महायुद्ध की शुरुआत, ईरान का इजरायल पर भीषण मिसाइल हमला, बेरूत पर बमबारी का लिया बदला
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) से इस वक्त की सबसे बड़ी और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। लंबे समय से सुलग रही बारूद की ढेरी में आखिरकार विस्फोट हो गया है। ईरान ने इजरायल पर सीधा और बड़ा सैन्य हमला करते हुए ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग दी हैं। इजरायली रक्षा बलों ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि अप्रैल की शुरुआत में हुए नाजुक युद्धविराम के बाद यह पहला मौका है जब ईरान ने सीधे तौर पर इजरायल की मुख्य भूमि को निशाना बनाया है। इस भीषण हमले के बाद दोनों देशों के बीच पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू होने के आसार बन गए हैं, जिसने वैश्विक शांति और अमेरिका की मध्यस्थता में चल रहे शांति समझौतों को पूरी तरह खटाई में डाल दिया है।
बेरूत पर इजरायली एयरस्ट्राइक का बदला, ईरान ने पहले ही दी थी पूर्ण युद्ध की चेतावनी
इस महाविनाशक हमले की पटकथा रविवार को उस वक्त लिखी गई जब इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में एक बहुमंजिला आवासीय इमारत पर घातक हवाई हमला (एयरस्ट्राइक) कर दिया था। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में दो निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। तेहरान (ईरान) ने इस हमले के तुरंत बाद इजरायल को भुगतने की खुली चेतावनी दी थी। ईरान का साफ कहना था कि बेरूत पर किया गया यह दुस्साहस पूरे पश्चिम एशिया में भीषण और विनाशकारी युद्ध की आग को दोबारा भड़का देगा, और हुआ भी यही। ईरान ने अपनी चेतावनी के चंद घंटों बाद ही इजरायल पर मिसाइलों की बरसात कर दी।
हिजबुल्ला के 'कमांड सेंटर' पर हमले का नेतन्याहू ने किया था दावा, सीजफायर हुआ तार-तार
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेरूत पर किए गए हमले का बचाव करते हुए अपनी कैबिनेट को बताया था कि यह कार्रवाई ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला द्वारा उत्तरी इजरायल पर की गई गोलीबारी के जवाब में की गई थी। नेतन्याहू ने दावा किया था कि इजरायली वायुसेना ने बेरूत में हिजबुल्ला के मुख्य 'कमांड सेंटर' को पूरी तरह तबाह कर दिया है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा था कि "हम दुश्मनों पर लगातार कड़ा प्रहार कर रहे हैं और हिजबुल्ला मैदान छोड़कर भाग रहा है।" हालांकि, हिजबुल्ला ने इन हमलों की तत्काल जिम्मेदारी नहीं ली थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह बमबारी अमेरिका की देखरेख में लेबनान और इजरायल के बीच हुए संघर्षविराम समझौते के लागू होने के महज कुछ दिन बाद ही कर दी गई, जिसे हिजबुल्ला ने पहले ही मानने से इनकार कर दिया था।
अमेरिका की बड़ी शर्त: लेबनान में भी खत्म हो संघर्ष, तभी थमेगी जंग
ईरान इस पूरे विवाद में बेहद कड़ा रुख अपनाए हुए है। ईरान रणनीतिक रूप से चाहता है कि अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए जो भी त्रिपक्षीय या द्विपक्षीय समझौता हो, उसमें लेबनान में जारी संघर्ष को पूरी तरह से रोकने की अनिवार्य शर्त को शामिल किया जाए। ईरान का मानना है कि जब तक लेबनान और हिजबुल्ला पर इजरायली हमले पूरी तरह नहीं रुकते, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति की कल्पना करना बेमानी है। ईरान के इस अड़ियल रुख और ताजा मिसाइल अटैक ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों और राजनयिकों के प्रयासों को पूरी तरह उलझा दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का 'मिशन पीस', नेतन्याहू पर बनाया जवाबी कार्रवाई न करने का दबाव
ईरान के इस बड़े मिसाइल अटैक के बाद सुपरपावर अमेरिका तुरंत एक्टिव हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाजुक स्थिति पर चिंता जताते हुए एक बड़ा बयान दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि वह इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू पर इस बात के लिए कड़ा दबाव बनाएंगे कि इजरायल अब ईरान के इस हमले का कोई पलटवार या सैन्य जवाब न दे। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अगर इजरायल ने दोबारा जवाबी कार्रवाई की, तो इससे अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रहे बेहद महत्वपूर्ण समझौतों पर पानी फिर जाएगा। सूत्रों के हवाले से खबर है कि ट्रंप ने नेतन्याहू से दो टूक कह दिया है कि दोनों पक्षों की तरफ से हमले हो चुके हैं, इसलिए अब इस तनाव को यहीं रोक दिया जाए और इसे आगे न बढ़ाया जाए।