नाइजीरिया के सोकोतो में बड़ा हादसा: नदी में नाव डूबने से 47 से अधिक लोगों की मौत, मची चीख-पुकार

नाइजीरिया के सोकोतो में बड़ा हादसा: नदी में नाव डूबने से 47 से अधिक लोगों की मौत, मची चीख-पुकार

नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी सोकोतो राज्य में एक बड़ा दर्दनाक हादसा पेश आया है, जहां एक खगोलीय और जलमार्ग दुर्घटना में कम से कम 47 लोगों की जान चली गई। स्थानीय अधिकारियों और चश्मदीदों के मुताबिक, यह हादसा तब हुआ जब क्षमता से अधिक लोगों को ले जा रही एक लकड़ी की नाव अचानक बीच नदी में पलट गई। इस वीभत्स दुर्घटना के बाद से इलाके में कोहराम मचा हुआ है और हर तरफ मातम का माहौल है, क्योंकि इस हादसे में जान गंवाने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और मासूम बच्चे शामिल हैं।

खेतों पर काम करने जा रहे मजदूरों से भरी थी नाव

मिली जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना सोकोतो राज्य के गोरन्यो स्थानीय सरकार के अंतर्गत आने वाले गोरौ (Gorau) शहर के पास एक नदी में हुई। नाव पर क्षमता से कहीं अधिक यानी करीब 70 से 80 से ज्यादा लोग सवार थे। ये सभी लोग स्थानीय खेतों में काम करने और फसल कटाई के सिलसिले में मजदूरी के लिए जा रहे थे। बारिश के मौसम में नदी का तेज बहाव और नाव का ओवरलोडेड होना इस बड़ी तबाही का मुख्य कारण बना, जिससे देखते ही देखते पूरी नाव पानी में समा गई।

बचाव कार्य और अब तक बरामद हुए शव

घटना की सूचना मिलते ही नेशनल इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी (NIWA) और स्थानीय आपातकालीन राहत प्रबंधन एजेंसियों की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। स्थानीय गोताखोरों और बचाव कर्मियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अब तक कम से कम 47 शवों को पानी से बाहर निकाला जा चुका है, जबकि कुछ लोगों को सुरक्षित बचा भी लिया गया है। स्थानीय मस्जिदों के प्रांगण में एक साथ कई शवों को रखकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी और मानसून सीजन का खतरा

नाइजीरिया में इस तरह की नौका दुर्घटनाएं बेहद आम हो गई हैं, खासकर बरसात के मौसम में। देश के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी जलमार्गों पर सफर करने के लिए सुरक्षा मानकों का बिल्कुल पालन नहीं किया जाता है। पुरानी और खस्ताहाल नावें बिना लाइफ जैकेट के धड़ल्ले से चलाई जाती हैं और क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जाता है। प्रशासन की तरफ से सख्त नियम न होने के कारण गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को अक्सर ऐसे हादसों का शिकार होना पड़ता है, जिससे एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।