसका पूरा ठीकरा सेना की गलत नीतियों पर फूटेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की गिरती साख और भविष्य
पाकिस्तान की इस अंदरूनी उथल-पुथल का असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति पर इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। अमेरिका, चीन और सऊदी जैसे देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन साधने में जुटी पाकिस्तानी सेना खुद देश के भीतर गंभीर आंतरिक विरोधाभासों से घिर चुकी है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज के सहारे देश की अर्थव्यवस्था किसी तरह वेंटिलेटर पर चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सेना प्रमुख द्वारा देश के राजनीतिक तंत्र को पूरी तरह से हाईजैक करने की कोशिशों ने देश को दिवालियापन के साथ-साथ गृहयुद्ध जैसी स्थिति के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि असीम मुनीर का यह कथित बड़ा खेल पाकिस्तान को एक मजबूत सैन्य राष्ट्र बना पाता है या फिर इस देश के टुकड़ों-टुकड़ों में बंटने की इबारत लिख देता है।