पाकिस्तान में दोहरे हादसों का कहर: अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग से 15 मासूम नवजात जिंदा जले,मचा हड़कंप!

पाकिस्तान में दोहरे हादसों का कहर: अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग से 15 मासूम नवजात जिंदा जले,मचा हड़कंप!

पाकिस्तान से एक दिल दहला देने वाली और बेहद झकझोर कर रख देने वाली खबर सामने आ रही है जहाँ एक तरफ देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक दर्दनाक घटना में अस्पताल के अंदर भीषण आग लगने से 15 मासूम नवजात बच्चों की जलकर अकाल मौत हो गई है तो वहीं दूसरी तरफ एक अन्य बड़े सड़क हादसे में एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार का कहर बरपा है जहाँ एक भयानक टक्कर के बाद 10 यात्रियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई है और इन दोनों ही दर्दनाक हादसों के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है तथा आम जनता में सरकार और प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा भी देखने को मिल रहा है क्योंकि एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों पर हुए इन बड़े हादसों ने देश को अंदर से हिलाकर रख दिया है और हर कोई यही सोच रहा है कि आखिर इस तरह की लापरवाही और हादसों का सिलसिला कब थमेगा।

अस्पताल के आईसीयू वार्ड में मची अफरातफरी और आग का तांडव

प्राप्त जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के एक प्रमुख अस्पताल में उस वक्त अचानक से चीख-पुकार मच गई जब अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई यानी नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में अचानक से शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य तकनीकी कारण से भयानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते आग ने पूरे वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया चूंकि यह नवजात बच्चों का आईसीयू वार्ड था इसलिए वहां भर्ती मासूम बच्चे अपनी रक्षा खुद करने में पूरी तरह असमर्थ थे और जब तक अस्पताल का स्टाफ और दमकल विभाग की गाड़ियां आग पर काबू पाने की कोशिश करतीं तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इस भीषण अग्निकांड में 15 मासूम नवजातों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई जबकि कई अन्य बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए जिन्हें तुरंत नजदीकी दूसरे अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है लेकिन इस घटना ने एक बार फिर से अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर सेफ्टी ऑडिट और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है क्योंकि शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि अस्पताल के भीतर अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे और समय रहते अलार्म सिस्टम भी ठीक से काम नहीं कर पाया जिसकी वजह से इतना बड़ा हादसा हो गया और देखते ही देखते कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं और वे अपने जिगर के टुकड़ों को खोने के बाद गहरे सदमे में चले गए हैं।

एक्सप्रेसवे पर हुआ एक और दर्दनाक हादसा, काल के गाल में समाए 10 लोग

अभी अस्पताल की आग के गम से लोग उबर भी नहीं पाए थे कि पाकिस्तान के एक व्यस्त एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार और लापरवाही का एक और खौफनाक मंजर देखने को मिला जहां एक भीषण सड़क हादसे में कम से कम 10 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं स्थानीय पुलिस और राहत एवं बचाव दलों से मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा इतना भयानक था कि टक्कर के बाद वाहनों के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर चारों तरफ चीख-पुकार मच गई शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि तेज रफ्तार वाहन ने नियंत्रण खो दिया था या फिर कम विजिबिलिटी और लापरवाही की वजह से यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला और पल भर में ही 10 मुसाफिरों की सांसें हमेशा के लिए थम गईं हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने मिलकर राहत कार्य शुरू किया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर से सड़कों पर होने वाली मौतों और यातायात नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग की होड़ अक्सर इस तरह की दर्दनाक तबाही का सबब बनती है और देश के नागरिक लगातार खराब सड़कों और लापरवाह ड्राइविंग के चलते अपनी जान गंवाने को मजबूर हो रहे हैं।

सरकार की नाकामी और जनता में बढ़ता जबरदस्त आक्रोश

एक तरफ जहां अस्पताल के अंदर मासूम बच्चों का इस तरह जलकर मरना किसी भी सभ्य समाज के लिए एक बदनुमा दाग है तो वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर बेकसूर लोगों का यूं मारा जाना प्रशासन की लचर व्यवस्था को साफ तौर पर बयां करता है इन दोनों ही हादसों के सामने आने के बाद देश भर में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और विपक्षी दलों के साथ-साथ आम नागरिकों ने भी सरकार और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं लोगों का साफ कहना है कि यदि अस्पतालों में सुरक्षा के मानक कड़ाई से लागू किए जाते और समय-समय पर फायर ऑडिट कराया जाता तो शायद उन 15 मासूम नवजातों की जान बचाई जा सकती थी और इसी प्रकार यदि यातायात पुलिस और मोटरवे अथॉरिटी ने एक्सप्रेसवे पर नियमों का सख्ती से पालन कराया होता तो शायद 10 लोगों की इस तरह जान नहीं जाती फिलहाल संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों ही मामलों में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं और यह भरोसा दिलाया है कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच के आदेश देने मात्र से उन परिवारों के आंसू सूख जाएंगे जिन्होंने अपनों को खो दिया है और क्या इस तरह के हादसों को रोकने के लिए भविष्य में कोई ठोस और स्थाई कदम उठाए जाएंगे, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा फिलहाल पूरे देश में मातम का माहौल है और हर कोई इन दोनों ही दुर्घटनाओं के पीड़ितों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त कर रहा है।