डॉलर का भौकाल खत्म, प्रतिबंधों के डर से ब्रिक्स देशों ने अपनाया अपनी करेंसी का रास्ता, पुतिन ने दुनिया को समझाया नया इकोनॉमिक गेम
वैश्विक वित्तीय प्रणाली (Global Financial System) पर दशकों से राज कर रहे अमेरिकी डॉलर और यूरो के साम्राज्य को अब ब्रिक्स (BRICS) देशों ने खुली चुनौती दे दी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के आर्थिक दबदबे और उनके प्रतिबंधों की कड़े शब्दों में आलोचना की है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के प्लेनरी सेशन को संबोधित करते हुए पुतिन ने बड़ा दावा किया कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों और संपत्तियों को फ्रीज किए जाने के डर से अब दुनिया भर में अविश्वास की भावना पैदा हो गई है। यही वजह है कि भारत, चीन और रूस समेत तमाम ब्रिक्स देश अब अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (National Currencies) को बढ़ावा दे रहे हैं।
पश्चिमी देशों की 'आर्थिक चोरी' ने तोड़ दिया दुनिया का भरोसा
इंडिया टुडे की वरिष्ठ पत्रकार गीता मोहन द्वारा मॉडरेट किए गए इस विशेष सत्र में पुतिन ने यूरोप और अमेरिका की नीतियों पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश मध्य पूर्व समेत दुनिया के कई हिस्सों में अराजकता फैला रहे हैं और अपनी वित्तीय व्यवस्था का राजनीतिक हथियार के रूप में दुरुपयोग कर रहे हैं। यूक्रेन विवाद का जिक्र करते हुए रूसी राष्ट्रपति ने दो टूक कहा कि रूस के रिजर्व फंड को फ्रीज करना सरासर 'चोरी' है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर और यूरो की साख को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। आज दुनिया का हर देश समझ चुका है कि जो हरकत रूस के साथ हुई है, वह कल को किसी के भी साथ हो सकती है, इसलिए हर कोई अब सुरक्षित विकल्प तलाश रहा है।
रूबल और अपनी मुद्राओं में व्यापार कर रूस ने पेश की मिसाल
राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार, पश्चिमी भुगतान प्रणालियों (SWIFT) से बाहर किए जाने के बाद देशों ने एक-दूसरे के साथ द्विपक्षीय व्यापार के लिए अपनी लोकल करेंसी का इस्तेमाल करना तेजी से शुरू कर दिया है। इस नई व्यवस्था में डिजिटल फाइनेंस एसेट्स और केंद्रीय बैंकों की डिजिटल करेंसी (CBDC) की भूमिका बहुत बड़ी होने जा रही है। रूस ने खुद इसका उदाहरण पेश करते हुए बताया कि वह अपने प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ अब सिर्फ अपनी राष्ट्रीय मुद्रा में ही लेन-देन कर रहा है। वर्तमान में रूस के कुल वैश्विक निर्यात का लगभग 65 प्रतिशत व्यापार सीधे तौर पर 'रूबल' (रूसी मुद्रा) में संपन्न हो रहा है, जो डी-डॉलरलाइजेशन (De-dollarization) की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
G7 देशों को बहुत पीछे छोड़ चुका है ब्रिक्स, आंकड़े दे रहे गवाही
पुतिन ने मंच से ब्रिक्स की ताकत का लोहा मनवाते हुए कुछ बेहद चौंकाने वाले आर्थिक आंकड़े दुनिया के सामने रखे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स समूह भविष्य की वैश्विक आर्थिक प्रगति का मुख्य इंजन बन चुका है। पिछले 5 वर्षों में वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में ब्रिक्स देशों का योगदान 49 प्रतिशत रहा है, जबकि अमीर देशों के समूह G7 का योगदान सिमटकर केवल 18 फीसदी रह गया है। क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स की हिस्सेदारी अब बढ़कर 40% हो चुकी है, जबकि G7 की हिस्सेदारी गिरकर 20% से भी कम रह गई है। पुतिन ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स ने साल 2020 में ही G7 को पछाड़ दिया था और आने वाले समय में ब्रिक्स की अर्थव्यवस्थाएं 4% सालाना से अधिक की रफ्तार से बढ़ेंगी।
पूर्व और दक्षिण की तरफ शिफ्ट हुआ ग्लोबल ट्रेड का नया सेंटर
पुतिन ने वैश्विक व्यापार के नए रास्तों का खाका खींचते हुए साफ किया कि अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार का केंद्र पश्चिम से खिसककर पूर्व और दक्षिण (Global South) की ओर शिफ्ट हो रहा है। दुनिया के नए लॉजिस्टिक और व्यापारिक रास्ते अब पश्चिमी देशों के नियंत्रण वाले हब्स को पूरी तरह बायपास कर रहे हैं। 'नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर', 'ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्टेशन रूट' और कैस्पियन सागर से होकर गुजरने वाले नए मार्ग इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर निशाना साधते हुए पुतिन ने कहा कि जब तक पश्चिम को फायदा था, तब तक उन्होंने नियम माने, लेकिन जैसे ही वे प्रतियोगिता में पिछड़ने लगे, उन्होंने खुद ही अपने नियमों से मुंह मोड़ लिया, जिससे वैश्विक संस्थाओं की विश्वसनीयता अब पूरी तरह खत्म हो गई है।