चरखी दादरी का खौफनाक हादसा, 2 विमान टकराए, मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में किया याद
चरखी दादरी विमान हादसा: 1996 की वह खौफनाक त्रासदी जब आसमान में टकराए दो विमान और चली गई थीं 349 जानें, मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्यों किया याद?
भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ दुर्घटनाएं ऐसी दर्ज हैं जिनकी सिहरन आज भी लोगों के जेहन को झकझोर कर रख देती है। ठीक ऐसा ही एक खौफनाक और दिल दहला देने वाला मंजर हरियाणा के चरखी दादरी में उस वक्त देखने को मिला था, जब आसमान में दो विमान आपस में इस तरह टकराए कि चंद सेकेंडों के भीतर ही चारों तरफ तबाही का ऐसा तांडव मच गया जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। उस भीषण दुर्घटना में कुल 349 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जो विमानन इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक माना जाता है। इतने साल बीत जाने के बाद भी उस हादसे के जख्म पूरी तरह से भरे नहीं हैं, और हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा न्यूयॉर्क में इस ऐतिहासिक त्रासदी को याद किए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर से वैश्विक पटल पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
12 नवंबर 1996 की वह मनहूस शाम जब चरखी दादरी के आसमान में हुआ था इतिहास का सबसे बड़ा विमान हादसा
साल 1996 की 12 नवंबर की वह शाम सामान्य दिनों की तरह ही शुरू हुई थी, लेकिन किसी को इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में हरियाणा के चरखी दादरी के ऊपर का आसमान मौत के साए में बदल जाएगा। सऊदी अरब एयरलाइंस का बोइंग 747 विमान, जो दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरकर अपने गंतव्य की ओर जा रहा था, और कजाकिस्तान एयरलाइंस का इल्यूशिन Il-76 विमान, जो दिल्ली की तरफ आ रहा था, एक ही हवाई गलियारे में आमने-सामने आ गए। तकनीकी खामियों, संवाद की भारी कमी और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ संपर्क टूटने की वजह से दोनों विमान इतनी भयानक गति से आपस में टकराए कि तेज धमाके के साथ हवा में ही उनके टुकड़े-टुकड़े हो गए। इस वीभत्स टक्कर के बाद विमानों का मलबा चरखी दादरी के खेतों और रिहायशी इलाकों में आ गिरा, जिससे जमीन पर मौजूद लोगों की सांसें भी थम गईं।
349 निर्दोष लोगों की असमय मौत से दहल गई थी पूरी मानवता, विमानन सुरक्षा पर खड़े हुए थे गंभीर सवाल
चरखी दादरी विमान हादसे में विमानों में सवार यात्रियों, चालक दल के सदस्यों और जमीन पर मौजूद कुछ लोगों को मिलाकर कुल 349 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। मरने वालों में कई देशों के नागरिक शामिल थे, जिससे यह त्रासदी केवल भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा आघात बन गई थी। जब राहत और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे, तो वहां का दृश्य इतना भयानक था जिसे देखकर मजबूत से मजबूत दिल वाले इंसान की भी रूह कांप उठी। हर तरफ बिखरे हुए शव, जलते हुए विमान के अवशेष और अपनों को खोने वाले परिवारों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा था। इस दर्दनाक हादसे के बाद वैश्विक स्तर पर एविएशन इंडस्ट्री, एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और पायलटों के बीच संवाद स्थापित करने की प्रणाली पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद विमानन सुरक्षा नियमों में कड़े बदलाव किए गए ताकि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के संबोधन ने क्यों ताजा कर दीं चरखी दादरी हादसे की यादें?
समय के पहिए के साथ भले ही यह भीषण दुर्घटना पुरानी हो चुकी हो, लेकिन हाल ही में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा इस हादसे का जिक्र किए जाने के बाद इसने एक बार फिर से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अपने संबोधन के दौरान मानवीय संवेदनाओं, जीवन की अनिश्चितता और इतिहास के महत्वपूर्ण पन्नों पर बात करते हुए उन्होंने चरखी दादरी की इस त्रासदी का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के समाचार माध्यमों तक एक बार फिर से उस काली शाम और उसमें जान गंवाने वाले 349 लोगों की यादें ताजा हो गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ऐतिहासिक घटनाओं को याद रखना हमें भविष्य के लिए अधिक सतर्क और संवेदनशील बनाता है ताकि मानवता इस प्रकार के बड़े संकटों और लापरवाही से हमेशा सुरक्षित रह सके।