PAK में इतिहास खुद को दोहरा रहा... मुनीर और शहबाज के उड़े होश, क्या इमरान खान के साथ हुई कोई बड़ी सीक्रेट डील?
पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां अतीत के पन्ने पलटते हुए साफ नजर आ रहा है कि देश में इतिहास खुद को एक नए रूप में दोहरा रहा है। अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत बिगड़ने और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में उनके ट्रांसफर के आदेश ने रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय से लेकर इस्लामाबाद के प्रधानमंत्री कार्यालय तक खलबली मचा दी है। इस पूरी हलचल के बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर की जोड़ी के खिलाफ इमरान खान की यह कोई बड़ी रणनीतिक चाल है या फिर पर्दे के पीछे किसी गुप्त समझौते की तैयारी चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और सैन्य तंत्र में बेचैनी
पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इमरान खान को जेल से निकालकर अस्पताल में इलाज की अनुमति देने वाले कड़े निर्देश ने मौजूदा हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है। सरकार की तरफ से इस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई पुनर्विचार याचिकाओं का तकनीकी आधार पर खारिज होना या वापस लिया जाना यह साबित करता है कि अदालती स्तर पर भी व्यवस्था का झुकाव अब बदल रहा है। जानकारों का मानना है कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ कभी नहीं चाहते थे कि इमरान खान जेल की चारदीवारी से बाहर आएं, क्योंकि उनकी लोकप्रियता आज भी पाकिस्तान के जनमानस और सेना के निचले रैंक के बीच गहरी बनी हुई है।
नवाज शरीफ के दौर की यादें और गुप्त समझौतों के कयास
वरिष्ठ पाकिस्तानी विश्लेषकों और मीडिया में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या मौजूदा हालात वैसे ही हैं जैसे कभी पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के समय हुआ करते थे। इतिहास गवाह है कि कैसे नवाज शरीफ को भी कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी पेचीदगियों के बीच चुपचाप गुप्त सौदों के जरिए राहत मिली थी और वे देश छोड़कर विदेश चले गए थे। ऐसे में शरीफ परिवार और सत्ताधारी दलों को यह अंदेशा सता रहा है कि कहीं इमरान खान के मामले में भी कोई ऐसी ही सीक्रेट डील या पर्दे के पीछे का खेल तो नहीं पक रहा है, जिससे आने वाले समय में पाकिस्तान की सत्ता का समीकरण पूरी तरह पलट जाए।
सेहत का संकट और परिवार की खामोशी से गहराया रहस्य
अदियाला जेल के भीतर से आई मेडिकल रिपोर्ट्स में इमरान खान के बढ़ते ब्लड प्रेशर और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं ने उनके समर्थकों को सड़कों पर ला खड़ा किया है। हाल ही में उनकी बहन नूरीन नियाजी द्वारा जेल में उनसे मुलाकात किए जाने के बावजूद मीडिया के सामने किसी भी प्रकार का बयान न देना और पूरी तरह चुप्पी साधना इस रहस्य को और गहरा कर रहा है। पीटीआई (PTI) समर्थकों का साफ कहना है कि यदि उनके नेता को कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की होगी।
निष्कर्ष: क्या पाकिस्तान की सियासत में आने वाला है बड़ा भूचाल?
मौजूदा परिदृश्य यह साफ बयां करता है कि पाकिस्तान का पावर कॉरिडोर एक बार फिर से भारी दबाव में है। एक तरफ जहां सरकार और सेना मिलकर इमरान खान के प्रभाव को कम करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अदालती फैसलों और जनसमर्थन के चलते उनकी रणनीतियां कमजोर पड़ती दिख रही हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह अदालती राहत वाकई किसी बड़े राजनीतिक समझौते का हिस्सा बनती है या फिर पाकिस्तान की फौज और इमरान खान के बीच का यह टकराव देश को किसी नए संघर्ष की ओर धकेलता है।