भारत में जश्न, पाकिस्तान में मातम! SCO और BRICS में चीन ने लगाई शहबाज-मुनीर की क्लास

भारत में जश्न, पाकिस्तान में मातम! SCO और BRICS में चीन ने लगाई शहबाज-मुनीर की क्लास

वैश्विक कूटनीति के पन्नों पर इस वक्त एक ऐसा सनसनीखेज और बड़ा भूचाल आया है, जिसने भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की नींद उड़ाकर रख दी है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मंचों पर इस्लामाबाद को जो अपमानजनक और करारी शिकस्त मिली है, उसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि दुनिया भर में पाकिस्तान का वजूद और उसकी साख तेजी से रसातल में जा रही है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ब्रिक्स (BRICS) जैसे दुनिया के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय समूहों की बैठकों में जो कुछ भी हुआ, उसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की जोड़ी को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते आर्थिक और कूटनीतिक रसूख के कारण पूरे देश में उत्सव का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ इस्लामाबाद के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है और पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी इस फजीहत पर बुरी तरह छटपटा रहे हैं।

SCO शिखर सम्मेलन में चीन द्वारा पाकिस्तान की दो टूक लताड़ और कूटनीतिक झटका

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच पर जो ड्रामा देखने को मिला, उसने चीन और पाकिस्तान की तथाकथित 'गहरी दोस्ती' के दावों की पोल खोल दी है। दशकों से खुद को चीन का सबसे भरोसेमंद और पक्का सहयोगी बताने वाले पाकिस्तान को तब करारा झटका लगा जब खुद बीजिंग के शीर्ष नेतृत्व ने एससीओ की बैठक के दौरान पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था, आंतरिक अशांति और आतंकवाद को लेकर उसे सार्वजनिक रूप से खरी-खोटी सुनाई। चीनी अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि पाकिस्तान अपने आंतरिक सुरक्षा संकट और प्रशासनिक विफलताओं का बोझ क्षेत्रीय मंचों पर नहीं डाल सकता। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन अब पाकिस्तान के लगातार हाथ फैलाए रखने और उसकी आर्थिक नाकाबंदी से तंग आ चुका है, यही वजह है कि अब वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान की पीठ थपथपाने से कतराने लगा है और उसे खरी खरी सुना रहा है।

BRICS में एंट्री की उम्मीदें पूरी तरह ध्वस्त, दरवाजे बंद होने से बिलबिलाए शहबाज और मुनीर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने इस साल ब्रिक्स (BRICS) समूह में शामिल होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि उनके मित्र देश चीन और अन्य सहयोगी उनकी इस मांग का समर्थन करेंगे और उन्हें इस उभरते हुए शक्तिशाली आर्थिक संगठन में एंट्री मिल जाएगी। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट साबित हुई। ब्रिक्स के सदस्य देशों ने पाकिस्तान के आवेदन को सिरे से खारिज कर दिया और संगठन के दरवाजे उसके लिए पूरी तरह बंद रखे। चीन, जो ब्रिक्स का एक बेहद अहम और संस्थापक सदस्य है, उसने भी पाकिस्तान को इस समूह में लाने के लिए कोई ठोस पैरवी नहीं की, जिसे बीजिंग की तरफ से पाकिस्तान को दिया गया एक बहुत बड़ा कूटनीतिक धोखा माना जा रहा है। ब्रिक्स में एंट्री न मिलने के बाद से इस्लामाबाद के हुक्मरान अंदर ही अंदर सुलग रहे हैं और उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

चीन और वैश्विक ताकतों के बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक लाचारी

आज की वैश्विक व्यवस्था में कोई भी देश केवल भीख मांगकर या कर्ज के सहारे लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना रुतबा कायम नहीं रख सकता, और यही कड़वी सच्चाई आज पाकिस्तान के सामने आकर खड़ी हो गई है। चीन जैसी महाशक्तियां अब अपने निवेश और रणनीतिक हितों को उस देश में सुरक्षित नहीं मानतीं जहां राजनीतिक अस्थिरता, कट्टरपंथ और आतंकवाद चरम पर हो। पाकिस्तान के हुक्मरानों ने अपनी असफल नीतियों और देश की सेना की तानाशाही कार्यशैली के कारण पूरी दुनिया में अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो दी है। जब ब्रिक्स जैसे मंचों पर विकास, तकनीक और आर्थिक सहयोग की बात होती है, तो वहां विफल अर्थव्यवस्था और आतंकी कारनामों के लिए कुख्यात देशों के लिए कोई जगह नहीं बचती। यही कारण है कि आज पाकिस्तान न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक पटल पर भी पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है और उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं बचा है।

भारत की बढ़ती वैश्विक चमक और कूटनीतिक विजय के आगे बौना साबित होता पाकिस्तान

एक तरफ जहां पाकिस्तान को दुनिया भर के मंचों पर जिल्लत और बेइज्जती का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत वैश्विक कूटनीति के शिखर पर मजबूती से विराजमान है। भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था, अंतरिक्ष विज्ञान में उपलब्धियां और स्वतंत्र विदेश नीति ने आज दुनिया के हर बड़े देश को भारत का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया है। शंघाई सहयोग संगठन से लेकर जी-20 और ब्रिक्स तक, हर जगह भारत की बात को पूरी गंभीरता से सुना जाता है और वैश्विक फैसले लेने में भारत की भूमिका केंद्रीय बन चुकी है। भारत की इसी चौतरफा सफलता और कूटनीतिक दबदबे को देखकर पाकिस्तान के हुक्मरान अंदर ही अंदर सुलग रहे हैं। पाकिस्तान की जनता भी अब यह भली-भांति समझ चुकी है कि उनके नेताओं की अदूरदर्शिता और देश की सेना की जिद ने उन्हें दुनिया की नजरों में किस कदर गिरा दिया है, जिससे पूरे पाकिस्तान में निराशा और मातम का माहौल है।