अमेरिका में हिजाब पहनने वाली अबर कवास ने जीती न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट की सीट
अमेरिकी राजनीति के इतिहास में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा राजनीतिक मोड़ देखने को मिला है। न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट के हालिया चुनाव नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रगतिशील उम्मीदवार अबर कवास (Aber Kawas) ने बंपर मतों से शानदार जीत हासिल करके इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही अबर कवास न्यूयॉर्क स्टेट लेजिस्लेचर (विधानमंडल) के लिए चुनी जाने वाली पहली हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला और पहली फलस्तीनी-अमेरिकी राजनेता बन गई हैं। न्यूयॉर्क के डिस्ट्रिक्ट 12 (क्वींस इलाका) से चुनावी मैदान में उतरीं अबर कवास को 75 फीसदी से भी अधिक रिकॉर्ड वोट मिले। उनकी इस अनूठी और अभूतपूर्व सफलता को अमेरिका के राजनीतिक परिदृश्य में विविधता, मानवाधिकार, मुस्लिम प्रतिनिधित्व और समावेशिता की एक बड़ी तथा दूरगामी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।
क्वींस डिस्ट्रिक्ट 12 से मिली एकतरफा जीत और वोटों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
अबर कवास ने न्यू यॉर्क स्टेट सीनेट सीट के लिए हुए मतदान में अपने प्रतिद्वंद्वियों को भारी अंतर से पटखनी दी है। मतों की गिनती पूरी होने के साथ ही यह साफ हो गया कि क्वींस और आसपास के कामकाजी व बहुसांस्कृतिक समुदायों ने कवास के नेतृत्व और विजन पर अटूट विश्वास जताया है। कवास को अमेरिका के वामपंथी और प्रगतिशील गुटों, बर्नी सैंडर्स, रशीदा तलाएब और न्यूयॉर्क शहर के युवा नेतृत्व का भरपूर समर्थन प्राप्त था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, उन्हें लगभग 75 प्रतिशत से अधिक एकतरफा जनादेश हासिल हुआ। अपनी इस ऐतिहासिक जीत की आधिकारिक घोषणा के बाद अबर कवास ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल उनकी एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह उन तमाम हाशिए पर मौजूद समुदायों, आप्रवासियों, मजदूरी करने वाले परिवारों और न्याय की आवाज उठाने वाले नागरिकों की साझा जीत है।
#1. व्यक्तिगत संघर्ष से मिली प्रेरणा: पिता के निर्वासन ने बदली जिंदगी की राह
अबर कवास का यह राजनीतिक सफर किसी परियों की कहानी जैसा नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे एक बेहद दर्दनाक और संघर्षपूर्ण पारिवारिक इतिहास छिपा हुआ है। न्यूयॉर्क में पली-बढ़ीं अबर जब हाई स्कूल की पढ़ाई कर रही थीं, तब उनके पिता को अमेरिकी अप्रवासन अधिकारियों द्वारा हिरासत में लेकर देश से निर्वासित (Deport) कर दिया गया था। पिता के अचानक अचानक परिवार से अलग हो जाने के कारण अबर और उनके भाई-बहनों को बेहद कम उम्र में ही गंभीर आर्थिक और मानसिक संकटों का सामना करना पड़ा। परिवार का खर्च चलाने और मां की मदद करने के लिए सभी भाई-बहनों को छोटी उम्र में ही काम करना शुरू करना पड़ा। इसी कड़वे और कठिन व्यक्तिगत अनुभव ने अबर कवास को सामाजिक न्याय, अप्रवासी अधिकारों, पुलिस व्यवस्था में सुधार और न्यायपूर्ण कानूनी नीतियों की लड़ाई में अग्रिम पंक्ति का नेता बना दिया।
#1. मुख्य चुनावी एजेंडा: किफायती आवास, जलवायु न्याय और मानवाधिकारों की वकालत
अबर कवास ने अपने पूरे चुनाव प्रचार अभियान के दौरान जमीनी और जनहित से जुड़े मुद्दों को ही अपना मुख्य राजनीतिक हथियार बनाया। उन्होंने न्यूयॉर्क में तेजी से बढ़ती महंगाई, अत्यधिक मकान किराए और किफायती आवास (Affordable Housing) की कमी को दूर करने का मजबूत वादा किया है। इसके अलावा, उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सभी नागरिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की गारंटी देने, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के लिए ठोस नीतियां बनाने और कामकाजी वर्ग के वेतन में बढ़ोतरी जैसे अहम जनहितकारी मुद्दों पर जोर दिया है। इसके साथ ही, अबर कवास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के खिलाफ 'नो मनी फॉर वॉर' (No Money for War) और फिलिस्तीनी मानवाधिकारों (Palestinian Human Rights) की निष्पक्ष वकालत करने के लिए भी जानी जाती हैं।
#1. अमेरिका में मुस्लिम व आप्रवासी प्रतिनिधित्व का नया दौर और वैश्विक प्रतिक्रिया
अबर कवास की इस अभूतपूर्व जीत को अमेरिका में तेजी से बदलती सामाजिक और राजनीतिक सोच का एक स्पष्ट प्रतीक माना जा रहा है। हिजाब पहनकर सर्वोच्च राज्य नीति-निर्माता संस्था (State Senate) में पहुंचने की उनकी यह उपलब्धि दुनिया भर की मुस्लिम महिलाओं और आप्रवासी समुदायों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनी है। विश्लेषकों का मानना है कि उनकी यह ऐतिहासिक जीत अमेरिका में बढ़ते इस्लामोफोबिया और रूढ़िवादी ताकतों को जनमत के जरिए दिया गया एक करारा जवाब है। अमेरिका में रहने वाले दक्षिण एशियाई, अरब और अप्रवासी संगठनों ने अबर कवास को बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि वे न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट में हाशिए के वर्गों, अल्पसंख्यकों और श्रमजीवी वर्ग की एक बेहद निर्भीक, पारदर्शी और सशक्त आवाज साबित होंगी।