भूटान ने 9 घंटे में तैयार किए 108 बौद्ध स्तूप, एक PM मोदी को समर्पित

भूटान ने 9 घंटे में तैयार किए 108 बौद्ध स्तूप, एक PM मोदी को समर्पित

भारत के सबसे भरोसेमंद और मित्र पड़ोसी देश भूटान ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच बने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भूटान में भारत की सीमा से सटे क्षेत्र में विकसित किए जा रहे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' (Gelephu Mindfulness City) के प्रांगण में रिकॉर्ड 9 घंटों के भीतर 108 पवित्र बौद्ध स्तूपों (जांगचुप चोर्तेन) का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। इस आध्यात्मिक आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक के दिशा-निर्देश में इनमें से 76वें नंबर का स्तूप (Stupa No. 76) विशेष रूप से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया गया है।

9 घंटे में 108 बौद्ध स्तूपों का निर्माण: भूटान का एतिहासिक आध्यात्मिक कीर्तिमान

भूटान के गेलेफू शहर में आयोजित इस भव्य और अनूठे अनुष्ठान की शुरुआत सुबह तड़के पारंपरिक बौद्ध प्रार्थनाओं के साथ हुई। हजारों बौद्ध भिक्षुओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर एक साथ 108 स्तूपों के निर्माण की जिम्मेदारी संभाली और महज 9 घंटे के भीतर इस आध्यात्मिक महाप्रोजेक्ट को पूरा कर दिखाया। यह आयोजन बौद्ध धर्म में विशेष महत्व रखने वाले पावन पर्व 'ल्हाबाब दूचेन' और भूटान नरेश के 18वें राज्याभिषेक दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित हुआ। स्तूपों की स्थापना के दौरान भारत से जुड़ीं पवित्र भगवान बुद्ध की अस्थियों के अवशेष (Relics) भी इनमें प्रतिष्ठित किए गए, जो दोनों देशों के बीच प्राचीन धार्मिक और बौद्ध साझा विरासत को नई मजबूती प्रदान करते हैं।

76वां स्तूप पीएम नरेंद्र मोदी को समर्पित, भारत-भूटान दोस्ती की अटूट मिसाल

भूटान सरकार और भूटान नरेश ने इस आध्यात्मिक अभियान के दौरान 76वें स्तूप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम समर्पित करके अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक बेहद भावुक और कूटनीतिक संदेश दिया है। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू विशेष रूप से भूटान के गेलेफू में मौजूद रहे। भूटान नरेश ने इस अवसर पर कहा कि यह कदम भारत द्वारा 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' के निर्माण और भूटान की विकास यात्रा में दिए गए अटूट, निरंतर और निःस्वार्थ समर्थन के सम्मान स्वरूप उठाया गया है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भूटान के इस कदम को भारत देश और प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक अत्यंत गर्व और सम्मान का विषय बताया है।

भारत सीमा पर बन रहा 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी': क्या है भूटान का यह ड्रीम प्रोजेक्ट?

असम और भारत की सीमा से ठीक सटा गेलेफू क्षेत्र आज एक नया वैश्विक आकर्षण केंद्र बन रहा है। भूटान नरेश का ड्रीम प्रोजेक्ट 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' (GMC) लगभग 2,500 वर्ग किलोमीटर में फैला एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (SAR) है, जो आकार में सिंगापुर से भी तीन गुना बड़ा है। यह शहर आधुनिक आर्थिक विकास और पारंपरिक बौद्ध आध्यात्मिक मूल्यों का एक अनूठा सम्मिश्रण होने जा रहा है। इस हरित, पर्यावरण-अनुकूल और कार्बन-नेगेटिव शहर में अत्याधुनिक तकनीक, डिजिटल एसेट्स, स्वास्थ्य, योग, शिक्षा, और सतत ऊर्जा से जुड़े वैश्विक उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (खासकर असम) के साथ सीधी कनेक्टिविटी होने की वजह से यह शहर भविष्य में दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच व्यापार का एक मुख्य हब बनने वाला है।

दक्षिण एशिया में शांति, अध्यात्म और विकास की नई इबारत

भूटान में 108 स्तूपों की simultaneous स्थापना दरअसल गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी की आध्यात्मिक नींव के रूप में देखी जा रही है। भूटान का मानना है कि भौतिक विकास तब तक अधूरा है, जब तक उसमें मानसिक शांति और आध्यात्मिक चेतना का समावेश न हो। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया क्षेत्रीय संघर्षों और भू-राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रही है, भारत और भूटान की यह साझेदारी विश्व को शांति, सहअस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का एक नया रास्ता दिखा रही है। इस परियोजना के गति पकड़ने से पूर्वोत्तर भारत में भी रोजगार, पर्यटन और आर्थिक विकास के नए द्वार खुलेंगे, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के रणनीतिक और सांस्कृतिक रिश्ते एक नए स्वर्ण युग में प्रवेश करेंगे।