बांग्लादेश में मिलिट्री ड्रिल के दौरान उड़े चीनी टैंक के परखचे, चीनी हथियारों की गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल
अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता पर एक बार फिर दुनिया भर में बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पड़ोसी देश बांग्लादेश में चल रहे एक नियमित सैन्य अभ्यास के दौरान ऐसा वीभत्स हादसा हुआ जिसने सबको दहला कर रख दिया। बांग्लादेश के चटगांव जिले में स्थित प्रसिद्ध हथाजारी फील्ड फायरिंग रेंज में सेना का एक बख्तरबंद टैंक अचानक जोरदार धमाके के साथ फट गया। इस दर्दनाक विस्फोट की तीव्रता इतनी भयानक थी कि टैंक के परखचे उड़ गए और मौके पर ही हड़कंप मच गया। इस अप्रत्याशित दुर्घटना में बांग्लादेश सेना के दो जांबाज सैनिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी गंभीर रूप से जख्मी हो गया। इस घटना के बाद से सैन्य अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच हड़कंप मचा हुआ है कि आखिर अभ्यास के दौरान इतना बड़ा सुरक्षा चूक या तकनीकी फॉल्ट कैसे सामने आया।
चीनी मूल के टाइप-59 टैंक की विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजारों में उठती उंगलियां
शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो फुटेज के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि दुर्घटना का शिकार होने वाला यह बख्तरबंद वाहन चीन में निर्मित 'टाइप-59' (Type 59) मुख्य युद्धक टैंक था। हालांकि बांग्लादेश के सैन्य जनसंपर्क निदेशालय (ISPR) ने आधिकारिक बयान में अभी तक टैंक के मॉडल की पुष्टि नहीं की है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के उपकरण चीन के डिफेंस एक्सपोर्ट की पोल खोलने के लिए काफी हैं। चीन लंबे समय से विकासशील और एशियाई देशों को अपने सस्ते हथियारों और सैन्य वाहनों की आपूर्ति करता आया है, लेकिन समय-समय पर इनकी गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। टैंक के भीतर हुई इस रहस्यमयी और घातक विस्फोटक दुर्घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या एशियाई देशों की सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे चीनी रक्षा उत्पाद युद्ध के मैदान में सैनिकों के लिए सुरक्षा कवच बनने की बजाय खुद उनके लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
घायल अधिकारी को किया गया एयरलिफ्ट और बांग्लादेश सेना द्वारा उच्चस्तरीय जांच के आदेश
इस भीषण हादसे के तुरंत बाद सैन्य छावनी और राहत दलों में अफरातफरी मच गई। विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए सैन्य अधिकारी को प्राथमिक उपचार के बाद फौरन सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से राजधानी ढाका स्थित प्रतिष्ठित कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) में एयरलिफ्ट कर पहुंचाया गया, जहां उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। वहीं दूसरी ओर, इस वीभत्स दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए बांग्लादेश सेना मुख्यालय ने तुरंत प्रभाव से एक उच्चस्तरीय जांच बोर्ड का गठन कर दिया है। सेना के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह हादसा किसी अंदरूनी यांत्रिक खराबी (Mechanical Failure) की वजह से हुआ, टैंक के गोले या गोला-बारूद (Ammunition) में कोई दोष था, या फिर लाइव-फायरिंग ड्रिल के दौरान कोई अन्य तकनीकी चूक हुई थी।
पुराने पड़ चुके हथियारों के आधुनिकीकरण और सैन्य सुरक्षा पर मंडराते बड़े खतरे
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा केवल एक आकस्मिक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह उन पुरानी होती सैन्य प्रणालियों की ओर इशारा करता है जिन्हें देश बिना पूरी तरह रिटायर किए सिर्फ अपग्रेड कार्यक्रमों के सहारे खींच रहे हैं। बांग्लादेश की सेना अपने बेड़े में शामिल कई दशकों पुराने चीनी मूल के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को जीवन-विस्तार (Life-extension) कार्यक्रमों के तहत आधुनिक बनाने की कोशिश करती रही है। लेकिन इस तरह की घातक दुर्घटनाएं इस बात का साफ प्रमाण हैं कि रक्षा उपकरणों की एक उम्र सीमा होती है और यदि समय रहते उनकी गुणवत्ता और तकनीकी सुरक्षा की गहन समीक्षा नहीं की गई, तो यह सैनिकों के जीवन के लिए घातक साबित हो सकती हैं। इस घटना के बाद से दक्षिण एशिया के उन तमाम देशों में भी चिंता की लहर दौड़ गई है जो बड़े पैमाने पर अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए चीनी रक्षा साजो-सामान पर निर्भर रहते हैं।