चीन छोटी सोच वाला देश नहीं': TBM विवाद पर ग्लोबल टाइम्स का निशाना
भारत और चीन के बीच जारी कूटनीतिक खिंचतान के बीच टनल बोरिंग मशीन (TBM) के निर्यात पर लगे नए प्रतिबंधों को लेकर विवाद गहरा गया है। बीजिंग के इस कदम के बाद भारत में मेट्रो, बुलेट ट्रेन और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में देरी की आशंका जताई जा रही है। इस बीच चीन के सरकारी समाचार पत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने अपने एक कड़े संपादकीय के जरिए भारत पर निशाना साधते हुए कहा है कि "चीन कोई छोटी सोच वाला देश नहीं है" जो भारत की प्रगति को रोकने के लिए ऐसे तुच्छ कदम उठाए। ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि मशीनरी निर्यात पर लगाए गए नियम किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि एक सामान्य वैश्विक नीतिगत प्रक्रिया के तहत लागू किए गए हैं। चीनी मुखपत्र ने इस विवाद के पीछे भारत और पश्चिमी मीडिया द्वारा बनाए जा रहे नैरेटिव का खंडन करते हुए तीन मुख्य कारण पेश किए हैं।
TBM एक्सपोर्ट कंट्रोल का फैसला किसी खास देश के खिलाफ नहीं
ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में लिखा है कि चीन का टनल बोरिंग मशीन (TBM) और अन्य भारी खुदाई उपकरणों पर निर्यात नियंत्रण (Export Controls) लागू करना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और 'द्वि-उपयोग' (Dual-Use) वस्तुओं के प्रबंधन का एक स्वाभाविक हिस्सा है। लेख के अनुसार, ये मशीनें केवल नागरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में ही नहीं, बल्कि सैन्य महत्व की संवेदनशील सुरंगों और रणनीतिक ठिकानों को बनाने में भी इस्तेमाल की जा सकती हैं। इसलिए, ऐसी तकनीक और उपकरणों के निर्यात पर लाइसेंस प्रणाली लागू करना एक जिम्मेदार अंतरराष्ट्रीय मानक है, जिसे भारत की मीडिया बेवजह भारत विरोधी कदम बताकर पेश कर रही है।
चीन ने गिनाए 3 कारण: क्यों भारत को लेकर जताई जा रही बेवजह आशंकाएं
ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय पक्ष और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा लगाए जा रहे 'आर्थिक दबाव' (Economic Coercion) के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए 3 बड़े कारण बताए हैं:
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यह एक वैश्विक नियामक प्रक्रिया है, न कि भारत-केंद्रित प्रतिबंध: चीन का तर्क है कि वाणिज्य मंत्रालय (MOFCOM) द्वारा जारी किए गए एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू होते हैं, जिसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नियमों के दायरे में लाना है।
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पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत और चीन के बीच खाई पैदा करने की कोशिश: चीनी सरकारी मीडिया का कहना है कि पश्चिमी देश और मीडिया घराने इस मामूली तकनीकी और व्यापारिक प्रक्रिया को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में आए हालिया सुधार को नुकसान पहुंचाया जा सके।
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सुरक्षा और तकनीकी गोपनीयता का विषय: उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों (Plateau Areas) में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक भारी मशीनरी में ऐसी संवेदनशील तकनीक शामिल है, जिसे बिना लाइसेंस बाहर भेजना चीनी रक्षा और औद्योगिक हितों के अनुकूल नहीं है।
भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर निर्भरता का सवाल
टनल बोरिंग मशीनरी (TBM) के बाजार में चीन की वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत है। भारत की दिल्ली मेट्रो, मुंबई मेट्रो और 508 किलोमीटर लंबी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना के समुद्री सुरंग खंडों में इन विशालकाय मशीनों और उनके स्पेयर पार्ट्स का भारी इस्तेमाल होता है। यद्यपि भारत अब 'मेक इन इंडिया' और पीएलआई (PLI) योजनाओं के जरिए भारी मशीनरी के घरेलू निर्माण पर तेजी से जोर दे रहा है, लेकिन अल्पावधि में चीनी कलपुर्जों की कमी या लाइसेंस मिलने में देरी से कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने पर असर पड़ सकता है। भारतीय सुरक्षा और व्यापार विशेषज्ञों की नजर 18 नवंबर 2026 से प्रभावी होने वाले इन नए नियमों पर टिकी हुई है।