पैगंबर की मस्जिद को बिजली सप्लाई करने वाले पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला, भड़के मुस्लिम देश

पैगंबर की मस्जिद को बिजली सप्लाई करने वाले पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला, भड़के मुस्लिम देश

मध्य पूर्व के सुलगते रेगिस्तान और उथल-पुथल भरे सामरिक परिदृश्य से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी इस्लामिक दुनिया में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इस बार अपनी हरकतों से कूटनीति और मानवता की तमाम सीमाओं को लांघ दिया है। प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने सीधे तौर पर उस मुख्य पावर स्टेशन को निशाना बनाते हुए एक खतरनाक ड्रोन हमला किया है, जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में शुमार पैगंबर की मस्जिद को बिजली की निर्बाध सप्लाई प्रदान करता है। इस कायराना और बेहद संवेदनशील हमले के बाद से खाड़ी देशों और वैश्विक स्तर पर मुस्लिम राष्ट्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। दुनिया भर के इस्लामिक संगठनों और देशों ने इस नापाक हरकत की कड़े शब्दों में निंदा की है, क्योंकि किसी भी वैचारिक या सैन्य संघर्ष के दौरान धार्मिक आस्था के केंद्रों और उनसे जुड़ी बुनियादी संरचनाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवीय मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ माना जाता है। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व की भू-राजनीति को एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा कर दिया है, जहां हर कोई हूतियों की इस दुस्साहसिक कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है।

हूती विद्रोहियों का दुस्साहस और पवित्र स्थल पर ड्रोन हमला

यमन के सक्रिय हूती विद्रोही पिछले कुछ समय से मध्य पूर्व के विभिन्न सामरिक और व्यावसायिक ठिकानों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने जिस ठिकाने को चुना है, उसने सभी को सन्न कर दिया है। पैगंबर की मस्जिद वह पवित्र स्थान है जिसके साथ दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की गहरी आस्तिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में उस क्षेत्र को रोशन करने वाले और जरूरी सेवाएं देने वाले पावर प्लांट पर ड्रोन हमला करना यह साबित करता है कि हूती विद्रोहियों को अब किसी भी प्रकार के नैतिक बंधन की परवाह नहीं है। शुरुआती सुरक्षा रिपोर्टों से यह खुलासा हुआ है कि इस हमले के लिए उन्नत और विस्फोटक से लैस ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था, जिसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति को पूरी तरह ठप करना था। हालांकि, स्थानीय सुरक्षा तंत्र और आपातकालीन टीमों ने अपनी सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए एक बड़े संभावित संकट को टालने में कामयाबी हासिल की, लेकिन इस हमले के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं।

मुस्लिम देशों और इस्लामिक संगठनों में भड़का भारी गुस्सा

हूतियों की इस घिनौनी हरकत के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति और इस्लामिक जगत में विरोध की आंधी उठ खड़ी हुई है। सऊदी अरब समेत तमाम प्रमुख खाड़ी देशों और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के उच्च अधिकारियों ने इस हमले की तीव्र भर्त्सना की है। इन देशों का स्पष्ट तौर पर यह कहना है कि क्षेत्रीय राजनीति या राजनीतिक रंजिश साधने के नाम पर इस्लाम के पवित्र स्थलों की बुनियादी सेवाओं को खतरे में डालना एक असहनीय और आपराधिक कृत्य है। मुस्लिम जगत के नेताओं ने हूती विद्रोहियों को समर्थन देने वाली बाहरी ताकतों पर भी निशाना साधा है और चेतावनी दी है कि यदि इस तरह के हमलों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसके बेहद गंभीर परिणाम पूरे क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार जिस प्रकार से खाड़ी के अन्य देशों ने एकजुट होकर हूतियों की आलोचना की है, उससे यमन के इस विद्रोही गुट का कूटनीतिक दायरा और अधिक सिमटता जा रहा है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उनका समर्थन पूरी तरह समाप्त हो गया है।

क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए बढ़ता नया खतरा

इस सनसनीखेज ड्रोन हमले ने मध्य पूर्व की समग्र सुरक्षा और ऊर्जा गलियारों की संवेदनशीलता को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हूती विद्रोही अब केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक शांति और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले कृत्यों पर उतर आए हैं। इस प्रकार की घटनाएं न केवल मध्य पूर्व के आर्थिक विकास और पर्यटन को प्रभावित करती हैं, बल्कि दुनियाभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंचाती हैं। भारत सहित दुनिया के कई अन्य देशों ने भी इस घटना पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है और यह माना है कि आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक सख्त और निर्णायक रुख अपनाने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि हूतियों के इस दुस्साहस के बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां और खाड़ी के देश मिलकर क्या ठोस और रणनीतिक कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की पवित्र जगहों और जीवनोपयोगी बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखा जा सके।