इजरायल में गादी आइजनकोट को मिला 67 सांसदों का समर्थन

इजरायल में गादी आइजनकोट को मिला 67 सांसदों का समर्थन

इजरायल की राजनीति में एक युगांतरकारी राजनीतिक मोड़ देखने को मिल रहा है, जहां लंबे समय से देश की सत्ता पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू के युग के अंत के संकेत मिलने लगे हैं। 26वीं नेसेट (संसद) के गठन के बाद राष्ट्रपति भवन में आयोजित दो दिवसीय परामर्श प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस राजनीतिक परामर्श में 'यसार' (Yashar!) पार्टी के प्रमुख और इजरायल रक्षा बलों (IDF) के पूर्व प्रमुख गादी आइजनकोट (Gadi Eisenkot) ने अप्रत्याशित बढ़त हासिल करते हुए स्पष्ट बहुमत के लिए जरूरी 61 के आंकड़े को पार कर 67 सांसदों का समर्थन जुटा लिया है। इसके विपरीत निवर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को महज 46 सांसदों का समर्थन मिल सका। इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने संसद में बहुमत के इस परिदृश्य को देखते हुए घोषणा की है कि वे रविवार को आधिकारिक तौर पर सरकार बनाने का न्योता सौंपेंगे।

67 सांसदों का मिला समर्थन: राष्ट्रपति इसाक हर्जोग रविवार को करेंगे औपचारिक फैसला

राष्ट्रपति इसाक हर्जोग द्वारा 120 सदस्यीय नेसेट के सभी निर्वाचित गुटों के साथ की गई सिलसिलेवार बैठकों में शक्ति प्रदर्शन का यह नया समीकरण खुलकर सामने आया। राष्ट्रपति आवास पर अपनी बात रखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में अपनी सिफारिशएं दर्ज कराईं। गादी आइजनकोट के पक्ष में उनकी अपनी पार्टी यसार, द डेमोक्रेट्स, येश अतीद, बेयाहाद, इजरायल बेइतेनु के साथ-साथ अरब बहुसंख्यक पार्टियों 'राम' (Ra'am) और 'जॉइंट लिस्ट' (Joint List) ने भी समर्थन दिया। वहीं दूसरी ओर, बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को केवल उनके पारंपरिक दक्षिणपंथी सहयोगियों का समर्थन मिला, जबकि यूनाइटेड टोरा जुडाइज्म (UTJ) ने किसी भी उम्मीदवार की सिफारिश न कर नेतन्याहू के खेमे को झटका दे दिया। राष्ट्रपति हर्जोग ने साफ किया कि रविवार को वे देश में एक स्थायी सरकार देने के लिए आधिकारिक तौर पर जनादेश प्रदान करने का निर्णय लेंगे।

नेतन्याहू के नेतृत्व पर बड़ा झटका और गादी आइजनकोट की नई राह

बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ 67 सांसदों का यह एकजुट समर्थन इजरायल की घरेलू राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। यसार पार्टी ने अपने बयान में कहा कि जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया है और निवर्तमान प्रधानमंत्री नेतन्याहू के पास अब कोई संसदीय बहुमत या नैतिक अधिकार नहीं बचा है। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी रणनीतिक समझ और संतुलित प्रशासनिक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से आपातकालीन राष्ट्रीय सरकार के गठन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की है ताकि देश के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों और सामाजिक मतभेदों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

गठबंधन के भीतर वैचारिक चुनौतियां और इजरायल के भविष्य का नक्शा

भले ही गादी आइजनकोट ने संसद में बहुमत के लिए आवश्यक 61 से अधिक सिफारिशें जुटा ली हों, लेकिन उनके सामने विभिन्न धड़ों और विचारों वाले दलों को एक स्थायी सरकार के ढांचे में बांधे रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इस विस्तृत गठबंधन में धर्मनिरपेक्ष दक्षिणपंथी, वामपंथी और अरब प्रतिनिधि शामिल हैं। हालांकि, इस अभूतपूर्व राजनीतिक गोलबंदी ने यह तय कर दिया है कि नेतन्याहू का राजनीतिक एकाधिकार टूट चुका है। आने वाले रविवार को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के फैसले के बाद इजरायल में एक नए राजनीतिक अध्याय का सूत्रपात होने जा रहा है।