दाऊद इब्राहिम की पाकिस्तान में मौजूदगी और कारगुजारियों को नजरअंदाज करने पर लताड़ा

दाऊद इब्राहिम की पाकिस्तान में मौजूदगी और कारगुजारियों को नजरअंदाज करने पर लताड़ा

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत ने एक बार फिर आतंक के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का डंके की चोट पर इजहार किया है। इस बार भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक विशेष दूत को वैश्विक आतंकवाद के सबसे बड़े चेहरों में से एक और भारत के सबसे वांछित भगोड़े आतंकवादी दाऊद इब्राहिम की पाकिस्तान में लगातार चल रही कारगुजारियों और उसकी सुरक्षित पनाहगाह को जानबूझकर नजरअंदाज करने पर बेहद कड़े शब्दों में आड़े हाथ लिया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए साफ कर दिया है कि किस तरह कुछ वैश्विक मंच और अधिकारी पाकिस्तान की सरजमीं पर पल रहे आतंकवादियों और संगठित अपराध सिंडिकेट्स के खिलाफ आंखें मूंदे बैठे हैं। नई दिल्ली ने दो टूक शब्दों में यह संदेश दे दिया है कि आतंकवाद को शरण देने वाले देशों और उनके संरक्षकों को बेनकाब करना वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है और भारत इस मुद्दे पर किसी भी तरह की लीपापोती या ढिलाई को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत का कड़ा रुख, वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ दोहरे रवैये पर सवाल

संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय निकायों में जब भी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होती है, तो भारत की तरफ से हमेशा से ही ठोस सबूत पेश किए जाते रहे हैं। हाल ही में यूएन के एक विशेष दूत द्वारा दी गई रिपोर्ट और बयानों में जिस तरह से पाकिस्तान के अंदर बैठे डी-कंपनी के सरगना दाऊद इब्राहिम और उसके अवैध नेटवर्क की गतिविधियों को या तो पूरी तरह से दबा दिया गया या फिर उन्हें गौण मान लिया गया, उससे भारतीय कूटनीतिक हलकों में गहरी नाराजगी देखने को मिली है। भारतीय राजनयिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने संयुक्त राष्ट्र के इस विशेष दूत के समक्ष कड़े आंकड़े और पुख्ता सबूत रखते हुए यह सवाल पूछा है कि आखिर अंतरराष्ट्रीय कानून के रखवाले ही आतंकवादियों को बचाने या उनके प्रभाव को कम करके आंकने का प्रयास क्यों कर रहे हैं। भारत ने स्पष्ट रूप से यह रेखांकित किया है कि दाऊद इब्राहिम न केवल भारत में 1993 के मुंबई बम धमाकों का मुख्य साजिशकर्ता है, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी, हवाला कारोबार और हथियारों की अवैध सप्लाई के जरिए पूरी दुनिया की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां की सरकार का सीधा संरक्षण प्राप्त है।

पाकिस्तान की धरती से चल रहे अंडरवर्ल्ड नेटवर्क और आईएसआई के गठजोड़ पर भारत की खरी-खरी

भारतीय विदेश मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक बार फिर आगाह किया है कि पाकिस्तान लगातार आतंकवादियों और भगोड़ों के लिए सुरक्षित सेफ हेवन बना हुआ है। कराची और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में दाऊद इब्राहिम के आलीशान ठिकानों, उसकी संपत्तियों और उसके जरिए संचालित होने वाले मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट्स के तमाम दस्तावेज होने के बावजूद, यदि यूएन के अधिकारी इस सच्चाई से मुंह मोड़ते हैं, तो यह वैश्विक न्याय प्रणाली की बहुत बड़ी विफलता है। भारत ने जोर देकर कहा है कि आतंकवाद और अंडरवर्ल्ड के बीच का यह गठजोड़ न केवल दक्षिण एशिया की शांति को तबाह कर रहा है, बल्कि इसके तार वैश्विक स्तर पर सक्रिय आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं। इस कड़े कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और उसके विशेष दूत पाकिस्तान पर आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का दबाव बनाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। भारत के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि देश अपने दुश्मनों को कभी नहीं भूलेगा और दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वालों को बेनकाब करने के लिए हर संभव कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाता रहेगा।