भारतीयों के लिए बंद हो सकता है EB-1 ग्रीन कार्ड, जानें आवेदन का पूरा खर्च और प्रक्रिया
अमेरिका में वर्तमान वित्तीय वर्ष 30 सितंबर को समाप्त होने जा रहा है, जिससे ठीक पहले अमेरिकी इमिग्रेशन प्रशासन के एक अलर्ट ने भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी है। अत्यधिक मांग के चलते भारत के लिए रोजगार-आधारित EB-1 (एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड फर्स्ट प्रेफरेंस) श्रेणी का ग्रीन कार्ड कोटा इस वित्त वर्ष में अस्थायी रूप से पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
दशकों से अमेरिका में स्थायी निवास पत्र हासिल करने की कतार में खड़े लाखों भारतीय आईटी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और प्रोफेशनल्स के लिए इसे एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। इस संकट के बीच यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी ग्रीन कार्ड आखिर क्या विशेषाधिकार देता है और इसे हासिल करने में कितना खर्च आता है।
स्थायी निवास का कानूनी आधार: क्या है अमेरिकी ग्रीन कार्ड?
आधिकारिक तौर पर 'परमानेंट रेजिडेंट कार्ड' के नाम से पहचाना जाने वाला ग्रीन कार्ड किसी भी विदेशी नागरिक को संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थायी रूप से बसने, वैध नौकरी करने और स्वतंत्र रूप से व्यापार चलाने की कानूनी अनुमति देता है। ग्रीन कार्ड धारक को अमेरिकी नागरिकों के समान सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है। हालांकि, इसे पाने की चयन प्रक्रिया बेहद जटिल और स्तरीय है, जो आवेदक की उच्च शैक्षणिक योग्यता, विशेषज्ञता, कार्य अनुभव, पारिवारिक पृष्ठभूमि या देश में किए गए प्रत्यक्ष आर्थिक निवेश पर निर्भर करती है।
रोजगार और परिवार आधारित आवेदन पर सरकारी शुल्क का गणित
अमेरिका के भीतर से साधारण प्रक्रिया के तहत आवेदन करने पर प्रवासियों को फॉर्म फीस और अनिवार्य प्रशासनिक शुल्क चुकाना पड़ता है। रोजगार आधारित श्रेणी में प्रायोजक नियोक्ता को फॉर्म I-140 (इमिग्रेंट पेटीशन फॉर एलियन वर्कर) दाखिल करना होता है, जिसकी सरकारी फीस लगभग 715 डॉलर (तकरीबन 60,000 रुपये) निर्धारित है। वहीं पारिवारिक आधार पर आवेदन के लिए फॉर्म I-130 का शुल्क 625 से 675 डॉलर के आसपास बैठता है। यदि आवेदक पहले से ही किसी वैध वीजा पर अमेरिका के भीतर मौजूद है, तो उसे 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' के लिए फॉर्म I-485 भरना होता है, जिसकी लागत अकेले लगभग 1,440 डॉलर (करीब 1.2 लाख रुपये) आती है।
कंसुलर प्रोसेसिंग और मेडिकल जांच पर होने वाला कुल खर्च
यदि कोई भारतीय पेशेवर या नागरिक भारत से ही ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रहा है, तो उसे अमेरिकी दूतावास के जरिए कंसुलर प्रोसेसिंग से गुजरना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया में फॉर्म DS-260 और संबंधित विभागीय प्रक्रियाओं के लिए लगभग 325 डॉलर की सरकारी फीस देनी होती है। इसके अलावा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और यूएससीआईएस इमिग्रेंट फीस के रूप में लगभग 235 डॉलर अतिरिक्त लगते हैं। आवश्यक मेडिकल परीक्षणों, पुलिस क्लीयरेंस और सरकारी दस्तावेजों को मिलाकर यह प्राथमिक खर्च 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये के बीच पहुंच जाता है, जिसमें इमिग्रेशन वकीलों की कानूनी फीस शामिल नहीं होती।