नेपाल में अचानक बाढ़ से तबाही, हेडमास्टर की सूझबूझ से 1,600 छात्रों की जान बची

नेपाल में अचानक बाढ़ से तबाही, हेडमास्टर की सूझबूझ से 1,600 छात्रों की जान बची

नेपाल की त्रिशूली घाटी में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ के बीच एक ऐसा साहसिक वाकया सामने आया जिसने सैकड़ों परिवारों को उजड़ने से बचा लिया। त्रिशूली स्थित 'त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल' में आम दिनों की तरह कक्षाएं चल रही थीं और करीब 900 छात्र स्कूल परिसर में मौजूद थे, जबकि कुल 1,600 छात्र इस विद्यालय में पढ़ते हैं। इसी दौरान स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी को एक परिचित का फोन आया, जिसने चेतावनी दी कि ऊपरी इलाकों में प्रलयंकारी बाढ़ आ चुकी है और कई गांव जलमग्न हो गए हैं।

एक फोन कॉल पर एक्शन: 700 छात्रों की बसों को रास्ते से ही लौटाया

खतरे की गंभीरता को भांपते हुए प्रिंसिपल दवाडी ने बिना घबराए फौरन स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने तुरंत रिकॉर्ड चेक कर पता लगाया कि 700 छात्र अभी भी पैदल या बसों के जरिए रास्ते में हैं। स्कूल भले ही नदी के जलस्तर से 200 फीट की ऊंचाई पर था, लेकिन खतरे की आशंका को देखते हुए प्रिंसिपल ने तुरंत सभी बस चालकों को संपर्क कर निर्देश दिया कि वे स्कूल आने के बजाय बसों को तुरंत सुरक्षित रास्तों की ओर वापस मोड़ लें।

पुल टूटने से चंद सेकंड पहले मुड़ी बस, बच्चों को पहाड़ी पर ले जाया गया

इसी दौरान एक अभिभावक का फोन आया कि सैलाब तेजी से स्कूल की तरफ बढ़ रहा है। ठीक उसी समय एक स्कूल बस परिसर के पास पहुंचती दिखाई दी। प्रिंसिपल दवाडी ने बिना एक पल गंवाए ड्राइवर को गाड़ी फौरन यू-टर्न लेने को कहा। बस ने जैसे ही सामने बने पुल को पार किया, उसके तुरंत बाद उफनती लहरों ने उस पुल को तिनके की तरह बहा दिया। इसके तुरंत बाद प्रिंसिपल ने सभी शिक्षकों को पूरे स्कूल परिसर को खाली कराकर सभी बच्चों को पहाड़ी की सुरक्षित चोटी पर ले जाने का आदेश दिया।

1644 में से 1643 लोगों की बची जान, एक शिक्षक ने गंवाई जान

निकासी के दौरान घबराहट और दहशत के चलते एक छात्रा को पैनिक अटैक आ गया, जिसे हेडमास्टर ने खुद अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और बाकी बच्चों को पैदल चढ़ाई करवाकर सुरक्षित किया। प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी के त्वरित और साहसी फैसलों की बदौलत उस वक्त स्कूल में मौजूद 1,644 लोगों में से 1,643 छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों की जान सुरक्षित बच गई। हालांकि, इस भीषण प्राकृतिक आपदा में स्कूल के एक शिक्षक संतोष परियार की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई, जो पानी के तेज बहाव में बह गए थे।

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